INDIA

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 1 अगस्त को आंध्र प्रदेश जाएंगे, भोगापुरम एयरपोर्ट का कर सकते हैं उद्घाटन

TV 24 Network July 31, 2026 0
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आंध्र प्रदेश में भोगापुरम अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट का उद्घाटन करते हुए
PM Modi Bhogapuram Airport Inauguration 2026

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार, 1 अगस्त 2026 को आंध्र प्रदेश का दौरा कर सकते हैं। इस दौरान प्रधानमंत्री विजयनगरम जिले के भोगापुरम में बनाए गए नए अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का उद्घाटन करेंगे। इस एयरपोर्ट को आधिकारिक रूप से अल्लूरी सीताराम राजू अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा नाम दिया गया है। यह परियोजना आंध्र प्रदेश के विमानन, पर्यटन और औद्योगिक विकास के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

 

भोगापुरम एयरपोर्ट का होगा उद्घाटन

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 1 अगस्त को भोगापुरम अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का उद्घाटन करेंगे। यह एयरपोर्ट विशाखापत्तनम से करीब 55 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। नए एयरपोर्ट के शुरू होने से विशाखापत्तनम और आसपास के जिलों की हवाई कनेक्टिविटी बेहतर होने की उम्मीद है।

 

एयरपोर्ट का निर्माण आधुनिक सुविधाओं और भविष्य की यात्री जरूरतों को ध्यान में रखते हुए किया गया है। यहां यात्रियों के लिए आधुनिक टर्मिनल, सुरक्षा व्यवस्था, पार्किंग, चेक-इन काउंटर और अन्य आवश्यक सुविधाएं विकसित की गई हैं।

 

17 अगस्त से शुरू हो सकती हैं उड़ानें

रिपोर्टों के अनुसार, एयरपोर्ट का उद्घाटन 1 अगस्त को किया जाएगा, जबकि नियमित व्यावसायिक उड़ानें 17 अगस्त 2026 से शुरू होने की संभावना है। हालांकि, उड़ानों की अंतिम समय-सारणी और एयरलाइंस से जुड़ी विस्तृत जानकारी संबंधित विभागों द्वारा जारी की जाएगी।

 

नए एयरपोर्ट से दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, हैदराबाद, चेन्नई और देश के अन्य बड़े शहरों के लिए उड़ान सेवाएं शुरू होने की उम्मीद है। भविष्य में यहां से अंतरराष्ट्रीय उड़ानों का संचालन भी किया जा सकता है।

 

पर्यटन और व्यापार को मिलेगा बढ़ावा

भोगापुरम एयरपोर्ट के शुरू होने से आंध्र प्रदेश के उत्तरी तटीय क्षेत्र में पर्यटन और व्यापार को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। विशाखापत्तनम पहले से ही एक प्रमुख औद्योगिक, पर्यटन और बंदरगाह शहर है। बेहतर हवाई संपर्क से यहां आने वाले पर्यटकों, व्यापारियों और निवेशकों को सुविधा मिलेगी।

 

अराकू घाटी, बोर्रा गुफाएं, कैलासगिरि, समुद्री तट और अन्य पर्यटन स्थलों तक पहुंच भी आसान हो सकती है। इससे होटल, परिवहन, पर्यटन सेवा और स्थानीय कारोबार से जुड़े लोगों को रोजगार के नए अवसर मिल सकते हैं।

 

रोजगार के अवसर बढ़ने की संभावना

एयरपोर्ट के संचालन से विमानन, सुरक्षा, परिवहन, होटल, खानपान और लॉजिस्टिक्स जैसे क्षेत्रों में रोजगार पैदा होने की उम्मीद है। एयरपोर्ट के आसपास नए होटल, गोदाम, दुकानें और व्यावसायिक प्रतिष्ठान विकसित हो सकते हैं।

राज्य सरकार को उम्मीद है कि यह परियोजना क्षेत्र में नए निवेश आकर्षित करेगी और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाएगी।

 

आधिकारिक कार्यक्रम का इंतजार

प्रधानमंत्री के दौरे के दौरान अन्य विकास परियोजनाओं के उद्घाटन या शिलान्यास की संभावना भी जताई जा रही है। हालांकि, प्रधानमंत्री कार्यालय या प्रेस सूचना ब्यूरो की ओर से पूरे कार्यक्रम का विस्तृत आधिकारिक विवरण जारी होने का इंतजार है।

 

कर्नाटक दौरे से संबंधित भी अभी स्पष्ट आधिकारिक जानकारी उपलब्ध नहीं है। इसलिए आधिकारिक घोषणा होने तक खबर में कर्नाटक के कार्यक्रम को निश्चित रूप से शामिल नहीं किया जाना चाहिए।

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Brijbhushan Sharan Singh के हेलीकॉप्टर की खेत में इमरजेंसी लैंडिंग! इस वजह से बिगड़ा संतुलन

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Shahrukh Khan ने मनाया 60वां जन्मदिन, विदेशों से भी जुटे फैंस

Lucknow Desk: आज 02 नवंबर 2025 को बॉलीवुड के बादशाह Shahrukh Khan ने अपने 60वें जन्मदिन का जश्न मनाया। इस मौके पर उन्होंने अपने परिवार, करीबियों और फिल्म इंडस्ट्री के दोस्तों के साथ खुशियाँ बाँटी। उन्होंने अपने आलीशान घर के बजाय इस बार सार्वजनिक रूप से Mannat से बाहर नहीं दिखने का फैसला किया क्योंकि वहाँ फिलहाल निर्माण का काम चल रहा है। वहीँ, जश्न के लिए उन्होंने Alibaug में स्थित निजी स्थान चुना। एक विशेष फैन-मीट कार्यक्रम Balgandharva Rangmandir, बांद्रा में आयोजित किया गया था, जहाँ सीमित प्रवेश पास के माध्यम से प्रशंसक सीधे शामिल हुए। सोशल मीडिया पर सितारों ने बधाइयाँ दीं। जिसमें Farah Khan ने लिखा, “Happy birthday KING … rule for another 100 years”। बता दें कि Shahrukh Khan के जन्मदिन के मौके पर सिर्फ भारत भर से ही नहीं बल्कि विदेशों से भी फैंस जुटे। शाहरुख खान के फैन क्लबों ने जन्मदिन सप्ताह के रूप में मनाया, चैरिटी ड्राइव, विशेष बैनर आदि के माध्यम से ख़ास अंदाज़ से जश्न मनाया।

सिक्किम के नाथू ला दर्रे से छह साल बाद भारत-चीन सीमा व्यापार दोबारा शुरू
नाथू ला से छह साल बाद भारत-चीन सीमा व्यापार फिर शुरू, सिक्किम के कारोबारियों को मिलेगा लाभ

सिक्किम के ऐतिहासिक नाथू ला दर्रे से भारत और चीन के बीच सीमा व्यापार आज, 1 अगस्त 2026 से लगभग छह साल बाद दोबारा शुरू हो गया है। कोविड-19 महामारी के कारण वर्ष 2020 में बंद हुई यह व्यापारिक गतिविधि अब फिर बहाल की गई है। सीमा व्यापार शुरू होने से सिक्किम के स्थानीय व्यापारियों, वाहन चालकों, मजदूरों और छोटे व्यवसायियों को लाभ मिलने की उम्मीद है।   नाथू ला भारत और चीन के बीच मौजूद प्रमुख सीमा दर्रों में से एक है। यह पूर्वी सिक्किम में स्थित है और पुराने समय में दोनों देशों के बीच व्यापार करने का प्रमुख रास्ता था। आज से इस व्यापारिक मार्ग के दोबारा खुलने को स्थानीय अर्थव्यवस्था और भारत-चीन संबंधों के लिए महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।   भारत और चीन के बीच पुराना व्यापार मार्ग पुराने समय में नाथू ला के रास्ते भारत और चीन के व्यापारी सामानों की खरीद-बिक्री करते थे। इस मार्ग से रेशम, ऊन, चाय, मसाले, कपड़े और रोजमर्रा की जरूरतों से जुड़ी वस्तुओं का व्यापार होता था।   वर्ष 1962 के भारत-चीन युद्ध के बाद नाथू ला मार्ग को बंद कर दिया गया था। इसके लगभग 44 साल बाद 6 जुलाई 2006 को इसे सीमा व्यापार के लिए फिर से खोला गया। इसके बाद दोनों देशों के अधिकृत व्यापारी निर्धारित नियमों के तहत यहां कारोबार करते रहे। हालांकि, कोरोना महामारी के दौरान वर्ष 2020 में व्यापारिक गतिविधियां फिर बंद कर दी गई थीं।   स्थानीय कारोबार को मिलेगा फायदा सीमा व्यापार शुरू होने से सिक्किम के पंजीकृत व्यापारियों को सबसे अधिक लाभ मिलने की उम्मीद है। इसके अलावा सामान ढोने वाले वाहन चालक, मजदूर, होटल संचालक, दुकानदार और छोटे कारोबारी भी इससे लाभान्वित हो सकते हैं।   व्यापार के दौरान सीमा तक सामान पहुंचाने के लिए वाहनों की जरूरत होती है। इससे परिवहन सेवाओं की मांग बढ़ सकती है। व्यापारियों और अधिकारियों के आने-जाने से स्थानीय होटलों, भोजनालयों और बाजारों में भी कारोबार बढ़ने की संभावना है।   केवल निर्धारित सामानों का होता है व्यापार नाथू ला के रास्ते हर प्रकार के सामान का व्यापार नहीं किया जा सकता। भारत और चीन की ओर से कुछ वस्तुओं की सूची तय की जाती है। केवल उन्हीं वस्तुओं को सीमा पार ले जाने और बेचने की अनुमति होती है।   इस व्यापार में केवल पंजीकृत और अधिकृत व्यापारी ही भाग ले सकते हैं। व्यापारियों को पहचान पत्र, परमिट, सुरक्षा जांच और सीमा शुल्क से जुड़ी प्रक्रियाएं पूरी करनी होती हैं। दोनों देशों के अधिकारी व्यापारिक गतिविधियों की निगरानी करते हैं।   भारत-चीन रिश्तों के लिए सकारात्मक संकेत नाथू ला से व्यापार की बहाली को भारत और चीन के रिश्तों में सुधार की दिशा में एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है। वर्ष 2020 में पूर्वी लद्दाख में सीमा विवाद के बाद दोनों देशों के संबंधों में तनाव बढ़ गया था।   इसके बाद कई दौर की सैन्य और कूटनीतिक बातचीत हुई। नाथू ला व्यापार मार्ग का दोबारा खुलना इस बात का संकेत माना जा सकता है कि दोनों देश सीमित क्षेत्रों में सामान्य गतिविधियों और आपसी सहयोग को आगे बढ़ाने का प्रयास कर रहे हैं।   मौसम और सड़क व्यवस्था बड़ी चुनौती नाथू ला काफी ऊंचाई पर स्थित है, जहां मौसम तेजी से बदलता है। सर्दियों में भारी बर्फबारी होती है और कई बार सड़कें बंद हो जाती हैं। इसलिए यहां पूरे साल व्यापार करना आसान नहीं है।   व्यापार को नियमित रूप से चलाने के लिए बेहतर सड़क, सुरक्षित परिवहन, गोदाम, जांच केंद्र और संचार सुविधाओं की जरूरत होगी। प्रशासन को खराब मौसम के दौरान व्यापारियों और कर्मचारियों की सुरक्षा का भी विशेष ध्यान रखना होगा।   सीमावर्ती अर्थव्यवस्था को मिलेगी मजबूती नाथू ला सीमा व्यापार का आकार भले ही भारत और चीन के कुल व्यापार की तुलना में छोटा हो, लेकिन सिक्किम की स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिए इसका महत्व काफी बड़ा है।   व्यापार शुरू होने से रोजगार के अवसर बढ़ सकते हैं और सीमावर्ती बाजारों में आर्थिक गतिविधियां तेज हो सकती हैं। यह कदम दोनों देशों के बीच विश्वास, संपर्क और आर्थिक सहयोग बढ़ाने में भी मददगार साबित हो सकता है।

TV 24 Network August 1, 2026 0
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी छात्र प्रदर्शनकारियों को सजा के बजाय मार्गदर्शन देने की बात करते हुए

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असम में बाढ़ से प्रभावित गांव और राहत अभियान चलाते बचावकर्मी
असम में बाढ़ के बाद मुश्किलें बरकरार, लाखों लोगों के सामने घर और रोजगार बचाने की चुनौती

असम में बाढ़ का पानी कई क्षेत्रों से धीरे-धीरे उतरने लगा है, लेकिन लोगों की परेशानियां अभी कम नहीं हुई हैं। अनेक गांवों में घरों के अंदर मिट्टी और गंदा पानी जमा है। सड़कों, बिजली व्यवस्था और खेती को हुए नुकसान के कारण सामान्य जीवन दोबारा शुरू होने में समय लग सकता है। प्रशासन की ओर से बचाव, राहत सामग्री वितरण और जरूरी सेवाओं को बहाल करने का काम लगातार किया जा रहा है।   29 जुलाई को राज्य में 3.32 लाख से अधिक लोग बाढ़ से प्रभावित बताए गए थे। पानी कम होने के बाद 30 जुलाई की रिपोर्ट में प्रभावित आबादी करीब 2.12 लाख रह गई। संख्या में कमी जरूर आई है, लेकिन हजारों परिवारों को अब भी भोजन, स्वच्छ पानी, दवा और सुरक्षित रहने की जगह की जरूरत है।   चार जिलों में बाढ़ का अधिक प्रभाव चराइदेव, शिवसागर, जोरहाट और गोलाघाट जिले बाढ़ से सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों में शामिल हैं। इन जिलों के कई गांवों में मकानों, दुकानों और संपर्क मार्गों को नुकसान पहुंचा है। कुछ स्थानों पर पानी उतरने के बाद मोटी मिट्टी की परत दिखाई दे रही है, जिससे लोगों के लिए अपने घरों की सफाई और मरम्मत करना मुश्किल हो रहा है।   ग्रामीण इलाकों में टूटी सड़कों और क्षतिग्रस्त पुलों के कारण राहत सामग्री पहुंचाने में भी बाधा आ रही है। प्रशासन नावों और अन्य उपलब्ध साधनों की मदद से प्रभावित परिवारों तक सहायता पहुंचाने का प्रयास कर रहा है।   राहत शिविरों में रहने को मजबूर परिवार जिन लोगों के घर रहने योग्य नहीं बचे हैं, उन्हें राहत शिविरों और सुरक्षित स्थानों पर ठहराया गया है। शिविरों में भोजन, पेयजल, बच्चों के लिए आवश्यक सामग्री और प्राथमिक चिकित्सा उपलब्ध कराई जा रही है।   गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और बीमार लोगों के स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मचारियों की टीमें शिविरों में जांच कर रही हैं। दूषित पानी के कारण दस्त, त्वचा संक्रमण और अन्य बीमारियां फैलने का खतरा बना हुआ है।   मौतों का आंकड़ा बढ़ने से चिंता बाढ़ और इससे जुड़ी दुर्घटनाओं में मरने वाले लोगों की संख्या लगभग 80 तक पहुंच गई है। कई लोगों की मौत पानी में डूबने, तेज बहाव में बहने और मकान क्षतिग्रस्त होने जैसी घटनाओं में हुई।   राज्य सरकार द्वारा मृतकों के परिवारों को आर्थिक सहायता देने और नुकसान का आकलन करने की प्रक्रिया चल रही है। प्रभावित जिलों में सर्वेक्षण करके मकानों, खेती और अन्य संपत्तियों को हुए नुकसान की जानकारी जुटाई जा रही है।   किसानों की फसल और पशुधन प्रभावित बाढ़ ने किसानों की मेहनत पर भी पानी फेर दिया है। धान सहित कई फसलें जलमग्न होने से खराब हो गई हैं। खेतों में जमा गाद और पानी के कारण अगली बुवाई की तैयारी भी प्रभावित हो सकती है।   कई परिवारों के पशु बह गए या बीमार हो गए हैं। पशुपालन विभाग द्वारा पशुओं के उपचार, टीकाकरण और चारे की व्यवस्था करने की कोशिश की जा रही है। किसानों का कहना है कि फसल और पशुधन दोनों को नुकसान होने से उनकी आय पर लंबे समय तक असर पड़ सकता है।   बिजली और सड़क व्यवस्था बहाल करने का काम जारी बाढ़ के कई दिनों बाद भी हजारों घरों में बिजली आपूर्ति पूरी तरह सामान्य नहीं हो पाई है। पानी में डूबे ट्रांसफार्मर, बिजली के खंभे और तारों की मरम्मत की जा रही है।   सड़कों से मिट्टी और मलबा हटाने का काम भी जारी है। कुछ क्षेत्रों में यातायात शुरू हो गया है, जबकि कई ग्रामीण रास्ते अभी बंद हैं। प्रशासन ने लोगों से क्षतिग्रस्त सड़कों और तेज बहाव वाले स्थानों से दूर रहने की अपील की है।   दोबारा बारिश होने पर बढ़ सकता है खतरा मौसम विभाग ने असम के कुछ हिस्सों में और बारिश की संभावना जताई है। ऐसे में नदियों का जलस्तर फिर बढ़ने और निचले इलाकों में पानी भरने का खतरा बना हुआ है।   लोगों से स्थानीय प्रशासन की चेतावनियों का पालन करने, नदी किनारे नहीं जाने और जरूरी दस्तावेज तथा सामान सुरक्षित रखने को कहा गया है। फिलहाल असम के सामने सबसे बड़ी चुनौती प्रभावित लोगों को घर वापस पहुंचाने के साथ उनके रोजगार, खेती और दैनिक जीवन को दोबारा पटरी पर लाना है।

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लोकसभा में एंटी-पेपर लीक संशोधन बिल 2026 पारित होने का प्रतीकात्मक दृश्य

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उत्तराखंड में भारी बारिश और भूस्खलन के कारण बंद पहाड़ी सड़क

उत्तराखंड में भारी बारिश से 111 रास्ते बंद, आठ जिलों में अलर्ट जारी

असम में बाढ़ प्रभावित गांव में नाव से लोगों को सुरक्षित स्थान पर ले जाती बचाव टीम
असम बाढ़ 2026: 75 लोगों की मौत, कई गांव जलमग्न, राहत और बचाव अभियान युद्धस्तर पर जारी

असम में लगातार हो रही भारी बारिश और ब्रह्मपुत्र सहित अन्य नदियों के जलस्तर में वृद्धि के कारण बाढ़ की स्थिति गंभीर बनी हुई है। राज्य के कई जिले बाढ़ से प्रभावित हैं और जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है। ताज़ा रिपोर्टों के अनुसार, बाढ़ से मरने वालों की संख्या 75 तक पहुँच गई है। हजारों लोग अपने घर छोड़ने को मजबूर हुए हैं, जबकि कई गांव अब भी पूरी तरह पानी में डूबे हुए हैं।   प्रभावित जिलों में जनजीवन ठप बाढ़ का सबसे अधिक असर निचले इलाकों में देखने को मिल रहा है। सड़कें, पुल, स्कूल और स्वास्थ्य केंद्र जलमग्न होने से लोगों की आवाजाही प्रभावित हुई है। कई स्थानों पर बिजली और संचार सेवाएं भी बाधित हुई हैं। पानी भर जाने के कारण दैनिक जीवन से जुड़ी गतिविधियाँ लगभग ठप हो गई हैं और लोगों को सुरक्षित स्थानों पर रहने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।   राहत और बचाव अभियान तेज राज्य सरकार, राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF), राज्य आपदा मोचन बल (SDRF) और स्थानीय प्रशासन मिलकर राहत एवं बचाव कार्य चला रहे हैं। नावों और अन्य बचाव उपकरणों की मदद से फँसे हुए लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुँचाया जा रहा है। कई राहत शिविर स्थापित किए गए हैं, जहाँ प्रभावित परिवारों को भोजन, पीने का स्वच्छ पानी, कपड़े, दवाइयाँ और अन्य आवश्यक सुविधाएँ उपलब्ध कराई जा रही हैं।   किसानों और पशुपालकों को भारी नुकसान बाढ़ का सबसे अधिक असर कृषि क्षेत्र पर पड़ा है। हजारों हेक्टेयर कृषि भूमि पानी में डूब गई है, जिससे धान और अन्य फसलों को भारी नुकसान पहुँचा है। पशुपालकों को भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है, क्योंकि कई पशु बाढ़ की चपेट में आ गए हैं और चारे की कमी उत्पन्न हो गई है। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर गंभीर प्रभाव पड़ने की आशंका है।   स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियाँ बाढ़ के बाद जलजनित बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। इसे देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने राहत शिविरों में चिकित्सा शिविर लगाए हैं। डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों की टीमें प्रभावित क्षेत्रों में लगातार निगरानी कर रही हैं। स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने और संक्रमण रोकने के लिए विशेष अभियान भी चलाया जा रहा है।   मौसम विभाग की चेतावनी भारतीय मौसम विभाग ने राज्य के कई हिस्सों में अगले कुछ दिनों तक भारी बारिश की संभावना जताई है। प्रशासन ने लोगों से सतर्क रहने, नदी किनारे के क्षेत्रों से दूर रहने और केवल आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करने की अपील की है। संभावित खतरे वाले क्षेत्रों में पहले से ही एहतियाती कदम उठाए जा रहे हैं।   स्थायी समाधान की आवश्यकता विशेषज्ञों का मानना है कि असम में हर वर्ष आने वाली बाढ़ एक दीर्घकालिक चुनौती बन चुकी है। इसके समाधान के लिए तटबंधों को मजबूत करना, नदी प्रबंधन में सुधार, जल निकासी व्यवस्था को बेहतर बनाना और आपदा प्रबंधन तंत्र को और प्रभावी बनाना आवश्यक है। साथ ही, बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के लिए दीर्घकालिक पुनर्वास योजनाओं को प्राथमिकता देने की जरूरत है।   असम में बाढ़ की स्थिति अभी भी गंभीर बनी हुई है और राहत एवं बचाव अभियान लगातार जारी है। सरकार, प्रशासन और स्वयंसेवी संगठन मिलकर प्रभावित लोगों तक हर संभव सहायता पहुँचाने का प्रयास कर रहे हैं। मौसम में सुधार और प्रभावी राहत कार्यों के माध्यम से जल्द ही हालात सामान्य होने की उम्मीद की जा रही है।

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लखनऊ अग्निकांड: 15 मौतों के बाद जागा प्रशासन, अवैध इमारत पर चला बुलडोजर

पेपर लीक मामलों की जल्द सुनवाई के लिए फास्ट-ट्रैक कोर्ट बनाने की घोषणा करते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

पेपर लीक पर केंद्र सरकार सख्त, जल्द सुनवाई के लिए बनेंगे विशेष फास्ट-ट्रैक कोर्ट

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