बिहार के लखीसराय जिले में सोमवार, 17 अगस्त 2026 की सुबह एक दर्दनाक हादसा हो गया। प्रसिद्ध अशोक धाम मंदिर के पास भारी भीड़ के दौरान भगदड़ जैसी स्थिति बन गई। इस घटना में 7 श्रद्धालुओं की मौत हो गई, जबकि कई लोग घायल हुए। घायलों को इलाज के लिए नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया।
सावन सोमवार पर उमड़ी थी श्रद्धालुओं की भारी भीड़
अशोक धाम मंदिर भगवान शिव का प्रसिद्ध धार्मिक स्थल है। सावन के सोमवार के कारण सुबह से ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान शिव के दर्शन और जलाभिषेक के लिए मंदिर पहुंचे थे। मंदिर के आसपास भीड़ लगातार बढ़ रही थी, जिससे व्यवस्थाओं पर दबाव बढ़ गया।
रिपोर्टों के मुताबिक एक समय पर अचानक श्रद्धालुओं की संख्या अधिक हो जाने के कारण बैरिकेडिंग के आसपास काफी दबाव बन गया।
बिजली के तार की घटना के बाद मची अफरा-तफरी
शुरुआती जानकारी के अनुसार मंदिर परिसर के पास बिजली के तार या खंभे से जुड़ी घटना के बाद लोगों में करंट फैलने की आशंका पैदा हो गई। इसके बाद भीड़ में अचानक घबराहट फैल गई और श्रद्धालु सुरक्षित स्थान की ओर भागने लगे।
इसी दौरान कुछ लोग गिर गए और पीछे से आ रही भीड़ के दबाव में स्थिति गंभीर हो गई। हालांकि प्रशासन अभी घटना के वास्तविक कारणों की जांच कर रहा है।
कई श्रद्धालु घायल, अस्पताल में इलाज जारी
हादसे के बाद पुलिस और प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची और राहत एवं बचाव अभियान शुरू किया गया। घायल श्रद्धालुओं को तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार हादसे में एक दर्जन से अधिक लोग घायल हुए हैं। कई घायलों का इलाज जारी है। घटना के बाद मंदिर परिसर और अस्पताल के आसपास सुरक्षा व्यवस्था भी बढ़ा दी गई।
राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री ने जताया दुख
लखीसराय की घटना पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दुख जताया। उन्होंने मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त की और घायलों के जल्द स्वस्थ होने की कामना की।
राज्य और जिला प्रशासन भी स्थिति पर नजर बनाए हुए है और अधिकारियों को आवश्यक राहत कार्य करने के निर्देश दिए गए हैं।
अशोक धाम मंदिर में हर साल पहुंचते हैं हजारों श्रद्धालु
अशोक धाम मंदिर बिहार के प्रमुख शिव मंदिरों में शामिल है। सावन के महीने में यहां श्रद्धालुओं की संख्या कई गुना बढ़ जाती है। खासकर सोमवार को दूर-दूर से लोग पूजा और जलाभिषेक के लिए यहां आते हैं।
ऐसे अवसरों पर भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस, बैरिकेडिंग, मेडिकल टीम और आपातकालीन व्यवस्था की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
हादसे के कारणों की जांच जारी
इस घटना ने एक बार फिर बड़े धार्मिक आयोजनों में क्राउड मैनेजमेंट और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े किए हैं। प्रशासन जांच कर रहा है कि हादसा किस वजह से हुआ और क्या सुरक्षा व्यवस्था में किसी प्रकार की कमी थी।
जांच पूरी होने के बाद ही हादसे के वास्तविक कारणों की स्पष्ट जानकारी सामने आएगी। फिलहाल प्रशासन का मुख्य ध्यान घायलों के इलाज और प्रभावित परिवारों की सहायता पर है।
Lucknow Desk: बिहार के मोकामा से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहाँ चुनाव प्रचार के दौरान हमला किया गया। इस घटना में जानी-मानी हस्ती दुलारचंद यादव की हत्या हो गई है और आरोप लगाया गया है कि इस घटना में पूर्व विधायक अनंत सिंह के समर्थकों की भूमिका है। यह घटना आगामी विधानसभा चुनाव के बीच हुई है, जिससे राज्य में कानून-व्यवस्था और चुनावी हिंसा पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। अनंत सिंह समेत 5 नामजद मोकामा में दुलारचंद यादव की हत्या मामले में JDU प्रत्याशी बाहुबली अनंत सिंह समेत पांच लोगों पर केस दर्ज कर ली गई है। मृत दुलारचंद यादव के पोते के दिए गए बयान पर अनंत सिंह, दो भतीजों रणवीर सिंह, कर्मवीर सिंह, करीबी छोटन सिंह और कंजय सिंह पर नामजद और कई अज्ञात के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया गया है। यानी दुलारचंद यादव के परिजनों और जन सुराज पार्टी के समर्थकों ने सीधे तौर पर JDU उम्मीदवार और बाहुबली नेता अनंत सिंह के समर्थकों पर हत्या का आरोप लगाया है। अनंत सिंह ने आरोपों को किया खारिज वहीं इस बयान पर JDU उम्मीदवार अनंत सिंह ने इन आरोपों को खारिज करते हुए इसे RJD उम्मीदवार वीणा देवी के पति बाहुबली सूरजभान सिंह की साजिश बताया है। अनंत सिंह ने कहा कि उनके काफिले पर विरोधियों ने हमला किया और यह सारा खेल सूरजभान सिंह करवा रहे हैं। कौन थे दुलारचंद यादव ? मोकामा के रहने वाले दुलारचंद यादव को ‘टाल का बादशाह’ कहा जाता था। दुलारचंद पहलवानी के साथ-साथ गाना गाने के भी शौकीन थे। उन्होंने जन सुराज के उम्मीदवार पीयूष प्रियदर्शी के लिए एक गाना भी रिकॉर्ड करवाया था। माना जा रहा है कि मोकामा की चुनावी जंग अब व्यक्तिगत रंजिश और हिंसक टकराव की तरफ मुड़ गई है।
बॉलीवुड के शहंशाह अमिताभ बच्चन एक बार फिर दादा होने का गर्व महसूस कर रहे हैं। दरअसल, उनके नाती अगस्त्य नंदा की अपकमिंग फिल्म ‘इक्कीस’ का ट्रेलर हाल ही में रिलीज़ हुआ है। ट्रेलर देखकर बिग बी इतने इमोशनल हो गए कि उन्होंने सोशल मीडिया पर एक दिल छू लेने वाला पोस्ट शेयर किया। अमिताभ ने अपने पोस्ट में लिखा, “ये तो बस शुरुआत है... गर्व है तुम्हारे इस सफर पर, मेरे बच्चे।” उनकी इस पोस्ट पर फैन्स और फिल्म इंडस्ट्री के सितारों ने जमकर प्यार लुटाया। ‘इक्कीस’ मेगास्टार मेघना गुलज़ार के निर्देशन में बनी है और इसमें अगस्त्य नंदा एक अहम किरदार निभा रहे हैं। फिल्म 1971 के युद्ध के हीरो अरुण खेत्रपाल की कहानी पर आधारित है, जो देश के सबसे युवा परमवीर चक्र विजेता थे। फिल्म के ट्रेलर में अगस्त्य का जोश और समर्पण देखकर फैन्स कह रहे हैं—“दादा की तरह नाती भी लाजवाब!” तो देखना दिलचस्प होगा कि क्या अगस्त्य अपनी पहली ही फिल्म से दादा अमिताभ की विरासत को आगे बढ़ा पाएंगे।
Lucknow Desk: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने आज बुधवार को भारतीय वायुसेना के लड़ाकू विमान राफेल में उड़ान भरकर इतिहास रच दिया है। इससे पहले राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू सुखोई-3 MKI लड़ाकू विमान में भी उड़ान भर चुकी हैं। राष्ट्रपति की इस उड़ान ने आज भारतीय वायुसेना के साथ-साथ पूरे देश को गौरव से भर दिया है। बता दें, भारत का राष्ट्रपति तीनों सेनाओं की कमांडर होता है और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर मौजूद हैं। अंबाला एयरफोर्स स्टेशन पहुंचीं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू आज सुबह अंबाला एयरबेस पहुंचीं, जहां वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल ए. पी. सिंह और वरिष्ठ अधिकारियों ने उनका स्वागत किया। बता दें, राष्ट्रपति का यह उड़ान न केवल साहसिक नेतृत्व शैली का प्रतीक है, बल्कि भारत की बढ़ती रक्षा क्षमता और 'आत्मनिर्भर भारत' के संकल्प को वैश्विक पटल पर मजबूती से प्रदर्शित करना भी है। फाइटर जेट में उड़ान भरने वाली दूसरी महिला राष्ट्रपति मुर्मू राष्ट्रपति मुर्मू ने फाइटर जेट की सवारी ये पहली बार नहीं की हैं। उन्होंने इससे पहले 8 अप्रैल 2023 को असम के तेजपुर एयरफोर्स स्टेशन से सुखोई-30 MKI फाइटर विमान में भी उड़ान भर चुकी हैं। वह फाइटर जेट उड़ाने वाली तीसरी राष्ट्रपति और दूसरी महिला राष्ट्राध्यक्ष बनी थीं। राष्ट्रपति मुर्मू ने से पहले पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम और प्रतिभा पाटिल ने भी सुखोई-30 MKI में उड़ान भरी थी। राफेल लड़ाकू विमान का क्या है इतिहास? बता दें, राफेल लड़ाकू विमान फ्रांसीसी कंपनी दसॉ एविएशन द्वारा निर्मित किया गया है। सितंबर 2020 में अंबाला एयरफोर्स स्टेशन पर भारतीय वायुसेना में औपचारिक रूप से शामिल किया गया था। अंबाला एयरबेस राफेल स्क्वाड्रन ‘गोल्डन एरोज' का मुख्य केंद्र है। इन विमानों का इस्तेमाल हाल ही में ‘ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान किया गया था, इसके माध्यम से आतंकवादी ठिकानों पर हमले कर अपनी ताकत को सैनियों ने दिखाया था।
Lucknow Desk: कैसरगंज के बीजेपी नेता और पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह के हेलीकॉप्टर को धान के खेत में अचानक उतारना पड़ा। जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। बताया जा रहा है कि तकनीकी खराबी आने के बाद पायलट ने सूझबूझ दिखाते हुए हेलीकॉप्टर को सुरक्षित उतारा, जहां हेलीकॉप्टर देखने के लिए ग्रामीण भी जुट गए। मिली जानकारी के मुताबिक, बृजभूषण शरण सिंह एक कार्यक्रम में शामिल होने जा रहे थे। उड़ान के कुछ ही मिनट बाद हेलीकॉप्टर में तकनीकी दिक्कत आने लगी। स्थिति को समझते हुए पायलट ने तुरंत इमरजेंसी लैंडिंग का फैसला लिया और नज़दीकी धान के खेत में हेलीकॉप्टर को सुरक्षित उतार दिया। घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी भी मौके पर पहुंच गए। हेलीकॉप्टर की जांच के लिए टेक्निकल टीम बुलाई गई है। फिलहाल राहत की बात यह है कि बृजभूषण शरण सिंह और हेलीकॉप्टर में मौजूद सभी लोग पूरी तरह सुरक्षित हैं। जांच के बाद ही तकनीकी खराबी की असली वजह पता चल पाएगी। इसी बीच पूर्व सांसद बृजभूषण सिंह ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी कर संदेश दिया। उन्होंने कहा, आज मेरा बिहार प्रदेश के अंदर संदेश व दिनारा विधानसभा क्षेत्र में चुनावी सभा का कार्यक्रम था। संदेश विधानसभा का कार्यक्रम करके मैं दिनारा विधानसभा के लिए हेलीकाप्टर से निकला था। अचानक मौसम खराब होने के कारण हेलीकाप्टर की सुरक्षित लैंडिंग एक खेत में करानी पड़ी। पायलट ने बड़ी सूझबूझ से लैंडिंग कराई। मैं, इस समय गाड़ी से पटना जा रहा हूं। किसी अफवाह में आने की जरूरत नहीं है। किसी प्रकार की कोई हानि नहीं हुई है। हम सभी पूर्णतया सुरक्षित हैं। हेलीकाप्टर की सुरक्षा का प्रबंध कर दिया गया है। प्रशासन व जनता का बहुत सहयोग रहा...धन्यवाद
Lucknow Desk: आज 02 नवंबर 2025 को बॉलीवुड के बादशाह Shahrukh Khan ने अपने 60वें जन्मदिन का जश्न मनाया। इस मौके पर उन्होंने अपने परिवार, करीबियों और फिल्म इंडस्ट्री के दोस्तों के साथ खुशियाँ बाँटी। उन्होंने अपने आलीशान घर के बजाय इस बार सार्वजनिक रूप से Mannat से बाहर नहीं दिखने का फैसला किया क्योंकि वहाँ फिलहाल निर्माण का काम चल रहा है। वहीँ, जश्न के लिए उन्होंने Alibaug में स्थित निजी स्थान चुना। एक विशेष फैन-मीट कार्यक्रम Balgandharva Rangmandir, बांद्रा में आयोजित किया गया था, जहाँ सीमित प्रवेश पास के माध्यम से प्रशंसक सीधे शामिल हुए। सोशल मीडिया पर सितारों ने बधाइयाँ दीं। जिसमें Farah Khan ने लिखा, “Happy birthday KING … rule for another 100 years”। बता दें कि Shahrukh Khan के जन्मदिन के मौके पर सिर्फ भारत भर से ही नहीं बल्कि विदेशों से भी फैंस जुटे। शाहरुख खान के फैन क्लबों ने जन्मदिन सप्ताह के रूप में मनाया, चैरिटी ड्राइव, विशेष बैनर आदि के माध्यम से ख़ास अंदाज़ से जश्न मनाया।
बिहार के लखीसराय जिले में सोमवार, 17 अगस्त 2026 की सुबह एक दर्दनाक हादसा हो गया। प्रसिद्ध अशोक धाम मंदिर के पास भारी भीड़ के दौरान भगदड़ जैसी स्थिति बन गई। इस घटना में 7 श्रद्धालुओं की मौत हो गई, जबकि कई लोग घायल हुए। घायलों को इलाज के लिए नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया। सावन सोमवार पर उमड़ी थी श्रद्धालुओं की भारी भीड़ अशोक धाम मंदिर भगवान शिव का प्रसिद्ध धार्मिक स्थल है। सावन के सोमवार के कारण सुबह से ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान शिव के दर्शन और जलाभिषेक के लिए मंदिर पहुंचे थे। मंदिर के आसपास भीड़ लगातार बढ़ रही थी, जिससे व्यवस्थाओं पर दबाव बढ़ गया। रिपोर्टों के मुताबिक एक समय पर अचानक श्रद्धालुओं की संख्या अधिक हो जाने के कारण बैरिकेडिंग के आसपास काफी दबाव बन गया। बिजली के तार की घटना के बाद मची अफरा-तफरी शुरुआती जानकारी के अनुसार मंदिर परिसर के पास बिजली के तार या खंभे से जुड़ी घटना के बाद लोगों में करंट फैलने की आशंका पैदा हो गई। इसके बाद भीड़ में अचानक घबराहट फैल गई और श्रद्धालु सुरक्षित स्थान की ओर भागने लगे। इसी दौरान कुछ लोग गिर गए और पीछे से आ रही भीड़ के दबाव में स्थिति गंभीर हो गई। हालांकि प्रशासन अभी घटना के वास्तविक कारणों की जांच कर रहा है। कई श्रद्धालु घायल, अस्पताल में इलाज जारी हादसे के बाद पुलिस और प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची और राहत एवं बचाव अभियान शुरू किया गया। घायल श्रद्धालुओं को तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार हादसे में एक दर्जन से अधिक लोग घायल हुए हैं। कई घायलों का इलाज जारी है। घटना के बाद मंदिर परिसर और अस्पताल के आसपास सुरक्षा व्यवस्था भी बढ़ा दी गई। राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री ने जताया दुख लखीसराय की घटना पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दुख जताया। उन्होंने मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त की और घायलों के जल्द स्वस्थ होने की कामना की। राज्य और जिला प्रशासन भी स्थिति पर नजर बनाए हुए है और अधिकारियों को आवश्यक राहत कार्य करने के निर्देश दिए गए हैं। अशोक धाम मंदिर में हर साल पहुंचते हैं हजारों श्रद्धालु अशोक धाम मंदिर बिहार के प्रमुख शिव मंदिरों में शामिल है। सावन के महीने में यहां श्रद्धालुओं की संख्या कई गुना बढ़ जाती है। खासकर सोमवार को दूर-दूर से लोग पूजा और जलाभिषेक के लिए यहां आते हैं। ऐसे अवसरों पर भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस, बैरिकेडिंग, मेडिकल टीम और आपातकालीन व्यवस्था की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। हादसे के कारणों की जांच जारी इस घटना ने एक बार फिर बड़े धार्मिक आयोजनों में क्राउड मैनेजमेंट और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े किए हैं। प्रशासन जांच कर रहा है कि हादसा किस वजह से हुआ और क्या सुरक्षा व्यवस्था में किसी प्रकार की कमी थी। जांच पूरी होने के बाद ही हादसे के वास्तविक कारणों की स्पष्ट जानकारी सामने आएगी। फिलहाल प्रशासन का मुख्य ध्यान घायलों के इलाज और प्रभावित परिवारों की सहायता पर है।
संसद के मानसून सत्र में बुधवार, 12 अगस्त 2026 का दिन महत्वपूर्ण माना जा रहा है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह राज्यसभा में दो प्रमुख विधेयक पेश करने वाले हैं। इनमें Kerala (Alteration of Name) Bill, 2026 और National Co-operative Development Corporation (Amendment) Bill शामिल हैं। इन दोनों विधेयकों को लेकर सदन में चर्चा होने की संभावना है और सरकार तथा विपक्ष के बीच राजनीतिक बहस भी तेज हो सकती है। केरल का नाम ‘Keralam’ करने की दिशा में कदम आज पेश किए जाने वाले प्रमुख विधेयकों में से एक केरल राज्य के आधिकारिक नाम से जुड़ा है। प्रस्ताव के अनुसार राज्य का नाम Kerala से बदलकर Keralam किया जाना है। यह बदलाव स्थानीय भाषा और राज्य की सांस्कृतिक पहचान से जुड़ा हुआ माना जा रहा है। राज्य का नाम बदलना केवल सामान्य प्रशासनिक फैसला नहीं होता। इसके लिए संसदीय मंजूरी सहित कई औपचारिक प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ता है। विधेयक पारित होने के बाद सरकारी दस्तावेजों, रिकॉर्ड, विभागों और विभिन्न आधिकारिक प्लेटफॉर्म पर नए नाम का इस्तेमाल किया जा सकता है। सहकारिता क्षेत्र से जुड़ा संशोधन भी अहम दूसरा विधेयक National Co-operative Development Corporation से संबंधित है। इस संशोधन का उद्देश्य सहकारी क्षेत्र के कामकाज और विकास व्यवस्था में बदलाव लाना है। भारत में सहकारी संस्थाओं का ग्रामीण अर्थव्यवस्था, कृषि, डेयरी, खाद्य प्रसंस्करण और छोटे कारोबारों में बड़ा योगदान रहा है। सरकार सहकारिता क्षेत्र को मजबूत करने और इसे अधिक प्रभावी बनाने पर लगातार जोर देती रही है। ऐसे में इस संशोधन विधेयक को आर्थिक और ग्रामीण विकास के नजरिए से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विपक्ष की रणनीति पर भी नजर मानसून सत्र के दौरान विपक्ष कई मुद्दों को लेकर सरकार पर सवाल उठा रहा है। रोजगार, महंगाई, राज्यों से जुड़े मुद्दे और अन्य राष्ट्रीय विषय लगातार चर्चा का हिस्सा बने हुए हैं। ऐसे माहौल में सरकार के नए विधेयकों पर विपक्ष की प्रतिक्रिया भी महत्वपूर्ण होगी। राज्यसभा में विधेयक पेश किए जाने के बाद इन पर चर्चा, संशोधन प्रस्ताव और राजनीतिक बयानबाजी देखने को मिल सकती है। यदि किसी मुद्दे पर सरकार और विपक्ष की राय अलग होती है, तो सदन में बहस और अधिक तीखी हो सकती है। विधायी एजेंडे के लिए अहम दिन मानसून सत्र सरकार के लिए अपने महत्वपूर्ण विधायी प्रस्तावों को आगे बढ़ाने का बड़ा अवसर होता है। आज पेश किए जाने वाले दोनों विधेयक अलग-अलग क्षेत्रों से जुड़े हैं, लेकिन राजनीतिक और प्रशासनिक दृष्टि से दोनों का महत्व है। एक ओर केरल का नाम बदलने का प्रस्ताव राज्य की पहचान से जुड़ा हुआ है, तो दूसरी ओर सहकारिता से संबंधित संशोधन देश की आर्थिक और ग्रामीण व्यवस्था से जुड़ा है। इसलिए 12 अगस्त 2026 की राज्यसभा कार्यवाही पर राजनीतिक दलों के साथ-साथ आम लोगों की भी नजर बनी रहेगी। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि इन विधेयकों पर चर्चा किस दिशा में आगे बढ़ती है और सरकार को इन्हें पारित कराने में कितना समर्थन मिलता है।
असम में बाढ़ का संकट लगातार गंभीर बना हुआ है। राज्य के कई जिलों में भारी बारिश और नदियों के बढ़ते जलस्तर ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी है। बाढ़ से दो और लोगों की मौत दर्ज होने के बाद इस साल इससे जान गंवाने वालों की संख्या बढ़कर 100 हो गई है। वहीं, सात जिलों में 1.37 लाख से अधिक लोग बाढ़ से प्रभावित बताए जा रहे हैं। कई इलाकों में पानी अब भी गांवों और खेतों में भरा हुआ है। इसके कारण लोगों का सामान्य जीवन प्रभावित हुआ है। कई परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर जाना पड़ा है, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में सड़कें और संपर्क मार्ग पानी में डूबने से आवाजाही मुश्किल हो गई है। गांवों और खेती पर बड़ा असर असम की बाढ़ ने ग्रामीण इलाकों को सबसे ज्यादा प्रभावित किया है। रिपोर्ट के मुताबिक सैकड़ों गांव बाढ़ के पानी से घिरे हुए हैं। करीब 456 गांव प्रभावित बताए गए हैं। इसके अलावा लगभग 11,933 हेक्टेयर कृषि भूमि भी बाढ़ की चपेट में है। खेती पर पड़े इस असर से किसानों की चिंता बढ़ गई है। धान और अन्य फसलों वाले खेतों में लंबे समय तक पानी भरा रहने से फसल खराब होने का खतरा बढ़ गया है। कई ग्रामीण परिवारों की आय मुख्य रूप से खेती और पशुपालन पर निर्भर होती है, इसलिए बाढ़ उनके लिए केवल प्राकृतिक आपदा ही नहीं बल्कि आर्थिक संकट भी बन रही है। प्रभावित जिलों में राहत कार्य जारी राज्य प्रशासन और आपदा प्रबंधन से जुड़ी टीमें प्रभावित इलाकों में राहत अभियान चला रही हैं। जिन क्षेत्रों में पानी का स्तर अधिक है, वहां जरूरतमंद लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। राहत शिविरों में भोजन, पेयजल और जरूरी सामान उपलब्ध कराने पर ध्यान दिया जा रहा है। बच्चों, महिलाओं, बुजुर्गों और बीमार लोगों को प्राथमिकता के आधार पर सहायता देने की कोशिश की जा रही है। बाढ़ के बाद साफ पानी की उपलब्धता भी बड़ी चुनौती बन जाती है। दूषित पानी के कारण दस्त, बुखार और अन्य जलजनित बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग भी प्रभावित क्षेत्रों में सतर्कता बरत रहा है। नदियों का बढ़ा जलस्तर चिंता का विषय असम में बाढ़ की स्थिति के पीछे लगातार बारिश के अलावा नदियों का बढ़ता जलस्तर भी अहम कारण है। ब्रह्मपुत्र और उसकी सहायक नदियों के आसपास बसे निचले इलाकों में पानी तेजी से फैल सकता है। कुछ स्थानों पर नदियों का जलस्तर खतरे के निशान के करीब या उससे ऊपर बने रहने की खबर है। ऐसे क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने और प्रशासन के निर्देशों का पालन करने को कहा जा रहा है। सड़क और अन्य बुनियादी ढांचे को नुकसान बाढ़ से केवल मकान और फसलें ही प्रभावित नहीं हुई हैं, बल्कि कई इलाकों में सड़कों और छोटे पुलों को भी नुकसान पहुंचा है। सड़क संपर्क टूटने से राहत सामग्री पहुंचाने में भी कठिनाई हो सकती है। ग्रामीण इलाकों में जलभराव के कारण स्कूल, स्थानीय बाजार और अन्य दैनिक गतिविधियां भी प्रभावित हुई हैं। कई परिवार पानी कम होने का इंतजार कर रहे हैं ताकि वे अपने घरों में वापस लौट सकें। आगे की स्थिति मौसम पर निर्भर असम में आने वाले दिनों में स्थिति काफी हद तक बारिश पर निर्भर करेगी। अगर बारिश में कमी आती है तो बाढ़ का पानी धीरे-धीरे उतर सकता है, लेकिन लगातार बारिश होने पर प्रभावित इलाकों की संख्या फिर बढ़ सकती है। फिलहाल प्रशासन की प्राथमिकता लोगों की जान बचाना, राहत सामग्री पहुंचाना और संवेदनशील क्षेत्रों की निगरानी करना है। बाढ़ से मौतों का आंकड़ा 100 तक पहुंचना स्थिति की गंभीरता को साफ दिखाता है। अब सबसे बड़ी चुनौती प्रभावित लोगों तक समय पर सहायता पहुंचाने और पानी उतरने के बाद पुनर्वास कार्य को तेजी से आगे बढ़ाने की होगी।