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Chirag Paswan की मां नहीं लड़ेंगी राज्यसभा का चुनाव!, केंद्रीय मंत्री ने खुद दी जानकारी

TV 24 Network February 21, 2026 0
Chirag Paswan
Chirag Paswan

Lucknow Desk: बिहार में पांच राज्यसभा सीटों के चुनाव का बिगुल बज चुका है। इसकी नामांकन प्रक्रिया 26 फरवरी 2026 से शुरु होगी। इसी बीच चर्चा हो रही थी कि केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान की मां रीना पासवान राज्यसभा का चुनाव लड़ेंगी, लेकिन इस चर्चा पर चिराग ने खुद विराम लगा दिया है। पटना में उन्होंने साफ-साफ कहा कि उनकी मां रीना पासवान राज्यसभा चुनाव की कैंडिडेट नहीं हैं। मार्च में होने वाले राज्यसभा चुनाव में हमारी मां की कोई दावेदारी नहीं होगी। हालांकि, चिराग पासवान ने ये नहीं कहा कि राज्यसभा सीट पर उनकी दावेदारी नहीं होगी।

पांच सीटों में से मां के लिए कोई दावेदारी नहीं

शुक्रवार (20 फरवरी, 2026) को पत्रकारों से बात करते हुए चिराग पासवान ने जानकारी दी कि उनकी मां राज्यसभा चुनाव नहीं लडेंगी। उन्होंने कहा कि प्रभु मैं इस बात को स्पष्ट कर दूं कि मेरी मां राजनीति में नहीं आ रही हैं। आप लोग इसे कतई डिबेट का हिस्सा नहीं बनाएं। वह (रीना पासवान) अपने आप को सक्रिय राजनीति से दूर रखती हैं। रखना चाहती हैं।

केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने आगे कहा, एक मां होने के नाते ये जरूर है कि वो मेरे साथ सार्वजनिक रूप से मंच पर दिखती हैं या अर्धांगिनी होने के नाते मेरे पिता के साथ दिखी होंगी, लेकिन वो सक्रिय राजनीति में कतई नहीं आना चाहतीं। मेरी मां की पांच राज्यसभा सीटों में से कोई दावेदारी नहीं है। इतना जरूर मानता हूं कि पांच की पांच सीटें हमारा एनडीए गठबंधन जीतेगा। इसमें कहीं कोई संदेह नहीं है।

यह बात कहां से आई की चिराग की मां जाएंगी राज्यसभा?

दरअसल, बिहार की सियासत में चर्चा हो गई थी कि राज्यसभा की पांचवीं सीट लोजपा (रामविलास) के खाते में जाएगी। इसलिए चर्चाएं थी कि चिराग पासवान की मां रीना पासवान राज्यसभा जाएंगी। मिली जानकारी के अनुसार, ये बताया जा रहा था कि बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में मात्र 29 सीटों पर लड़ने वाली लोजपा (आर) के साथ ये समझौता हुआ था कि फिलहाल आप 29 सीटों पर लड़ें, बाद में एक राज्यसभा सीट आपके खाते में जाएगी। ऐसा इसलिए क्योंकि लोजपा (आर) के राष्ट्रीय अध्यक्ष चिराग पासवान 35 से 40 सीट लड़ना चाहते थे। लोजपा (आर) का गणित तब ये था कि उसके पांच सांसद हैं तो प्रति लोकसभा के अनुसार सात विधानसभा सीटें होनी चाहिए, लेकिन लोजपा (आर) को जब 29 सीटें मिली थी तो ये चर्चा थी कि उसे इसके बदले एक राज्यसभा सीट मिलेगी।

इसलिए राज्यसभा की पांचवीं सीट पर चिराग पासवान की पार्टी लड़ेगी, इसकी चर्चा तेज थी। इसी बीच लोजपा (आर) के मंत्री संजय कुमार सिंह का एक बयान आया था जिसमें उन्होंने कहा था कि एक सीट लोजपा लड़ेगी और हम सब चिराग पासवान की मां रीना पासवान को राज्यसभा भेजना चाहते हैं। जिसके बाद से राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज थी कि चिराग की मां रीन पासवान राज्यसभा जा सकती हैं, हालांकि चिराग पासवान ने खुद जानकारी देकर साफ कर दिया कि उनकी मां राज्यसभा चुनाव नहीं लड़ेंगी।

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Bihar Chunav से पहले Anant Singh की बढ़ी मुश्किलें, दुलार चंद यादव के हत्या मामले में फंसे बाहुबली

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नाती अगस्त्य की Ikkis का ट्रेलर देखकर इमोशनल हुए Amitabh Bachchan!

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अंबाला एयरफोर्स स्टेशन पहुंचीं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, फाइटर जेट में उड़ान भरने वाली दूसरी महिला राष्ट्रपति

Lucknow Desk: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने आज बुधवार को भारतीय वायुसेना के लड़ाकू विमान राफेल में उड़ान भरकर इतिहास रच दिया है। इससे पहले राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू सुखोई-3 MKI लड़ाकू विमान में भी उड़ान भर चुकी हैं। राष्ट्रपति की इस उड़ान ने आज भारतीय वायुसेना के साथ-साथ पूरे देश को गौरव से भर दिया है। बता दें, भारत का राष्ट्रपति तीनों सेनाओं की कमांडर होता है और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर मौजूद हैं। अंबाला एयरफोर्स स्टेशन पहुंचीं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू आज सुबह अंबाला एयरबेस पहुंचीं, जहां वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल ए. पी. सिंह और वरिष्ठ अधिकारियों ने उनका स्वागत किया। बता दें, राष्ट्रपति का यह उड़ान न केवल साहसिक नेतृत्व शैली का प्रतीक है, बल्कि भारत की बढ़ती रक्षा क्षमता और 'आत्मनिर्भर भारत' के संकल्प को वैश्विक पटल पर मजबूती से प्रदर्शित करना भी है। फाइटर जेट में उड़ान भरने वाली दूसरी महिला राष्ट्रपति मुर्मू राष्ट्रपति मुर्मू ने फाइटर जेट की सवारी ये पहली बार नहीं की हैं। उन्होंने इससे पहले 8 अप्रैल 2023 को असम के तेजपुर एयरफोर्स स्टेशन से सुखोई-30 MKI फाइटर विमान में भी उड़ान भर चुकी हैं। वह फाइटर जेट उड़ाने वाली तीसरी राष्ट्रपति और दूसरी महिला राष्ट्राध्यक्ष बनी थीं। राष्ट्रपति मुर्मू ने से पहले पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम और प्रतिभा पाटिल ने भी सुखोई-30 MKI में उड़ान भरी थी। राफेल लड़ाकू विमान का क्या है इतिहास? बता दें, राफेल लड़ाकू विमान फ्रांसीसी कंपनी दसॉ एविएशन द्वारा निर्मित किया गया है। सितंबर 2020 में अंबाला एयरफोर्स स्टेशन पर भारतीय वायुसेना में औपचारिक रूप से शामिल किया गया था। अंबाला एयरबेस राफेल स्क्वाड्रन ‘गोल्डन एरोज' का मुख्य केंद्र है। इन विमानों का इस्तेमाल हाल ही में ‘ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान किया गया था, इसके माध्यम से आतंकवादी ठिकानों पर हमले कर अपनी ताकत को सैनियों ने दिखाया था।

Brijbhushan Sharan Singh के हेलीकॉप्टर की खेत में इमरजेंसी लैंडिंग! इस वजह से बिगड़ा संतुलन

Lucknow Desk: कैसरगंज के बीजेपी नेता और पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह के हेलीकॉप्टर को धान के खेत में अचानक उतारना पड़ा। जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। बताया जा रहा है कि तकनीकी खराबी आने के बाद पायलट ने सूझबूझ दिखाते हुए हेलीकॉप्टर को सुरक्षित उतारा, जहां हेलीकॉप्टर देखने के लिए ग्रामीण भी जुट गए। मिली जानकारी के मुताबिक, बृजभूषण शरण सिंह एक कार्यक्रम में शामिल होने जा रहे थे। उड़ान के कुछ ही मिनट बाद हेलीकॉप्टर में तकनीकी दिक्कत आने लगी। स्थिति को समझते हुए पायलट ने तुरंत इमरजेंसी लैंडिंग का फैसला लिया और नज़दीकी धान के खेत में हेलीकॉप्टर को सुरक्षित उतार दिया। घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी भी मौके पर पहुंच गए। हेलीकॉप्टर की जांच के लिए टेक्निकल टीम बुलाई गई है। फिलहाल राहत की बात यह है कि बृजभूषण शरण सिंह और हेलीकॉप्टर में मौजूद सभी लोग पूरी तरह सुरक्षित हैं। जांच के बाद ही तकनीकी खराबी की असली वजह पता चल पाएगी। इसी बीच पूर्व सांसद बृजभूषण सिंह ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी कर संदेश दिया। उन्होंने कहा, आज मेरा बिहार प्रदेश के अंदर संदेश व दिनारा विधानसभा क्षेत्र में चुनावी सभा का कार्यक्रम था। संदेश विधानसभा का कार्यक्रम करके मैं दिनारा विधानसभा के लिए हेलीकाप्टर से निकला था। अचानक मौसम खराब होने के कारण हेलीकाप्टर की सुरक्षित लैंडिंग एक खेत में करानी पड़ी। पायलट ने बड़ी सूझबूझ से लैंडिंग कराई। मैं, इस समय गाड़ी से पटना जा रहा हूं। किसी अफवाह में आने की जरूरत नहीं है। किसी प्रकार की कोई हानि नहीं हुई है। हम सभी पूर्णतया सुरक्षित हैं। हेलीकाप्टर की सुरक्षा का प्रबंध कर दिया गया है। प्रशासन व जनता का बहुत सहयोग रहा...धन्यवाद

Shahrukh Khan ने मनाया 60वां जन्मदिन, विदेशों से भी जुटे फैंस

Lucknow Desk: आज 02 नवंबर 2025 को बॉलीवुड के बादशाह Shahrukh Khan ने अपने 60वें जन्मदिन का जश्न मनाया। इस मौके पर उन्होंने अपने परिवार, करीबियों और फिल्म इंडस्ट्री के दोस्तों के साथ खुशियाँ बाँटी। उन्होंने अपने आलीशान घर के बजाय इस बार सार्वजनिक रूप से Mannat से बाहर नहीं दिखने का फैसला किया क्योंकि वहाँ फिलहाल निर्माण का काम चल रहा है। वहीँ, जश्न के लिए उन्होंने Alibaug में स्थित निजी स्थान चुना। एक विशेष फैन-मीट कार्यक्रम Balgandharva Rangmandir, बांद्रा में आयोजित किया गया था, जहाँ सीमित प्रवेश पास के माध्यम से प्रशंसक सीधे शामिल हुए। सोशल मीडिया पर सितारों ने बधाइयाँ दीं। जिसमें Farah Khan ने लिखा, “Happy birthday KING … rule for another 100 years”। बता दें कि Shahrukh Khan के जन्मदिन के मौके पर सिर्फ भारत भर से ही नहीं बल्कि विदेशों से भी फैंस जुटे। शाहरुख खान के फैन क्लबों ने जन्मदिन सप्ताह के रूप में मनाया, चैरिटी ड्राइव, विशेष बैनर आदि के माध्यम से ख़ास अंदाज़ से जश्न मनाया।

संसद का मानसून सत्र आज से शुरू
संसद का मानसून सत्र शुरू, कई बड़े मुद्दों पर सरकार और विपक्ष के बीच होगी जोरदार बहस

संसद का मानसून सत्र आज, 20 जुलाई 2026 से शुरू हो गया है। सत्र की शुरुआत के साथ ही देश का राजनीतिक माहौल एक बार फिर गरमा गया है। इस बार कई महत्वपूर्ण मुद्दों को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिल सकती है। विपक्ष कई राष्ट्रीय, आर्थिक और सामाजिक मुद्दों पर सरकार को घेरने की तैयारी में है, जबकि सरकार अपने विधायी एजेंडे को आगे बढ़ाने पर ध्यान दे रही है।   इन मुद्दों पर हो सकती है चर्चा बेरोजगारी, किसानों की समस्याएं, मानसून सत्र के दौरान महंगाई, शिक्षा व्यवस्था, और विदेश नीति जैसे मुद्दे चर्चा के केंद्र में रह सकते हैं। इसके अलावा हाल के राजनीतिक घटनाक्रमों और राज्यों से जुड़े मामलों पर भी संसद में बहस हो सकती है।   कई महत्वपूर्ण विधेयक हो सकते हैं पेश सरकार की ओर से मानसून सत्र में कई महत्वपूर्ण विधेयक पेश किए जाने की संभावना है। सरकार का प्रयास रहेगा कि जरूरी बिलों पर चर्चा कर उन्हें पारित कराया जाए। वहीं विपक्ष की मांग रहेगी कि राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों पर पर्याप्त समय देकर विस्तार से चर्चा कराई जाए।   लोकसभा और राज्यसभा में बढ़ी सक्रियता संसद के दोनों सदनों, लोकसभा और राज्यसभा, में सत्र की शुरुआत के साथ ही राजनीतिक सक्रियता बढ़ गई है। विभिन्न दलों ने अपने सांसदों को सदन में उपस्थित रहने और पार्टी की रणनीति के अनुसार मुद्दे उठाने के निर्देश दिए हैं। विपक्षी दल भी सरकार को घेरने के लिए आपसी तालमेल के साथ रणनीति बना सकते हैं।   सरकार और विपक्ष की अलग-अलग रणनीति सरकार की कोशिश रहेगी कि वह अपने विकास कार्यों, योजनाओं और नीतियों को मजबूती से सदन में रखे। दूसरी ओर विपक्ष जनहित से जुड़े मुद्दों को उठाकर सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश करेगा। इससे कई मुद्दों पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच टकराव की स्थिति बन सकती है।   क्यों महत्वपूर्ण है यह मानसून सत्र यह मानसून सत्र राजनीतिक दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आने वाले समय में कई राज्यों में राजनीतिक गतिविधियां तेज होने की संभावना है। ऐसे में संसद के अंदर होने वाली बहस का असर देश की राजनीति पर भी देखने को मिल सकता है।   सभी की नजर संसद की कार्यवाही पर अब सभी की नजर इस बात पर होगी कि मानसून सत्र कितना सुचारू रूप से चलता है और कितने महत्वपूर्ण मुद्दों पर सार्थक चर्चा हो पाती है। अगर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच सहयोग बना रहता है, तो यह सत्र कई अहम फैसलों के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।

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UP का जलालाबाद अब कहलाएगा परशुरामपुरी, योगी सरकार के फैसले पर लगी मुहर

उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने प्रदेश के ऐतिहासिक नगरों के नामों से जुड़े एक और अहम फैसले पर मुहर लगा दी है। शाहजहांपुर जिले के जलालाबाद नगर का नाम अब परशुरामपुरी होगा। योगी कैबिनेट की मंजूरी के बाद इस फैसले को औपचारिक रूप से लागू करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। सरकार का कहना है कि यह निर्णय क्षेत्र की ऐतिहासिक, धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को सम्मान देने के उद्देश्य से लिया गया है।   वर्षों से उठ रही थी नाम बदलने की मांग जलालाबाद का नाम बदलकर परशुरामपुरी करने की मांग काफी समय से स्थानीय लोगों, सामाजिक संगठनों और विभिन्न धार्मिक संस्थाओं द्वारा उठाई जा रही थी। उनका कहना था कि इस क्षेत्र का संबंध भगवान परशुराम की आस्था और प्राचीन मान्यताओं से जुड़ा हुआ है। इसी आधार पर नगर पालिका ने भी प्रस्ताव पारित कर राज्य सरकार को भेजा था। सरकार ने सभी आवश्यक औपचारिकताओं को पूरा करने के बाद इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी।   सरकार ने बताया सांस्कृतिक विरासत को सम्मान राज्य सरकार का कहना है कि प्रदेश की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहरों को उनकी वास्तविक पहचान दिलाना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। सरकार का मानना है कि जिन स्थानों का संबंध भारतीय संस्कृति और धार्मिक परंपराओं से रहा है, उन्हें उसी पहचान के साथ स्थापित किया जाना चाहिए। इसी सोच के तहत जलालाबाद का नाम बदलकर परशुरामपुरी किया गया है।   पर्यटन को भी मिलेगा बढ़ावा सरकार को उम्मीद है कि नाम परिवर्तन के बाद क्षेत्र में धार्मिक पर्यटन को नई पहचान मिलेगी। भगवान परशुराम से जुड़े मंदिरों और धार्मिक स्थलों पर आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ सकती है। इससे स्थानीय व्यापार, होटल व्यवसाय, परिवहन और छोटे कारोबारियों को भी आर्थिक लाभ मिलने की संभावना जताई जा रही है।   विपक्ष ने उठाए सवाल इस फैसले को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रिया भी सामने आई है। विपक्षी दलों ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि नाम बदलने की बजाय सरकार को रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी सुविधाओं जैसे मुद्दों पर अधिक ध्यान देना चाहिए। हालांकि सरकार ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि विकास कार्य और सांस्कृतिक संरक्षण दोनों समान रूप से जारी रहेंगे।   सरकारी रिकॉर्ड में होगा बदलाव नाम परिवर्तन के बाद सभी सरकारी दस्तावेजों, राजस्व अभिलेखों, सड़क संकेतकों, नगर पालिका के रिकॉर्ड और अन्य प्रशासनिक दस्तावेजों में धीरे-धीरे परशुरामपुरी नाम दर्ज किया जाएगा। संबंधित विभागों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए जा रहे हैं ताकि पूरी प्रक्रिया समयबद्ध तरीके से पूरी हो सके और लोगों को किसी प्रकार की परेशानी न हो।   पहले भी बदले जा चुके हैं कई स्थानों के नाम योगी सरकार के कार्यकाल में उत्तर प्रदेश के कई शहरों, रेलवे स्टेशनों और अन्य सार्वजनिक स्थानों के नाम बदले जा चुके हैं। सरकार का कहना है कि इन बदलावों का उद्देश्य ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को नई पहचान देना है। जलालाबाद का नाम बदलकर परशुरामपुरी करना भी इसी श्रृंखला का एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।   जलालाबाद का नाम बदलकर परशुरामपुरी किए जाने का फैसला प्रदेश की राजनीति और प्रशासन दोनों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। समर्थक इसे भारतीय संस्कृति और आस्था का सम्मान बता रहे हैं, जबकि विपक्ष इसे राजनीतिक निर्णय करार दे रहा है। आने वाले दिनों में यह बदलाव सरकारी रिकॉर्ड, स्थानीय पहचान और पर्यटन गतिविधियों पर किस प्रकार प्रभाव डालता है, इस पर सभी की नजर रहेगी।

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बेंगलुरु में बड़ा हादसा: पत्थर की खदान में चट्टान खिसकने से बिहार के 8 मजदूरों की दर्दनाक मौत

कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में गुरुवार को एक दर्दनाक हादसा सामने आया। शहर के बाहरी इलाके में स्थित एक पत्थर की खदान में अचानक विशाल चट्टान खिसक गई, जिसकी चपेट में आकर बिहार के आठ मजदूरों की मौत हो गई। हादसा उस समय हुआ जब सभी मजदूर रोज की तरह खदान में पत्थर निकालने का काम कर रहे थे। अचानक भारी चट्टान टूटकर नीचे आ गिरी और मजदूरों को संभलने का मौका तक नहीं मिला। घटना के बाद पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई।   राहत एवं बचाव कार्य कई घंटों तक चला हादसे की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस, दमकल विभाग और आपदा राहत टीम मौके पर पहुंच गई। जेसीबी मशीनों और अन्य भारी उपकरणों की मदद से मलबा हटाने का काम शुरू किया गया। कई घंटों की कड़ी मशक्कत के बाद सभी मजदूरों के शव बाहर निकाले गए। राहत दल ने यह भी सुनिश्चित किया कि मलबे के नीचे कोई अन्य व्यक्ति तो नहीं फंसा है। घटना के बाद सुरक्षा के मद्देनजर खदान में काम तत्काल रोक दिया गया।   मृतक सभी बिहार के प्रवासी मजदूर प्रारंभिक जानकारी के अनुसार हादसे में जान गंवाने वाले सभी मजदूर बिहार के अलग-अलग जिलों के रहने वाले थे। बेहतर रोजगार और परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए वे बेंगलुरु में मजदूरी कर रहे थे। उनके परिवारों को हादसे की सूचना दे दी गई है। इस दुखद घटना के बाद मृतकों के गांवों में शोक की लहर दौड़ गई है। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।   हादसे की जांच शुरू प्रशासन ने पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि यह पता लगाया जाएगा कि हादसा प्राकृतिक कारणों से हुआ या सुरक्षा मानकों की अनदेखी के कारण। जांच टीम यह भी देख रही है कि खदान संचालकों ने सुरक्षा नियमों का पालन किया था या नहीं। यदि किसी प्रकार की लापरवाही सामने आती है   सुरक्षा व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल इस घटना ने एक बार फिर खदानों में काम करने वाले मजदूरों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि कई खदानों में सुरक्षा मानकों का पूरी तरह पालन नहीं किया जाता, जिससे इस तरह के हादसों की आशंका बनी रहती है। मजदूरों को पर्याप्त सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराना और नियमित निरीक्षण कराना बेहद आवश्यक है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।   सरकार ने जताया दुख कर्नाटक सरकार ने इस हादसे पर गहरा दुख व्यक्त किया है। प्रशासन ने मृतकों के परिजनों को हरसंभव सहायता देने का आश्वासन दिया है। साथ ही पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की बात कही गई है। बिहार सरकार भी अपने अधिकारियों के माध्यम से मृतकों के परिवारों से संपर्क कर रही है और आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।   प्रवासी मजदूरों की सुरक्षा बनी बड़ी चुनौती देश के विभिन्न राज्यों से लाखों मजदूर रोजगार की तलाश में दूसरे राज्यों में काम करने जाते हैं। ऐसे में उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार और उद्योगों दोनों की जिम्मेदारी है। बेंगलुरु की इस दर्दनाक घटना ने एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि जोखिम भरे कार्यस्थलों पर सुरक्षा व्यवस्था कितनी महत्वपूर्ण है। बेहतर भविष्य की उम्मीद में अपने घरों से दूर काम करने गए बिहार के आठ मजदूर अब कभी अपने परिवारों के पास नहीं लौट पाएंगे। अब सभी की नजर जांच रिपोर्ट और प्रशासन की कार्रवाई पर है, ताकि दोषियों को सजा मिले और भविष्य में ऐसी त्रासदियों की पुनरावृत्ति न हो।

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