INDIA

प्रधानमंत्री मोदी ने छात्र प्रदर्शनकारियों को किया माफ, कहा—सजा नहीं, सही मार्गदर्शन की जरूरत

TV 24 Network August 1, 2026 0
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी छात्र प्रदर्शनकारियों को सजा के बजाय मार्गदर्शन देने की बात करते हुए
प्रधानमंत्री मोदी ने छात्र प्रदर्शनकारियों को माफ करने की बात कही

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल के छात्र प्रदर्शनों के दौरान उनके और उनकी दिवंगत मां के खिलाफ अपशब्द कहने वाले युवाओं को माफ करने की बात कही है। उन्होंने कहा कि छात्रों को बार-बार अदालतों में बुलाने, कानूनी मामलों में उलझाने या सामाजिक रूप से परेशान करने से समस्या का समाधान नहीं होगा। इसके बजाय नाराज और भटके हुए युवाओं को समझाने तथा सही दिशा दिखाने की आवश्यकता है।

 

प्रधानमंत्री ने 31 जुलाई 2026 को सोशल मीडिया पर एक वीडियो संदेश जारी करते हुए यह बात कही। इस बयान से संबंधित खबर 1 अगस्त 2026 को प्रमुखता से सामने आई। प्रधानमंत्री ने अपने संदेश के साथ लिखा कि अपशब्द किसी समस्या का समाधान नहीं होते और सभी लोगों को मिलकर भटके हुए युवाओं का मार्गदर्शन करना चाहिए।

 

छात्र प्रदर्शनों से जुड़ा है मामला

यह मामला राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं में कथित पेपर लीक और परीक्षा व्यवस्था में अनियमितताओं के खिलाफ हुए छात्र प्रदर्शनों से जुड़ा है। हाल के सप्ताहों में बड़ी संख्या में युवाओं ने दिल्ली सहित देश के कई हिस्सों में प्रदर्शन किए थे। प्रदर्शनकारियों ने परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता, दोषियों के खिलाफ कार्रवाई और छात्रों से जुड़े मामलों के समाधान की मांग की थी।

 

दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन के दौरान कुछ युवाओं के वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आए थे, जिनमें प्रधानमंत्री और उनकी मां के लिए आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया गया। इसके बाद कुछ प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई और कानूनी मामले दर्ज किए जाने की खबरें आई थीं।

 

प्रधानमंत्री ने माफी की बात क्यों कही?

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि यदि युवाओं ने गुस्से या किसी के प्रभाव में आकर गलत शब्दों का इस्तेमाल किया है, तो उन्हें केवल सजा देना सही समाधान नहीं होगा। उन्होंने छात्रों को बच्चों की तरह समझाते हुए उनके साथ संवेदनशील व्यवहार करने पर जोर दिया।

 

प्रधानमंत्री के अनुसार, युवाओं को लंबे समय तक कानूनी प्रक्रिया में फंसाने से उनका भविष्य प्रभावित हो सकता है। उन्होंने कहा कि उन्हें अदालतों के बार-बार चक्कर लगवाने और समाज में परेशानी का सामना करने के लिए मजबूर करने के बजाय समझाया जाना चाहिए।

 

उन्होंने अपने समर्थकों और आम लोगों से भी कहा कि वे इस मामले को आगे बढ़ाकर युवाओं को परेशान न करें। उनके संदेश का मुख्य उद्देश्य नाराजगी के स्थान पर माफी, संवाद और मार्गदर्शन को प्राथमिकता देना था।

 

युवती ने जारी किया माफी का वीडियो

इस मामले में अपशब्द कहने की आरोपी एक युवती का माफी मांगते हुए वीडियो भी सामने आया है। युवती ने खुद को 15 वर्ष की बताते हुए कहा कि उसने किसी के प्रभाव में आकर गलती की और यह उसकी पहली तथा आखिरी भूल थी। उसने प्रधानमंत्री और पूरे देश से माफी मांगी।

 

हालांकि कुछ मीडिया संस्थानों ने यह भी स्पष्ट किया है कि वे वीडियो की प्रामाणिकता की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं कर सके हैं। इसलिए युवती की उम्र और उसके बयान से संबंधित दावों को आधिकारिक जांच पूरी होने तक सावधानी से देखा जाना चाहिए।

 

प्रदर्शन के बाद सरकार ने उठाए कदम

छात्रों का आंदोलन कथित परीक्षा पेपर लीक, परीक्षा रद्द होने और दोबारा परीक्षा कराए जाने जैसे मुद्दों को लेकर तेज हुआ था। सरकार ने बाद में परीक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए कदम उठाने और एक विशेष कार्यबल गठित करने की घोषणा की। इसके अलावा पेपर लीक और परीक्षा में गड़बड़ी करने वालों के खिलाफ सजा तथा जुर्माना बढ़ाने से संबंधित कानूनी प्रावधानों पर भी काम किया गया।

 

सरकार और प्रदर्शनकारी समूहों के बीच बातचीत के बाद आंदोलन समाप्त करने की घोषणा की गई थी। प्रदर्शनकारियों ने परीक्षा प्रणाली में सुधार, पुलिस मामलों की वापसी और प्रभावित परिवारों के लिए सहायता जैसी मांगें रखी थीं।

 

राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आईं

प्रधानमंत्री के बयान पर अलग-अलग राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। सरकार और भाजपा से जुड़े नेताओं ने इसे संवेदनशील तथा क्षमाशील नेतृत्व का उदाहरण बताया। वहीं विपक्षी नेताओं ने कहा कि केवल माफी की घोषणा पर्याप्त नहीं है और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामलों तथा पुलिस कार्रवाई पर ठोस कदम उठाए जाने चाहिए।

 

कुल मिलाकर प्रधानमंत्री मोदी का यह संदेश छात्रों के प्रति दंड के बजाय संवाद और मार्गदर्शन की नीति पर केंद्रित है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामलों और उनसे जुड़े कानूनी कदमों पर प्रशासन आगे क्या फैसला करता है।

Tags

PM-Modi Student-Protest Narendra-Modi Youth-Protest
Popular post
Bihar Chunav से पहले Anant Singh की बढ़ी मुश्किलें, दुलार चंद यादव के हत्या मामले में फंसे बाहुबली

Lucknow Desk: बिहार के मोकामा से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहाँ चुनाव प्रचार के दौरान हमला किया गया। इस घटना में जानी-मानी हस्ती दुलारचंद यादव की हत्या हो गई है और आरोप लगाया गया है कि इस घटना में पूर्व विधायक अनंत सिंह के समर्थकों की भूमिका है। यह घटना आगामी विधानसभा चुनाव के बीच हुई है, जिससे राज्य में कानून-व्यवस्था और चुनावी हिंसा पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। अनंत सिंह समेत 5 नामजद मोकामा में दुलारचंद यादव की हत्या मामले में JDU प्रत्याशी बाहुबली अनंत सिंह समेत पांच लोगों पर केस दर्ज कर ली गई है। मृत दुलारचंद यादव के पोते के दिए गए बयान पर अनंत सिंह, दो भतीजों रणवीर सिंह, कर्मवीर सिंह, करीबी छोटन सिंह और कंजय सिंह पर नामजद और कई अज्ञात के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया गया है। यानी दुलारचंद यादव के परिजनों और जन सुराज पार्टी के समर्थकों ने सीधे तौर पर JDU उम्मीदवार और बाहुबली नेता अनंत सिंह के समर्थकों पर हत्या का आरोप लगाया है। अनंत सिंह ने आरोपों को किया खारिज वहीं इस बयान पर JDU उम्मीदवार अनंत सिंह ने इन आरोपों को खारिज करते हुए इसे RJD उम्मीदवार वीणा देवी के पति बाहुबली सूरजभान सिंह की साजिश बताया है। अनंत सिंह ने कहा कि उनके काफिले पर विरोधियों ने हमला किया और यह सारा खेल सूरजभान सिंह करवा रहे हैं। कौन थे दुलारचंद यादव ? मोकामा के रहने वाले दुलारचंद यादव को ‘टाल का बादशाह’ कहा जाता था। दुलारचंद पहलवानी के साथ-साथ गाना गाने के भी शौकीन थे। उन्होंने जन सुराज के उम्मीदवार पीयूष प्रियदर्शी के लिए एक गाना भी रिकॉर्ड करवाया था। माना जा रहा है कि मोकामा की चुनावी जंग अब व्यक्तिगत रंजिश और हिंसक टकराव की तरफ मुड़ गई है।

नाती अगस्त्य की Ikkis का ट्रेलर देखकर इमोशनल हुए Amitabh Bachchan!

बॉलीवुड के शहंशाह अमिताभ बच्चन एक बार फिर दादा होने का गर्व महसूस कर रहे हैं। दरअसल, उनके नाती अगस्त्य नंदा की अपकमिंग फिल्म ‘इक्कीस’ का ट्रेलर हाल ही में रिलीज़ हुआ है। ट्रेलर देखकर बिग बी इतने इमोशनल हो गए कि उन्होंने सोशल मीडिया पर एक दिल छू लेने वाला पोस्ट शेयर किया। अमिताभ ने अपने पोस्ट में लिखा, “ये तो बस शुरुआत है... गर्व है तुम्हारे इस सफर पर, मेरे बच्चे।” उनकी इस पोस्ट पर फैन्स और फिल्म इंडस्ट्री के सितारों ने जमकर प्यार लुटाया। ‘इक्कीस’ मेगास्टार मेघना गुलज़ार के निर्देशन में बनी है और इसमें अगस्त्य नंदा एक अहम किरदार निभा रहे हैं। फिल्म 1971 के युद्ध के हीरो अरुण खेत्रपाल की कहानी पर आधारित है, जो देश के सबसे युवा परमवीर चक्र विजेता थे। फिल्म के ट्रेलर में अगस्त्य का जोश और समर्पण देखकर फैन्स कह रहे हैं—“दादा की तरह नाती भी लाजवाब!” तो देखना दिलचस्प होगा कि क्या अगस्त्य अपनी पहली ही फिल्म से दादा अमिताभ की विरासत को आगे बढ़ा पाएंगे।

अंबाला एयरफोर्स स्टेशन पहुंचीं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, फाइटर जेट में उड़ान भरने वाली दूसरी महिला राष्ट्रपति

Lucknow Desk: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने आज बुधवार को भारतीय वायुसेना के लड़ाकू विमान राफेल में उड़ान भरकर इतिहास रच दिया है। इससे पहले राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू सुखोई-3 MKI लड़ाकू विमान में भी उड़ान भर चुकी हैं। राष्ट्रपति की इस उड़ान ने आज भारतीय वायुसेना के साथ-साथ पूरे देश को गौरव से भर दिया है। बता दें, भारत का राष्ट्रपति तीनों सेनाओं की कमांडर होता है और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर मौजूद हैं। अंबाला एयरफोर्स स्टेशन पहुंचीं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू आज सुबह अंबाला एयरबेस पहुंचीं, जहां वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल ए. पी. सिंह और वरिष्ठ अधिकारियों ने उनका स्वागत किया। बता दें, राष्ट्रपति का यह उड़ान न केवल साहसिक नेतृत्व शैली का प्रतीक है, बल्कि भारत की बढ़ती रक्षा क्षमता और 'आत्मनिर्भर भारत' के संकल्प को वैश्विक पटल पर मजबूती से प्रदर्शित करना भी है। फाइटर जेट में उड़ान भरने वाली दूसरी महिला राष्ट्रपति मुर्मू राष्ट्रपति मुर्मू ने फाइटर जेट की सवारी ये पहली बार नहीं की हैं। उन्होंने इससे पहले 8 अप्रैल 2023 को असम के तेजपुर एयरफोर्स स्टेशन से सुखोई-30 MKI फाइटर विमान में भी उड़ान भर चुकी हैं। वह फाइटर जेट उड़ाने वाली तीसरी राष्ट्रपति और दूसरी महिला राष्ट्राध्यक्ष बनी थीं। राष्ट्रपति मुर्मू ने से पहले पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम और प्रतिभा पाटिल ने भी सुखोई-30 MKI में उड़ान भरी थी। राफेल लड़ाकू विमान का क्या है इतिहास? बता दें, राफेल लड़ाकू विमान फ्रांसीसी कंपनी दसॉ एविएशन द्वारा निर्मित किया गया है। सितंबर 2020 में अंबाला एयरफोर्स स्टेशन पर भारतीय वायुसेना में औपचारिक रूप से शामिल किया गया था। अंबाला एयरबेस राफेल स्क्वाड्रन ‘गोल्डन एरोज' का मुख्य केंद्र है। इन विमानों का इस्तेमाल हाल ही में ‘ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान किया गया था, इसके माध्यम से आतंकवादी ठिकानों पर हमले कर अपनी ताकत को सैनियों ने दिखाया था।

Brijbhushan Sharan Singh के हेलीकॉप्टर की खेत में इमरजेंसी लैंडिंग! इस वजह से बिगड़ा संतुलन

Lucknow Desk: कैसरगंज के बीजेपी नेता और पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह के हेलीकॉप्टर को धान के खेत में अचानक उतारना पड़ा। जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। बताया जा रहा है कि तकनीकी खराबी आने के बाद पायलट ने सूझबूझ दिखाते हुए हेलीकॉप्टर को सुरक्षित उतारा, जहां हेलीकॉप्टर देखने के लिए ग्रामीण भी जुट गए। मिली जानकारी के मुताबिक, बृजभूषण शरण सिंह एक कार्यक्रम में शामिल होने जा रहे थे। उड़ान के कुछ ही मिनट बाद हेलीकॉप्टर में तकनीकी दिक्कत आने लगी। स्थिति को समझते हुए पायलट ने तुरंत इमरजेंसी लैंडिंग का फैसला लिया और नज़दीकी धान के खेत में हेलीकॉप्टर को सुरक्षित उतार दिया। घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी भी मौके पर पहुंच गए। हेलीकॉप्टर की जांच के लिए टेक्निकल टीम बुलाई गई है। फिलहाल राहत की बात यह है कि बृजभूषण शरण सिंह और हेलीकॉप्टर में मौजूद सभी लोग पूरी तरह सुरक्षित हैं। जांच के बाद ही तकनीकी खराबी की असली वजह पता चल पाएगी। इसी बीच पूर्व सांसद बृजभूषण सिंह ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी कर संदेश दिया। उन्होंने कहा, आज मेरा बिहार प्रदेश के अंदर संदेश व दिनारा विधानसभा क्षेत्र में चुनावी सभा का कार्यक्रम था। संदेश विधानसभा का कार्यक्रम करके मैं दिनारा विधानसभा के लिए हेलीकाप्टर से निकला था। अचानक मौसम खराब होने के कारण हेलीकाप्टर की सुरक्षित लैंडिंग एक खेत में करानी पड़ी। पायलट ने बड़ी सूझबूझ से लैंडिंग कराई। मैं, इस समय गाड़ी से पटना जा रहा हूं। किसी अफवाह में आने की जरूरत नहीं है। किसी प्रकार की कोई हानि नहीं हुई है। हम सभी पूर्णतया सुरक्षित हैं। हेलीकाप्टर की सुरक्षा का प्रबंध कर दिया गया है। प्रशासन व जनता का बहुत सहयोग रहा...धन्यवाद

Shahrukh Khan ने मनाया 60वां जन्मदिन, विदेशों से भी जुटे फैंस

Lucknow Desk: आज 02 नवंबर 2025 को बॉलीवुड के बादशाह Shahrukh Khan ने अपने 60वें जन्मदिन का जश्न मनाया। इस मौके पर उन्होंने अपने परिवार, करीबियों और फिल्म इंडस्ट्री के दोस्तों के साथ खुशियाँ बाँटी। उन्होंने अपने आलीशान घर के बजाय इस बार सार्वजनिक रूप से Mannat से बाहर नहीं दिखने का फैसला किया क्योंकि वहाँ फिलहाल निर्माण का काम चल रहा है। वहीँ, जश्न के लिए उन्होंने Alibaug में स्थित निजी स्थान चुना। एक विशेष फैन-मीट कार्यक्रम Balgandharva Rangmandir, बांद्रा में आयोजित किया गया था, जहाँ सीमित प्रवेश पास के माध्यम से प्रशंसक सीधे शामिल हुए। सोशल मीडिया पर सितारों ने बधाइयाँ दीं। जिसमें Farah Khan ने लिखा, “Happy birthday KING … rule for another 100 years”। बता दें कि Shahrukh Khan के जन्मदिन के मौके पर सिर्फ भारत भर से ही नहीं बल्कि विदेशों से भी फैंस जुटे। शाहरुख खान के फैन क्लबों ने जन्मदिन सप्ताह के रूप में मनाया, चैरिटी ड्राइव, विशेष बैनर आदि के माध्यम से ख़ास अंदाज़ से जश्न मनाया।

सिक्किम के नाथू ला दर्रे से छह साल बाद भारत-चीन सीमा व्यापार दोबारा शुरू
नाथू ला से छह साल बाद भारत-चीन सीमा व्यापार फिर शुरू, सिक्किम के कारोबारियों को मिलेगा लाभ

सिक्किम के ऐतिहासिक नाथू ला दर्रे से भारत और चीन के बीच सीमा व्यापार आज, 1 अगस्त 2026 से लगभग छह साल बाद दोबारा शुरू हो गया है। कोविड-19 महामारी के कारण वर्ष 2020 में बंद हुई यह व्यापारिक गतिविधि अब फिर बहाल की गई है। सीमा व्यापार शुरू होने से सिक्किम के स्थानीय व्यापारियों, वाहन चालकों, मजदूरों और छोटे व्यवसायियों को लाभ मिलने की उम्मीद है।   नाथू ला भारत और चीन के बीच मौजूद प्रमुख सीमा दर्रों में से एक है। यह पूर्वी सिक्किम में स्थित है और पुराने समय में दोनों देशों के बीच व्यापार करने का प्रमुख रास्ता था। आज से इस व्यापारिक मार्ग के दोबारा खुलने को स्थानीय अर्थव्यवस्था और भारत-चीन संबंधों के लिए महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।   भारत और चीन के बीच पुराना व्यापार मार्ग पुराने समय में नाथू ला के रास्ते भारत और चीन के व्यापारी सामानों की खरीद-बिक्री करते थे। इस मार्ग से रेशम, ऊन, चाय, मसाले, कपड़े और रोजमर्रा की जरूरतों से जुड़ी वस्तुओं का व्यापार होता था।   वर्ष 1962 के भारत-चीन युद्ध के बाद नाथू ला मार्ग को बंद कर दिया गया था। इसके लगभग 44 साल बाद 6 जुलाई 2006 को इसे सीमा व्यापार के लिए फिर से खोला गया। इसके बाद दोनों देशों के अधिकृत व्यापारी निर्धारित नियमों के तहत यहां कारोबार करते रहे। हालांकि, कोरोना महामारी के दौरान वर्ष 2020 में व्यापारिक गतिविधियां फिर बंद कर दी गई थीं।   स्थानीय कारोबार को मिलेगा फायदा सीमा व्यापार शुरू होने से सिक्किम के पंजीकृत व्यापारियों को सबसे अधिक लाभ मिलने की उम्मीद है। इसके अलावा सामान ढोने वाले वाहन चालक, मजदूर, होटल संचालक, दुकानदार और छोटे कारोबारी भी इससे लाभान्वित हो सकते हैं।   व्यापार के दौरान सीमा तक सामान पहुंचाने के लिए वाहनों की जरूरत होती है। इससे परिवहन सेवाओं की मांग बढ़ सकती है। व्यापारियों और अधिकारियों के आने-जाने से स्थानीय होटलों, भोजनालयों और बाजारों में भी कारोबार बढ़ने की संभावना है।   केवल निर्धारित सामानों का होता है व्यापार नाथू ला के रास्ते हर प्रकार के सामान का व्यापार नहीं किया जा सकता। भारत और चीन की ओर से कुछ वस्तुओं की सूची तय की जाती है। केवल उन्हीं वस्तुओं को सीमा पार ले जाने और बेचने की अनुमति होती है।   इस व्यापार में केवल पंजीकृत और अधिकृत व्यापारी ही भाग ले सकते हैं। व्यापारियों को पहचान पत्र, परमिट, सुरक्षा जांच और सीमा शुल्क से जुड़ी प्रक्रियाएं पूरी करनी होती हैं। दोनों देशों के अधिकारी व्यापारिक गतिविधियों की निगरानी करते हैं।   भारत-चीन रिश्तों के लिए सकारात्मक संकेत नाथू ला से व्यापार की बहाली को भारत और चीन के रिश्तों में सुधार की दिशा में एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है। वर्ष 2020 में पूर्वी लद्दाख में सीमा विवाद के बाद दोनों देशों के संबंधों में तनाव बढ़ गया था।   इसके बाद कई दौर की सैन्य और कूटनीतिक बातचीत हुई। नाथू ला व्यापार मार्ग का दोबारा खुलना इस बात का संकेत माना जा सकता है कि दोनों देश सीमित क्षेत्रों में सामान्य गतिविधियों और आपसी सहयोग को आगे बढ़ाने का प्रयास कर रहे हैं।   मौसम और सड़क व्यवस्था बड़ी चुनौती नाथू ला काफी ऊंचाई पर स्थित है, जहां मौसम तेजी से बदलता है। सर्दियों में भारी बर्फबारी होती है और कई बार सड़कें बंद हो जाती हैं। इसलिए यहां पूरे साल व्यापार करना आसान नहीं है।   व्यापार को नियमित रूप से चलाने के लिए बेहतर सड़क, सुरक्षित परिवहन, गोदाम, जांच केंद्र और संचार सुविधाओं की जरूरत होगी। प्रशासन को खराब मौसम के दौरान व्यापारियों और कर्मचारियों की सुरक्षा का भी विशेष ध्यान रखना होगा।   सीमावर्ती अर्थव्यवस्था को मिलेगी मजबूती नाथू ला सीमा व्यापार का आकार भले ही भारत और चीन के कुल व्यापार की तुलना में छोटा हो, लेकिन सिक्किम की स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिए इसका महत्व काफी बड़ा है।   व्यापार शुरू होने से रोजगार के अवसर बढ़ सकते हैं और सीमावर्ती बाजारों में आर्थिक गतिविधियां तेज हो सकती हैं। यह कदम दोनों देशों के बीच विश्वास, संपर्क और आर्थिक सहयोग बढ़ाने में भी मददगार साबित हो सकता है।

TV 24 Network August 1, 2026 0
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी छात्र प्रदर्शनकारियों को सजा के बजाय मार्गदर्शन देने की बात करते हुए

प्रधानमंत्री मोदी ने छात्र प्रदर्शनकारियों को किया माफ, कहा—सजा नहीं, सही मार्गदर्शन की जरूरत

दिल्ली में CJP प्रदर्शनकारियों से जुड़े 13 मुकदमे वापस लेने की प्रक्रिया शुरू करती पुलिस

दिल्ली सरकार का बड़ा फैसला, CJP प्रदर्शनकारियों से जुड़े 13 मुकदमे होंगे वापस

वंदे मातरम् को कानूनी संरक्षण देने वाला संशोधन विधेयक संसद से पारित

वंदे मातरम् को मिलेगा राष्ट्रगान जैसा कानूनी संरक्षण, संसद के दोनों सदनों से विधेयक पारित

असम में बाढ़ से प्रभावित गांव और राहत अभियान चलाते बचावकर्मी
असम में बाढ़ के बाद मुश्किलें बरकरार, लाखों लोगों के सामने घर और रोजगार बचाने की चुनौती

असम में बाढ़ का पानी कई क्षेत्रों से धीरे-धीरे उतरने लगा है, लेकिन लोगों की परेशानियां अभी कम नहीं हुई हैं। अनेक गांवों में घरों के अंदर मिट्टी और गंदा पानी जमा है। सड़कों, बिजली व्यवस्था और खेती को हुए नुकसान के कारण सामान्य जीवन दोबारा शुरू होने में समय लग सकता है। प्रशासन की ओर से बचाव, राहत सामग्री वितरण और जरूरी सेवाओं को बहाल करने का काम लगातार किया जा रहा है।   29 जुलाई को राज्य में 3.32 लाख से अधिक लोग बाढ़ से प्रभावित बताए गए थे। पानी कम होने के बाद 30 जुलाई की रिपोर्ट में प्रभावित आबादी करीब 2.12 लाख रह गई। संख्या में कमी जरूर आई है, लेकिन हजारों परिवारों को अब भी भोजन, स्वच्छ पानी, दवा और सुरक्षित रहने की जगह की जरूरत है।   चार जिलों में बाढ़ का अधिक प्रभाव चराइदेव, शिवसागर, जोरहाट और गोलाघाट जिले बाढ़ से सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों में शामिल हैं। इन जिलों के कई गांवों में मकानों, दुकानों और संपर्क मार्गों को नुकसान पहुंचा है। कुछ स्थानों पर पानी उतरने के बाद मोटी मिट्टी की परत दिखाई दे रही है, जिससे लोगों के लिए अपने घरों की सफाई और मरम्मत करना मुश्किल हो रहा है।   ग्रामीण इलाकों में टूटी सड़कों और क्षतिग्रस्त पुलों के कारण राहत सामग्री पहुंचाने में भी बाधा आ रही है। प्रशासन नावों और अन्य उपलब्ध साधनों की मदद से प्रभावित परिवारों तक सहायता पहुंचाने का प्रयास कर रहा है।   राहत शिविरों में रहने को मजबूर परिवार जिन लोगों के घर रहने योग्य नहीं बचे हैं, उन्हें राहत शिविरों और सुरक्षित स्थानों पर ठहराया गया है। शिविरों में भोजन, पेयजल, बच्चों के लिए आवश्यक सामग्री और प्राथमिक चिकित्सा उपलब्ध कराई जा रही है।   गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और बीमार लोगों के स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मचारियों की टीमें शिविरों में जांच कर रही हैं। दूषित पानी के कारण दस्त, त्वचा संक्रमण और अन्य बीमारियां फैलने का खतरा बना हुआ है।   मौतों का आंकड़ा बढ़ने से चिंता बाढ़ और इससे जुड़ी दुर्घटनाओं में मरने वाले लोगों की संख्या लगभग 80 तक पहुंच गई है। कई लोगों की मौत पानी में डूबने, तेज बहाव में बहने और मकान क्षतिग्रस्त होने जैसी घटनाओं में हुई।   राज्य सरकार द्वारा मृतकों के परिवारों को आर्थिक सहायता देने और नुकसान का आकलन करने की प्रक्रिया चल रही है। प्रभावित जिलों में सर्वेक्षण करके मकानों, खेती और अन्य संपत्तियों को हुए नुकसान की जानकारी जुटाई जा रही है।   किसानों की फसल और पशुधन प्रभावित बाढ़ ने किसानों की मेहनत पर भी पानी फेर दिया है। धान सहित कई फसलें जलमग्न होने से खराब हो गई हैं। खेतों में जमा गाद और पानी के कारण अगली बुवाई की तैयारी भी प्रभावित हो सकती है।   कई परिवारों के पशु बह गए या बीमार हो गए हैं। पशुपालन विभाग द्वारा पशुओं के उपचार, टीकाकरण और चारे की व्यवस्था करने की कोशिश की जा रही है। किसानों का कहना है कि फसल और पशुधन दोनों को नुकसान होने से उनकी आय पर लंबे समय तक असर पड़ सकता है।   बिजली और सड़क व्यवस्था बहाल करने का काम जारी बाढ़ के कई दिनों बाद भी हजारों घरों में बिजली आपूर्ति पूरी तरह सामान्य नहीं हो पाई है। पानी में डूबे ट्रांसफार्मर, बिजली के खंभे और तारों की मरम्मत की जा रही है।   सड़कों से मिट्टी और मलबा हटाने का काम भी जारी है। कुछ क्षेत्रों में यातायात शुरू हो गया है, जबकि कई ग्रामीण रास्ते अभी बंद हैं। प्रशासन ने लोगों से क्षतिग्रस्त सड़कों और तेज बहाव वाले स्थानों से दूर रहने की अपील की है।   दोबारा बारिश होने पर बढ़ सकता है खतरा मौसम विभाग ने असम के कुछ हिस्सों में और बारिश की संभावना जताई है। ऐसे में नदियों का जलस्तर फिर बढ़ने और निचले इलाकों में पानी भरने का खतरा बना हुआ है।   लोगों से स्थानीय प्रशासन की चेतावनियों का पालन करने, नदी किनारे नहीं जाने और जरूरी दस्तावेज तथा सामान सुरक्षित रखने को कहा गया है। फिलहाल असम के सामने सबसे बड़ी चुनौती प्रभावित लोगों को घर वापस पहुंचाने के साथ उनके रोजगार, खेती और दैनिक जीवन को दोबारा पटरी पर लाना है।

TV 24 Network July 31, 2026 0
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आंध्र प्रदेश में भोगापुरम अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट का उद्घाटन करते हुए

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 1 अगस्त को आंध्र प्रदेश जाएंगे, भोगापुरम एयरपोर्ट का कर सकते हैं उद्घाटन

लोकसभा में एंटी-पेपर लीक संशोधन बिल 2026 पारित होने का प्रतीकात्मक दृश्य

लोकसभा से एंटी-पेपर लीक बिल पारित, दोषियों पर होगी सख्त कार्रवाई

उत्तराखंड में भारी बारिश और भूस्खलन के कारण बंद पहाड़ी सड़क

उत्तराखंड में भारी बारिश से 111 रास्ते बंद, आठ जिलों में अलर्ट जारी

असम में बाढ़ प्रभावित गांव में नाव से लोगों को सुरक्षित स्थान पर ले जाती बचाव टीम
असम बाढ़ 2026: 75 लोगों की मौत, कई गांव जलमग्न, राहत और बचाव अभियान युद्धस्तर पर जारी

असम में लगातार हो रही भारी बारिश और ब्रह्मपुत्र सहित अन्य नदियों के जलस्तर में वृद्धि के कारण बाढ़ की स्थिति गंभीर बनी हुई है। राज्य के कई जिले बाढ़ से प्रभावित हैं और जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है। ताज़ा रिपोर्टों के अनुसार, बाढ़ से मरने वालों की संख्या 75 तक पहुँच गई है। हजारों लोग अपने घर छोड़ने को मजबूर हुए हैं, जबकि कई गांव अब भी पूरी तरह पानी में डूबे हुए हैं।   प्रभावित जिलों में जनजीवन ठप बाढ़ का सबसे अधिक असर निचले इलाकों में देखने को मिल रहा है। सड़कें, पुल, स्कूल और स्वास्थ्य केंद्र जलमग्न होने से लोगों की आवाजाही प्रभावित हुई है। कई स्थानों पर बिजली और संचार सेवाएं भी बाधित हुई हैं। पानी भर जाने के कारण दैनिक जीवन से जुड़ी गतिविधियाँ लगभग ठप हो गई हैं और लोगों को सुरक्षित स्थानों पर रहने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।   राहत और बचाव अभियान तेज राज्य सरकार, राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF), राज्य आपदा मोचन बल (SDRF) और स्थानीय प्रशासन मिलकर राहत एवं बचाव कार्य चला रहे हैं। नावों और अन्य बचाव उपकरणों की मदद से फँसे हुए लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुँचाया जा रहा है। कई राहत शिविर स्थापित किए गए हैं, जहाँ प्रभावित परिवारों को भोजन, पीने का स्वच्छ पानी, कपड़े, दवाइयाँ और अन्य आवश्यक सुविधाएँ उपलब्ध कराई जा रही हैं।   किसानों और पशुपालकों को भारी नुकसान बाढ़ का सबसे अधिक असर कृषि क्षेत्र पर पड़ा है। हजारों हेक्टेयर कृषि भूमि पानी में डूब गई है, जिससे धान और अन्य फसलों को भारी नुकसान पहुँचा है। पशुपालकों को भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है, क्योंकि कई पशु बाढ़ की चपेट में आ गए हैं और चारे की कमी उत्पन्न हो गई है। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर गंभीर प्रभाव पड़ने की आशंका है।   स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियाँ बाढ़ के बाद जलजनित बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। इसे देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने राहत शिविरों में चिकित्सा शिविर लगाए हैं। डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों की टीमें प्रभावित क्षेत्रों में लगातार निगरानी कर रही हैं। स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने और संक्रमण रोकने के लिए विशेष अभियान भी चलाया जा रहा है।   मौसम विभाग की चेतावनी भारतीय मौसम विभाग ने राज्य के कई हिस्सों में अगले कुछ दिनों तक भारी बारिश की संभावना जताई है। प्रशासन ने लोगों से सतर्क रहने, नदी किनारे के क्षेत्रों से दूर रहने और केवल आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करने की अपील की है। संभावित खतरे वाले क्षेत्रों में पहले से ही एहतियाती कदम उठाए जा रहे हैं।   स्थायी समाधान की आवश्यकता विशेषज्ञों का मानना है कि असम में हर वर्ष आने वाली बाढ़ एक दीर्घकालिक चुनौती बन चुकी है। इसके समाधान के लिए तटबंधों को मजबूत करना, नदी प्रबंधन में सुधार, जल निकासी व्यवस्था को बेहतर बनाना और आपदा प्रबंधन तंत्र को और प्रभावी बनाना आवश्यक है। साथ ही, बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के लिए दीर्घकालिक पुनर्वास योजनाओं को प्राथमिकता देने की जरूरत है।   असम में बाढ़ की स्थिति अभी भी गंभीर बनी हुई है और राहत एवं बचाव अभियान लगातार जारी है। सरकार, प्रशासन और स्वयंसेवी संगठन मिलकर प्रभावित लोगों तक हर संभव सहायता पहुँचाने का प्रयास कर रहे हैं। मौसम में सुधार और प्रभावी राहत कार्यों के माध्यम से जल्द ही हालात सामान्य होने की उम्मीद की जा रही है।

TV 24 Network July 29, 2026 0
CJP ने FIR वापसी और छात्रों की रिहाई के लिए दोबारा आंदोलन की चेतावनी दी

CJP ने दोबारा आंदोलन शुरू करने की दी चेतावनी, FIR वापसी और छात्रों की रिहाई की मांग

लखनऊ अग्निकांड के बाद चार मंजिला अवैध इमारत पर बुलडोजर चलाता LDA

लखनऊ अग्निकांड: 15 मौतों के बाद जागा प्रशासन, अवैध इमारत पर चला बुलडोजर

पेपर लीक मामलों की जल्द सुनवाई के लिए फास्ट-ट्रैक कोर्ट बनाने की घोषणा करते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

पेपर लीक पर केंद्र सरकार सख्त, जल्द सुनवाई के लिए बनेंगे विशेष फास्ट-ट्रैक कोर्ट

0 Comments