सुप्रीम कोर्ट ने आसाराम को मेडिकल आधार पर अंतरिम जमानत देने से इनकार कर दिया है। हालांकि अदालत ने उनकी स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए जेल में 24 घंटे प्रशिक्षित केयरटेकर की सहायता लेने की अनुमति दी है। यह फैसला सुप्रीम कोर्ट ने 6 अगस्त 2026 को सुनाया।
AIIMS की मेडिकल रिपोर्ट पर हुई सुनवाई
मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति एम.एम. सुंदरेश और न्यायमूर्ति पी.बी. वराले की पीठ ने की। अदालत के सामने अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान यानी AIIMS की 31 जुलाई 2026 की मेडिकल रिपोर्ट पेश की गई थी।
रिपोर्ट के अनुसार, आसाराम को फिलहाल अस्पताल में भर्ती रखने की जरूरत नहीं है, लेकिन उनकी स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए लगातार मेडिकल सहायता की आवश्यकता है। इसी रिपोर्ट के आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम जमानत देने की मांग स्वीकार नहीं की।
24 घंटे केयरटेकर रखने की अनुमति
सुप्रीम कोर्ट ने आसाराम को अपनी पसंद का प्रशिक्षित केयरटेकर रखने की अनुमति दी है। यह केयरटेकर जेल में उनकी सहायता के लिए चौबीसों घंटे उपलब्ध रह सकेगा।
सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि AIIMS की रिपोर्ट में दी गई मेडिकल सिफारिशों को पूरी तरह लागू किया जाएगा। इसके बाद अदालत ने केयरटेकर की सुविधा देने का निर्देश दिया।
तबीयत बिगड़ने पर दोबारा कर सकते हैं अपील
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि भविष्य में अगर आसाराम की स्वास्थ्य स्थिति खराब होती है, तो वह अपनी अंतरिम जमानत की मांग को दोबारा अदालत के सामने रख सकते हैं।
इसका मतलब है कि फिलहाल उन्हें मेडिकल आधार पर जमानत नहीं मिली है, लेकिन स्वास्थ्य स्थिति में गंभीर बदलाव होने पर कानूनी विकल्प खुला रहेगा।
राजस्थान हाई कोर्ट से मिली थी पैरोल
सुनवाई के दौरान यह जानकारी भी सामने आई कि राजस्थान हाई कोर्ट ने आसाराम को 20 दिन की पैरोल दी थी। सॉलिसिटर जनरल ने अदालत के सामने पैरोल से जुड़ी जानकारी भी रखी।
सुप्रीम कोर्ट ने सभी पक्षों की दलीलें और AIIMS की रिपोर्ट देखने के बाद अंतरिम जमानत देने से इनकार कर दिया।
किस मामले में सजा काट रहे हैं आसाराम?
आसाराम को वर्ष 2013 में जोधपुर में एक नाबालिग लड़की के यौन उत्पीड़न से जुड़े मामले में दोषी ठहराया गया था। ट्रायल कोर्ट ने उन्हें और अन्य आरोपियों को दोषी करार दिया था।
इसके बाद मामला राजस्थान हाई कोर्ट पहुंचा। मई 2026 में हाई कोर्ट ने रेप और संबंधित अपराधों में आसाराम की दोषसिद्धि को बरकरार रखा, हालांकि कुछ अन्य आरोपों में राहत दी गई थी।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले का क्या मतलब?
सुप्रीम कोर्ट के ताजा आदेश से फिलहाल आसाराम को जेल से अंतरिम जमानत पर बाहर आने की अनुमति नहीं मिली है। अदालत ने स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों को ध्यान में रखते हुए मेडिकल देखभाल सुनिश्चित करने का रास्ता दिया है।
अब उनकी देखभाल के लिए प्रशिक्षित व्यक्ति चौबीसों घंटे उपलब्ध रह सकता है। साथ ही अगर भविष्य में स्वास्थ्य की स्थिति ज्यादा गंभीर होती है, तो वह एक बार फिर जमानत के लिए सुप्रीम कोर्ट का रुख कर सकते हैं।
Lucknow Desk: बिहार के मोकामा से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहाँ चुनाव प्रचार के दौरान हमला किया गया। इस घटना में जानी-मानी हस्ती दुलारचंद यादव की हत्या हो गई है और आरोप लगाया गया है कि इस घटना में पूर्व विधायक अनंत सिंह के समर्थकों की भूमिका है। यह घटना आगामी विधानसभा चुनाव के बीच हुई है, जिससे राज्य में कानून-व्यवस्था और चुनावी हिंसा पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। अनंत सिंह समेत 5 नामजद मोकामा में दुलारचंद यादव की हत्या मामले में JDU प्रत्याशी बाहुबली अनंत सिंह समेत पांच लोगों पर केस दर्ज कर ली गई है। मृत दुलारचंद यादव के पोते के दिए गए बयान पर अनंत सिंह, दो भतीजों रणवीर सिंह, कर्मवीर सिंह, करीबी छोटन सिंह और कंजय सिंह पर नामजद और कई अज्ञात के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया गया है। यानी दुलारचंद यादव के परिजनों और जन सुराज पार्टी के समर्थकों ने सीधे तौर पर JDU उम्मीदवार और बाहुबली नेता अनंत सिंह के समर्थकों पर हत्या का आरोप लगाया है। अनंत सिंह ने आरोपों को किया खारिज वहीं इस बयान पर JDU उम्मीदवार अनंत सिंह ने इन आरोपों को खारिज करते हुए इसे RJD उम्मीदवार वीणा देवी के पति बाहुबली सूरजभान सिंह की साजिश बताया है। अनंत सिंह ने कहा कि उनके काफिले पर विरोधियों ने हमला किया और यह सारा खेल सूरजभान सिंह करवा रहे हैं। कौन थे दुलारचंद यादव ? मोकामा के रहने वाले दुलारचंद यादव को ‘टाल का बादशाह’ कहा जाता था। दुलारचंद पहलवानी के साथ-साथ गाना गाने के भी शौकीन थे। उन्होंने जन सुराज के उम्मीदवार पीयूष प्रियदर्शी के लिए एक गाना भी रिकॉर्ड करवाया था। माना जा रहा है कि मोकामा की चुनावी जंग अब व्यक्तिगत रंजिश और हिंसक टकराव की तरफ मुड़ गई है।
बॉलीवुड के शहंशाह अमिताभ बच्चन एक बार फिर दादा होने का गर्व महसूस कर रहे हैं। दरअसल, उनके नाती अगस्त्य नंदा की अपकमिंग फिल्म ‘इक्कीस’ का ट्रेलर हाल ही में रिलीज़ हुआ है। ट्रेलर देखकर बिग बी इतने इमोशनल हो गए कि उन्होंने सोशल मीडिया पर एक दिल छू लेने वाला पोस्ट शेयर किया। अमिताभ ने अपने पोस्ट में लिखा, “ये तो बस शुरुआत है... गर्व है तुम्हारे इस सफर पर, मेरे बच्चे।” उनकी इस पोस्ट पर फैन्स और फिल्म इंडस्ट्री के सितारों ने जमकर प्यार लुटाया। ‘इक्कीस’ मेगास्टार मेघना गुलज़ार के निर्देशन में बनी है और इसमें अगस्त्य नंदा एक अहम किरदार निभा रहे हैं। फिल्म 1971 के युद्ध के हीरो अरुण खेत्रपाल की कहानी पर आधारित है, जो देश के सबसे युवा परमवीर चक्र विजेता थे। फिल्म के ट्रेलर में अगस्त्य का जोश और समर्पण देखकर फैन्स कह रहे हैं—“दादा की तरह नाती भी लाजवाब!” तो देखना दिलचस्प होगा कि क्या अगस्त्य अपनी पहली ही फिल्म से दादा अमिताभ की विरासत को आगे बढ़ा पाएंगे।
Lucknow Desk: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने आज बुधवार को भारतीय वायुसेना के लड़ाकू विमान राफेल में उड़ान भरकर इतिहास रच दिया है। इससे पहले राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू सुखोई-3 MKI लड़ाकू विमान में भी उड़ान भर चुकी हैं। राष्ट्रपति की इस उड़ान ने आज भारतीय वायुसेना के साथ-साथ पूरे देश को गौरव से भर दिया है। बता दें, भारत का राष्ट्रपति तीनों सेनाओं की कमांडर होता है और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर मौजूद हैं। अंबाला एयरफोर्स स्टेशन पहुंचीं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू आज सुबह अंबाला एयरबेस पहुंचीं, जहां वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल ए. पी. सिंह और वरिष्ठ अधिकारियों ने उनका स्वागत किया। बता दें, राष्ट्रपति का यह उड़ान न केवल साहसिक नेतृत्व शैली का प्रतीक है, बल्कि भारत की बढ़ती रक्षा क्षमता और 'आत्मनिर्भर भारत' के संकल्प को वैश्विक पटल पर मजबूती से प्रदर्शित करना भी है। फाइटर जेट में उड़ान भरने वाली दूसरी महिला राष्ट्रपति मुर्मू राष्ट्रपति मुर्मू ने फाइटर जेट की सवारी ये पहली बार नहीं की हैं। उन्होंने इससे पहले 8 अप्रैल 2023 को असम के तेजपुर एयरफोर्स स्टेशन से सुखोई-30 MKI फाइटर विमान में भी उड़ान भर चुकी हैं। वह फाइटर जेट उड़ाने वाली तीसरी राष्ट्रपति और दूसरी महिला राष्ट्राध्यक्ष बनी थीं। राष्ट्रपति मुर्मू ने से पहले पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम और प्रतिभा पाटिल ने भी सुखोई-30 MKI में उड़ान भरी थी। राफेल लड़ाकू विमान का क्या है इतिहास? बता दें, राफेल लड़ाकू विमान फ्रांसीसी कंपनी दसॉ एविएशन द्वारा निर्मित किया गया है। सितंबर 2020 में अंबाला एयरफोर्स स्टेशन पर भारतीय वायुसेना में औपचारिक रूप से शामिल किया गया था। अंबाला एयरबेस राफेल स्क्वाड्रन ‘गोल्डन एरोज' का मुख्य केंद्र है। इन विमानों का इस्तेमाल हाल ही में ‘ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान किया गया था, इसके माध्यम से आतंकवादी ठिकानों पर हमले कर अपनी ताकत को सैनियों ने दिखाया था।
Lucknow Desk: कैसरगंज के बीजेपी नेता और पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह के हेलीकॉप्टर को धान के खेत में अचानक उतारना पड़ा। जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। बताया जा रहा है कि तकनीकी खराबी आने के बाद पायलट ने सूझबूझ दिखाते हुए हेलीकॉप्टर को सुरक्षित उतारा, जहां हेलीकॉप्टर देखने के लिए ग्रामीण भी जुट गए। मिली जानकारी के मुताबिक, बृजभूषण शरण सिंह एक कार्यक्रम में शामिल होने जा रहे थे। उड़ान के कुछ ही मिनट बाद हेलीकॉप्टर में तकनीकी दिक्कत आने लगी। स्थिति को समझते हुए पायलट ने तुरंत इमरजेंसी लैंडिंग का फैसला लिया और नज़दीकी धान के खेत में हेलीकॉप्टर को सुरक्षित उतार दिया। घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी भी मौके पर पहुंच गए। हेलीकॉप्टर की जांच के लिए टेक्निकल टीम बुलाई गई है। फिलहाल राहत की बात यह है कि बृजभूषण शरण सिंह और हेलीकॉप्टर में मौजूद सभी लोग पूरी तरह सुरक्षित हैं। जांच के बाद ही तकनीकी खराबी की असली वजह पता चल पाएगी। इसी बीच पूर्व सांसद बृजभूषण सिंह ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी कर संदेश दिया। उन्होंने कहा, आज मेरा बिहार प्रदेश के अंदर संदेश व दिनारा विधानसभा क्षेत्र में चुनावी सभा का कार्यक्रम था। संदेश विधानसभा का कार्यक्रम करके मैं दिनारा विधानसभा के लिए हेलीकाप्टर से निकला था। अचानक मौसम खराब होने के कारण हेलीकाप्टर की सुरक्षित लैंडिंग एक खेत में करानी पड़ी। पायलट ने बड़ी सूझबूझ से लैंडिंग कराई। मैं, इस समय गाड़ी से पटना जा रहा हूं। किसी अफवाह में आने की जरूरत नहीं है। किसी प्रकार की कोई हानि नहीं हुई है। हम सभी पूर्णतया सुरक्षित हैं। हेलीकाप्टर की सुरक्षा का प्रबंध कर दिया गया है। प्रशासन व जनता का बहुत सहयोग रहा...धन्यवाद
Lucknow Desk: आज 02 नवंबर 2025 को बॉलीवुड के बादशाह Shahrukh Khan ने अपने 60वें जन्मदिन का जश्न मनाया। इस मौके पर उन्होंने अपने परिवार, करीबियों और फिल्म इंडस्ट्री के दोस्तों के साथ खुशियाँ बाँटी। उन्होंने अपने आलीशान घर के बजाय इस बार सार्वजनिक रूप से Mannat से बाहर नहीं दिखने का फैसला किया क्योंकि वहाँ फिलहाल निर्माण का काम चल रहा है। वहीँ, जश्न के लिए उन्होंने Alibaug में स्थित निजी स्थान चुना। एक विशेष फैन-मीट कार्यक्रम Balgandharva Rangmandir, बांद्रा में आयोजित किया गया था, जहाँ सीमित प्रवेश पास के माध्यम से प्रशंसक सीधे शामिल हुए। सोशल मीडिया पर सितारों ने बधाइयाँ दीं। जिसमें Farah Khan ने लिखा, “Happy birthday KING … rule for another 100 years”। बता दें कि Shahrukh Khan के जन्मदिन के मौके पर सिर्फ भारत भर से ही नहीं बल्कि विदेशों से भी फैंस जुटे। शाहरुख खान के फैन क्लबों ने जन्मदिन सप्ताह के रूप में मनाया, चैरिटी ड्राइव, विशेष बैनर आदि के माध्यम से ख़ास अंदाज़ से जश्न मनाया।
सुप्रीम कोर्ट ने आसाराम को मेडिकल आधार पर अंतरिम जमानत देने से इनकार कर दिया है। हालांकि अदालत ने उनकी स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए जेल में 24 घंटे प्रशिक्षित केयरटेकर की सहायता लेने की अनुमति दी है। यह फैसला सुप्रीम कोर्ट ने 6 अगस्त 2026 को सुनाया। AIIMS की मेडिकल रिपोर्ट पर हुई सुनवाई मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति एम.एम. सुंदरेश और न्यायमूर्ति पी.बी. वराले की पीठ ने की। अदालत के सामने अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान यानी AIIMS की 31 जुलाई 2026 की मेडिकल रिपोर्ट पेश की गई थी। रिपोर्ट के अनुसार, आसाराम को फिलहाल अस्पताल में भर्ती रखने की जरूरत नहीं है, लेकिन उनकी स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए लगातार मेडिकल सहायता की आवश्यकता है। इसी रिपोर्ट के आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम जमानत देने की मांग स्वीकार नहीं की। 24 घंटे केयरटेकर रखने की अनुमति सुप्रीम कोर्ट ने आसाराम को अपनी पसंद का प्रशिक्षित केयरटेकर रखने की अनुमति दी है। यह केयरटेकर जेल में उनकी सहायता के लिए चौबीसों घंटे उपलब्ध रह सकेगा। सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि AIIMS की रिपोर्ट में दी गई मेडिकल सिफारिशों को पूरी तरह लागू किया जाएगा। इसके बाद अदालत ने केयरटेकर की सुविधा देने का निर्देश दिया। तबीयत बिगड़ने पर दोबारा कर सकते हैं अपील सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि भविष्य में अगर आसाराम की स्वास्थ्य स्थिति खराब होती है, तो वह अपनी अंतरिम जमानत की मांग को दोबारा अदालत के सामने रख सकते हैं। इसका मतलब है कि फिलहाल उन्हें मेडिकल आधार पर जमानत नहीं मिली है, लेकिन स्वास्थ्य स्थिति में गंभीर बदलाव होने पर कानूनी विकल्प खुला रहेगा। राजस्थान हाई कोर्ट से मिली थी पैरोल सुनवाई के दौरान यह जानकारी भी सामने आई कि राजस्थान हाई कोर्ट ने आसाराम को 20 दिन की पैरोल दी थी। सॉलिसिटर जनरल ने अदालत के सामने पैरोल से जुड़ी जानकारी भी रखी। सुप्रीम कोर्ट ने सभी पक्षों की दलीलें और AIIMS की रिपोर्ट देखने के बाद अंतरिम जमानत देने से इनकार कर दिया। किस मामले में सजा काट रहे हैं आसाराम? आसाराम को वर्ष 2013 में जोधपुर में एक नाबालिग लड़की के यौन उत्पीड़न से जुड़े मामले में दोषी ठहराया गया था। ट्रायल कोर्ट ने उन्हें और अन्य आरोपियों को दोषी करार दिया था। इसके बाद मामला राजस्थान हाई कोर्ट पहुंचा। मई 2026 में हाई कोर्ट ने रेप और संबंधित अपराधों में आसाराम की दोषसिद्धि को बरकरार रखा, हालांकि कुछ अन्य आरोपों में राहत दी गई थी। सुप्रीम कोर्ट के फैसले का क्या मतलब? सुप्रीम कोर्ट के ताजा आदेश से फिलहाल आसाराम को जेल से अंतरिम जमानत पर बाहर आने की अनुमति नहीं मिली है। अदालत ने स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों को ध्यान में रखते हुए मेडिकल देखभाल सुनिश्चित करने का रास्ता दिया है। अब उनकी देखभाल के लिए प्रशिक्षित व्यक्ति चौबीसों घंटे उपलब्ध रह सकता है। साथ ही अगर भविष्य में स्वास्थ्य की स्थिति ज्यादा गंभीर होती है, तो वह एक बार फिर जमानत के लिए सुप्रीम कोर्ट का रुख कर सकते हैं।
भारतीय कुश्ती महासंघ के पूर्व अध्यक्ष और भाजपा के पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह को महिला पहलवानों के यौन उत्पीड़न मामले में बड़ी राहत मिली है। दिल्ली की राउज एवेन्यू अदालत ने सोमवार, 3 अगस्त 2026 को उन्हें इस मामले में बरी कर दिया। अदालत ने सह-आरोपी और भारतीय कुश्ती महासंघ के पूर्व सहायक सचिव विनोद तोमर को भी सभी आरोपों से बरी करने का आदेश दिया। फैसला अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अश्विनी पंवार ने सुनाया। बंद कमरे में हुई मामले की सुनवाई इस संवेदनशील मामले की सुनवाई बंद कमरे में की गई थी। अदालत ने अभियोजन पक्ष, शिकायतकर्ता महिला पहलवानों और आरोपियों की ओर से पेश की गई दलीलों को विस्तार से सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रखा था। महिला पहलवानों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता रेबेका जॉन ने पक्ष रखा, जबकि बृजभूषण शरण सिंह की ओर से अधिवक्ता राजीव मोहन अदालत में पेश हुए। अदालत ने अंतिम बहस पूरी होने के बाद 3 अगस्त को फैसला सुनाने की तारीख निर्धारित की थी। वर्ष 2024 में तय किए गए थे आरोप दिल्ली की अदालत ने मई 2024 में बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ पांच महिला पहलवानों से संबंधित आरोपों में मुकदमा चलाने के लिए पर्याप्त सामग्री पाई थी। उन पर महिलाओं की गरिमा भंग करने, यौन उत्पीड़न और आपराधिक धमकी से जुड़े आरोप तय किए गए थे। हालांकि एक अन्य शिकायतकर्ता से जुड़े आरोपों में उन्हें उसी समय आरोपमुक्त कर दिया गया था। विनोद तोमर के खिलाफ भी एक शिकायतकर्ता से जुड़े आपराधिक धमकी के आरोप में मुकदमा चलाया गया था। अब अंतिम सुनवाई के बाद अदालत ने दोनों आरोपियों को बरी कर दिया है। कानूनी रूप से यहां “आरोपमुक्त” के बजाय “बरी” शब्द अधिक सही है, क्योंकि मामले में पहले आरोप तय हो चुके थे और इसके बाद मुकदमे की सुनवाई पूरी हुई। किन धाराओं में दाखिल हुई थी चार्जशीट? दिल्ली पुलिस ने बृजभूषण शरण सिंह और विनोद तोमर के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 354, 354ए, 354डी और 506(1) के तहत आरोपपत्र दाखिल किया था। ये धाराएं महिला की गरिमा भंग करने, यौन उत्पीड़न, पीछा करने और आपराधिक धमकी से जुड़ी थीं। विनोद तोमर के खिलाफ आपराधिक कृत्य में सहायता करने से संबंधित धारा 109 भी लगाई गई थी। आरोपों के अनुसार, कथित घटनाएं वर्ष 2016 से 2019 के बीच भारतीय कुश्ती महासंघ के कार्यालय, बृजभूषण शरण सिंह के सरकारी आवास और विदेशों में आयोजित प्रतियोगिताओं के दौरान हुई थीं। सिंह शुरू से ही इन आरोपों से इनकार करते रहे और खुद को निर्दोष बताते रहे। पहलवानों के प्रदर्शन के बाद दर्ज हुआ था मामला महिला पहलवानों की शिकायतों को लेकर वर्ष 2023 में दिल्ली के जंतर-मंतर पर लंबे समय तक विरोध प्रदर्शन हुआ था। ओलंपिक पदक विजेता साक्षी मलिक, बजरंग पुनिया और विनेश फोगाट सहित कई प्रमुख पहलवानों ने कार्रवाई की मांग की थी। विरोध प्रदर्शन के बाद दिल्ली पुलिस ने मामले की जांच कर आरोपपत्र दाखिल किया था। मई 2024 में अदालत ने कहा था कि पांच शिकायतकर्ताओं से जुड़े आरोपों पर मुकदमा चलाने के लिए रिकॉर्ड में पर्याप्त सामग्री मौजूद है। नाबालिग पहलवान वाला मामला पहले हो चुका है बंद बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ एक नाबालिग पहलवान की शिकायत पर पॉक्सो कानून के तहत अलग मामला भी दर्ज किया गया था। दिल्ली पुलिस ने उस मामले में सबूतों की कमी बताते हुए क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की थी। मई 2025 में अदालत ने पुलिस की क्लोजर रिपोर्ट स्वीकार कर ली थी, जिसके बाद वह मामला औपचारिक रूप से बंद हो गया था। फैसले के बाद आगे क्या? 3 अगस्त 2026 का फैसला बृजभूषण शरण सिंह के लिए बड़ी कानूनी राहत माना जा रहा है। हालांकि शिकायतकर्ता पक्ष के पास कानूनी विकल्प खुले रह सकते हैं और वह फैसले को ऊपरी अदालत में चुनौती दे सकता है। फिलहाल राउज एवेन्यू अदालत के आदेश के अनुसार बृजभूषण शरण सिंह और विनोद तोमर इस मामले में बरी हो गए हैं।
31 जुलाई 2026 को दिल्ली में CJP आंदोलन से जुड़े प्रदर्शनकारियों के लिए बड़ी राहत की खबर सामने आई है। दिल्ली सरकार ने पुलिस को CJP के प्रदर्शन के दौरान दर्ज किए गए 13 मुकदमों को वापस लेने की प्रक्रिया शुरू करने का निर्देश दिया है। ये मामले 20 जुलाई को जंतर-मंतर से संसद की ओर निकाले गए ‘चलो संसद’ मार्च के दौरान हुई हिंसा, अव्यवस्था और पुलिस से टकराव के संबंध में दर्ज किए गए थे। हालांकि, यह राहत सभी प्रदर्शनकारियों को नहीं मिलेगी। दिल्ली सरकार के आदेश में स्पष्ट किया गया है कि जिन लोगों का पहले से आपराधिक रिकॉर्ड है या जिनकी भूमिका गंभीर अपराधों में पाई गई है, उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई जारी रह सकती है। सामान्य और शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कोई प्रतिकूल कानूनी कार्रवाई नहीं करने का निर्देश दिया गया है। 20 जुलाई के प्रदर्शन के बाद दर्ज हुई थीं FIR CJP ने परीक्षा पेपर लीक, शिक्षा व्यवस्था में कथित भ्रष्टाचार और छात्रों की समस्याओं को लेकर दिल्ली में लंबे समय तक आंदोलन किया था। 20 जुलाई को बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी जंतर-मंतर पर जमा हुए और संसद की ओर मार्च करने की कोशिश की। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए बैरिकेड लगाए थे। इसके बाद कुछ स्थानों पर प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच टकराव हुआ। पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए आंसू गैस और लाठीचार्ज का इस्तेमाल किया था। इस घटना के बाद दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन से संबंधित हिंसा और अन्य घटनाओं को लेकर 13 FIR दर्ज की थीं। गिरफ्तार लोगों के मामलों की होगी समीक्षा दिल्ली सरकार के गृह विभाग ने पुलिस को निर्देश दिया है कि इन मामलों में पहले से गिरफ्तार या हिरासत में लिए गए लोगों की स्थिति की जल्द समीक्षा की जाए। जिन लोगों के खिलाफ कोई गंभीर आरोप या पुराना आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है, उनकी रिहाई की प्रक्रिया तेजी से पूरी की जा सकती है। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने भी विभिन्न राज्यों से कहा था कि CJP आंदोलन के दौरान हिरासत में लिए गए ऐसे प्रदर्शनकारियों को रिहा किया जाए, जिनका कोई आपराधिक इतिहास नहीं है। अदालत ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार को महत्वपूर्ण बताते हुए पुलिस कार्रवाई की समीक्षा करने की आवश्यकता पर जोर दिया था। FIR वापस लेने की कानूनी प्रक्रिया जरूरी दिल्ली सरकार के आदेश के बाद भी मुकदमे तुरंत समाप्त नहीं माने जाएंगे। FIR वापस लेने के लिए पुलिस और सरकारी वकीलों को निर्धारित कानूनी प्रक्रिया पूरी करनी होगी। जिन मामलों में अदालत में आरोपपत्र दाखिल हो चुका है, उनमें मुकदमा वापस लेने के लिए अदालत की अनुमति भी आवश्यक हो सकती है। इसलिए “दिल्ली पुलिस ने सभी मुकदमे खत्म कर दिए” लिखना अभी पूरी तरह सही नहीं होगा। सही स्थिति यह है कि दिल्ली सरकार ने 13 FIR वापस लेने का आदेश दिया है और दिल्ली पुलिस कानूनी प्रक्रिया के अनुसार आगे की कार्रवाई करेगी। CJP ने औपचारिक वापसी की मांग की CJP ने सरकार के फैसले का स्वागत किया है, लेकिन संगठन ने कहा है कि केवल मामलों को बंद करने का आश्वासन पर्याप्त नहीं है। CJP नेता सौरव दास ने मांग की है कि सभी संबंधित FIR को औपचारिक रूप से वापस लिया जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार समझौते के अनुसार कार्रवाई नहीं करती है, तो संगठन दोबारा सड़कों पर उतर सकता है। CJP का कहना है कि आंदोलन समाप्त करते समय सरकार ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मुकदमे वापस लेने और भविष्य में सामान्य प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं करने का आश्वासन दिया था। हालांकि, आपराधिक पृष्ठभूमि वाले और हिंसक घटनाओं में शामिल लोगों के मामले अलग रखे गए हैं। प्रदर्शनकारियों के लिए बड़ी राहत दिल्ली सरकार का यह फैसला उन छात्रों, युवाओं और सामान्य नागरिकों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है, जो आंदोलन में शामिल हुए थे। सरकार का कहना है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों को कानूनी परेशानियों से बचाया जाएगा, लेकिन हिंसा या गंभीर अपराध में शामिल व्यक्तियों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई जारी रहेगी। अब सभी की नजर इस बात पर है कि दिल्ली पुलिस 13 FIR वापस लेने की कानूनी प्रक्रिया कितनी जल्दी पूरी करती है और गिरफ्तार प्रदर्शनकारियों की समीक्षा के बाद कितने लोगों को राहत मिलती है।