अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव लगातार गंभीर होता जा रहा है। अमेरिकी सेना ने ईरान के खिलाफ अपने सबसे शक्तिशाली रणनीतिक बमवर्षक विमानों का इस्तेमाल किया है। रिपोर्टों के मुताबिक, B-1, B-2 और B-52 जैसे खतरनाक बॉम्बर्स को अलग-अलग सैन्य अभियानों में इस्तेमाल किया गया है। हालिया हमलों में B-1 बॉम्बर के जरिए ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) से जुड़े ठिकानों को निशाना बनाए जाने की खबर सामने आई है।
ईरान के खिलाफ उतारा गया B-1 बॉम्बर
अमेरिकी सेना ने हालिया संघर्ष में पहली बार B-1 लॉन्ग-रेंज बॉम्बर का इस्तेमाल करते हुए ईरान में IRGC से जुड़े ठिकानों पर हमला किया। रिपोर्ट के अनुसार, यह मिशन ब्रिटेन के एक एयरबेस से शुरू हुआ था। B-1 अपनी तेज रफ्तार और बड़ी मात्रा में हथियार ले जाने की क्षमता के लिए जाना जाता है।
B-2 ने भी किए ईरान पर हमले
इससे पहले अमेरिका के B-2 Spirit स्टेल्थ बॉम्बर्स का भी ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई में इस्तेमाल किया गया था। अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने मार्च 2026 में हुए हमलों में B-2 विमानों की भागीदारी की पुष्टि की थी। ये विमान लंबी दूरी तक उड़ान भरने और अत्यधिक सुरक्षित ठिकानों को निशाना बनाने के लिए डिजाइन किए गए हैं।
क्यों खास हैं अमेरिका के ये बॉम्बर्स?
B-1, B-2 और B-52 अमेरिकी वायुसेना की रणनीतिक बमवर्षक क्षमता का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। B-1 तेज गति और भारी हथियार क्षमता के लिए जाना जाता है, जबकि B-2 की स्टेल्थ तकनीक उसे रडार से बचने में मदद करती है। वहीं B-52 लंबी दूरी तक बड़ी मात्रा में हथियार लेकर उड़ान भर सकता है।
ऐसे अलग-अलग क्षमताओं वाले विमानों के इस्तेमाल से अमेरिका को विभिन्न प्रकार के सैन्य ठिकानों पर हमला करने के कई विकल्प मिल जाते हैं।
ईरान के एयर डिफेंस पर बढ़ा दबाव
लगातार हवाई हमलों से ईरान की वायु रक्षा प्रणाली पर दबाव बढ़ा है। हालांकि यह कहना कि ईरान का पूरा एयर डिफेंस पूरी तरह बेबस हो गया है, उपलब्ध रिपोर्टों के आधार पर सही नहीं होगा। ईरान अभी भी अमेरिकी सैन्य ठिकानों के खिलाफ हमले कर रहा है और रणनीतिक होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर अपने रुख पर कायम है।
फिर बढ़ा अमेरिका-ईरान संघर्ष
हाल के दिनों में अमेरिका और ईरान के बीच एक बार फिर हमलों का सिलसिला तेज हुआ है। जुलाई में ईरान से जुड़े हमलों के बाद अमेरिका ने भी ईरानी ठिकानों के खिलाफ नए सैन्य हमले किए। इससे पूरे पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ गया है।
होर्मुज जलडमरूमध्य बना बड़ा मुद्दा
इस पूरे संघर्ष में होर्मुज जलडमरूमध्य सबसे महत्वपूर्ण मुद्दों में से एक बना हुआ है। यह समुद्री रास्ता वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद अहम माना जाता है। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ने के साथ इस इलाके में सैन्य गतिविधियां भी बढ़ी हैं। बातचीत के जरिए तनाव कम करने की कोशिशें भी जारी हैं।
अमेरिका की ओर से शक्तिशाली बॉम्बर्स के इस्तेमाल से साफ है कि संघर्ष में सैन्य दबाव बढ़ाया जा रहा है। दूसरी तरफ ईरान भी पीछे हटता नजर नहीं आ रहा है। ऐसे में आने वाले दिनों में सैन्य कार्रवाई और कूटनीतिक बातचीत, दोनों पर दुनिया की नजर रहेगी।
फिलहाल स्थिति बेहद संवेदनशील बनी हुई है और किसी भी नए हमले से पश्चिम एशिया में तनाव और अधिक बढ़ सकता है।
Lucknow Desk: बिहार के मोकामा से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहाँ चुनाव प्रचार के दौरान हमला किया गया। इस घटना में जानी-मानी हस्ती दुलारचंद यादव की हत्या हो गई है और आरोप लगाया गया है कि इस घटना में पूर्व विधायक अनंत सिंह के समर्थकों की भूमिका है। यह घटना आगामी विधानसभा चुनाव के बीच हुई है, जिससे राज्य में कानून-व्यवस्था और चुनावी हिंसा पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। अनंत सिंह समेत 5 नामजद मोकामा में दुलारचंद यादव की हत्या मामले में JDU प्रत्याशी बाहुबली अनंत सिंह समेत पांच लोगों पर केस दर्ज कर ली गई है। मृत दुलारचंद यादव के पोते के दिए गए बयान पर अनंत सिंह, दो भतीजों रणवीर सिंह, कर्मवीर सिंह, करीबी छोटन सिंह और कंजय सिंह पर नामजद और कई अज्ञात के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया गया है। यानी दुलारचंद यादव के परिजनों और जन सुराज पार्टी के समर्थकों ने सीधे तौर पर JDU उम्मीदवार और बाहुबली नेता अनंत सिंह के समर्थकों पर हत्या का आरोप लगाया है। अनंत सिंह ने आरोपों को किया खारिज वहीं इस बयान पर JDU उम्मीदवार अनंत सिंह ने इन आरोपों को खारिज करते हुए इसे RJD उम्मीदवार वीणा देवी के पति बाहुबली सूरजभान सिंह की साजिश बताया है। अनंत सिंह ने कहा कि उनके काफिले पर विरोधियों ने हमला किया और यह सारा खेल सूरजभान सिंह करवा रहे हैं। कौन थे दुलारचंद यादव ? मोकामा के रहने वाले दुलारचंद यादव को ‘टाल का बादशाह’ कहा जाता था। दुलारचंद पहलवानी के साथ-साथ गाना गाने के भी शौकीन थे। उन्होंने जन सुराज के उम्मीदवार पीयूष प्रियदर्शी के लिए एक गाना भी रिकॉर्ड करवाया था। माना जा रहा है कि मोकामा की चुनावी जंग अब व्यक्तिगत रंजिश और हिंसक टकराव की तरफ मुड़ गई है।
बॉलीवुड के शहंशाह अमिताभ बच्चन एक बार फिर दादा होने का गर्व महसूस कर रहे हैं। दरअसल, उनके नाती अगस्त्य नंदा की अपकमिंग फिल्म ‘इक्कीस’ का ट्रेलर हाल ही में रिलीज़ हुआ है। ट्रेलर देखकर बिग बी इतने इमोशनल हो गए कि उन्होंने सोशल मीडिया पर एक दिल छू लेने वाला पोस्ट शेयर किया। अमिताभ ने अपने पोस्ट में लिखा, “ये तो बस शुरुआत है... गर्व है तुम्हारे इस सफर पर, मेरे बच्चे।” उनकी इस पोस्ट पर फैन्स और फिल्म इंडस्ट्री के सितारों ने जमकर प्यार लुटाया। ‘इक्कीस’ मेगास्टार मेघना गुलज़ार के निर्देशन में बनी है और इसमें अगस्त्य नंदा एक अहम किरदार निभा रहे हैं। फिल्म 1971 के युद्ध के हीरो अरुण खेत्रपाल की कहानी पर आधारित है, जो देश के सबसे युवा परमवीर चक्र विजेता थे। फिल्म के ट्रेलर में अगस्त्य का जोश और समर्पण देखकर फैन्स कह रहे हैं—“दादा की तरह नाती भी लाजवाब!” तो देखना दिलचस्प होगा कि क्या अगस्त्य अपनी पहली ही फिल्म से दादा अमिताभ की विरासत को आगे बढ़ा पाएंगे।
Lucknow Desk: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने आज बुधवार को भारतीय वायुसेना के लड़ाकू विमान राफेल में उड़ान भरकर इतिहास रच दिया है। इससे पहले राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू सुखोई-3 MKI लड़ाकू विमान में भी उड़ान भर चुकी हैं। राष्ट्रपति की इस उड़ान ने आज भारतीय वायुसेना के साथ-साथ पूरे देश को गौरव से भर दिया है। बता दें, भारत का राष्ट्रपति तीनों सेनाओं की कमांडर होता है और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर मौजूद हैं। अंबाला एयरफोर्स स्टेशन पहुंचीं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू आज सुबह अंबाला एयरबेस पहुंचीं, जहां वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल ए. पी. सिंह और वरिष्ठ अधिकारियों ने उनका स्वागत किया। बता दें, राष्ट्रपति का यह उड़ान न केवल साहसिक नेतृत्व शैली का प्रतीक है, बल्कि भारत की बढ़ती रक्षा क्षमता और 'आत्मनिर्भर भारत' के संकल्प को वैश्विक पटल पर मजबूती से प्रदर्शित करना भी है। फाइटर जेट में उड़ान भरने वाली दूसरी महिला राष्ट्रपति मुर्मू राष्ट्रपति मुर्मू ने फाइटर जेट की सवारी ये पहली बार नहीं की हैं। उन्होंने इससे पहले 8 अप्रैल 2023 को असम के तेजपुर एयरफोर्स स्टेशन से सुखोई-30 MKI फाइटर विमान में भी उड़ान भर चुकी हैं। वह फाइटर जेट उड़ाने वाली तीसरी राष्ट्रपति और दूसरी महिला राष्ट्राध्यक्ष बनी थीं। राष्ट्रपति मुर्मू ने से पहले पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम और प्रतिभा पाटिल ने भी सुखोई-30 MKI में उड़ान भरी थी। राफेल लड़ाकू विमान का क्या है इतिहास? बता दें, राफेल लड़ाकू विमान फ्रांसीसी कंपनी दसॉ एविएशन द्वारा निर्मित किया गया है। सितंबर 2020 में अंबाला एयरफोर्स स्टेशन पर भारतीय वायुसेना में औपचारिक रूप से शामिल किया गया था। अंबाला एयरबेस राफेल स्क्वाड्रन ‘गोल्डन एरोज' का मुख्य केंद्र है। इन विमानों का इस्तेमाल हाल ही में ‘ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान किया गया था, इसके माध्यम से आतंकवादी ठिकानों पर हमले कर अपनी ताकत को सैनियों ने दिखाया था।
Lucknow Desk: कैसरगंज के बीजेपी नेता और पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह के हेलीकॉप्टर को धान के खेत में अचानक उतारना पड़ा। जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। बताया जा रहा है कि तकनीकी खराबी आने के बाद पायलट ने सूझबूझ दिखाते हुए हेलीकॉप्टर को सुरक्षित उतारा, जहां हेलीकॉप्टर देखने के लिए ग्रामीण भी जुट गए। मिली जानकारी के मुताबिक, बृजभूषण शरण सिंह एक कार्यक्रम में शामिल होने जा रहे थे। उड़ान के कुछ ही मिनट बाद हेलीकॉप्टर में तकनीकी दिक्कत आने लगी। स्थिति को समझते हुए पायलट ने तुरंत इमरजेंसी लैंडिंग का फैसला लिया और नज़दीकी धान के खेत में हेलीकॉप्टर को सुरक्षित उतार दिया। घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी भी मौके पर पहुंच गए। हेलीकॉप्टर की जांच के लिए टेक्निकल टीम बुलाई गई है। फिलहाल राहत की बात यह है कि बृजभूषण शरण सिंह और हेलीकॉप्टर में मौजूद सभी लोग पूरी तरह सुरक्षित हैं। जांच के बाद ही तकनीकी खराबी की असली वजह पता चल पाएगी। इसी बीच पूर्व सांसद बृजभूषण सिंह ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी कर संदेश दिया। उन्होंने कहा, आज मेरा बिहार प्रदेश के अंदर संदेश व दिनारा विधानसभा क्षेत्र में चुनावी सभा का कार्यक्रम था। संदेश विधानसभा का कार्यक्रम करके मैं दिनारा विधानसभा के लिए हेलीकाप्टर से निकला था। अचानक मौसम खराब होने के कारण हेलीकाप्टर की सुरक्षित लैंडिंग एक खेत में करानी पड़ी। पायलट ने बड़ी सूझबूझ से लैंडिंग कराई। मैं, इस समय गाड़ी से पटना जा रहा हूं। किसी अफवाह में आने की जरूरत नहीं है। किसी प्रकार की कोई हानि नहीं हुई है। हम सभी पूर्णतया सुरक्षित हैं। हेलीकाप्टर की सुरक्षा का प्रबंध कर दिया गया है। प्रशासन व जनता का बहुत सहयोग रहा...धन्यवाद
Lucknow Desk: आज 02 नवंबर 2025 को बॉलीवुड के बादशाह Shahrukh Khan ने अपने 60वें जन्मदिन का जश्न मनाया। इस मौके पर उन्होंने अपने परिवार, करीबियों और फिल्म इंडस्ट्री के दोस्तों के साथ खुशियाँ बाँटी। उन्होंने अपने आलीशान घर के बजाय इस बार सार्वजनिक रूप से Mannat से बाहर नहीं दिखने का फैसला किया क्योंकि वहाँ फिलहाल निर्माण का काम चल रहा है। वहीँ, जश्न के लिए उन्होंने Alibaug में स्थित निजी स्थान चुना। एक विशेष फैन-मीट कार्यक्रम Balgandharva Rangmandir, बांद्रा में आयोजित किया गया था, जहाँ सीमित प्रवेश पास के माध्यम से प्रशंसक सीधे शामिल हुए। सोशल मीडिया पर सितारों ने बधाइयाँ दीं। जिसमें Farah Khan ने लिखा, “Happy birthday KING … rule for another 100 years”। बता दें कि Shahrukh Khan के जन्मदिन के मौके पर सिर्फ भारत भर से ही नहीं बल्कि विदेशों से भी फैंस जुटे। शाहरुख खान के फैन क्लबों ने जन्मदिन सप्ताह के रूप में मनाया, चैरिटी ड्राइव, विशेष बैनर आदि के माध्यम से ख़ास अंदाज़ से जश्न मनाया।
दुनियाभर में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच कच्चे तेल की कीमत में तेज उछाल देखने को मिला है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत कुछ समय के लिए 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई। हालांकि, 24 जुलाई 2026 को शुरुआती कारोबार में कीमत थोड़ी नीचे भी आई, लेकिन यह अब भी लगभग 99 से 100 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बनी हुई है। अमेरिकी बेंचमार्क वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट यानी WTI का भाव लगभग 91 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार करता दिखाई दिया। तेल की कीमत में यह बढ़ोतरी केवल मांग बढ़ने के कारण नहीं हुई है। इसके पीछे पश्चिम एशिया में जारी तनाव और समुद्री मार्गों से तेल की सप्लाई बाधित होने का डर प्रमुख कारण बताया जा रहा है। लाल सागर में तेल टैंकरों पर हमले रिपोर्टों के अनुसार, लाल सागर में सऊदी अरब के दो तेल टैंकरों पर हमले के बाद वैश्विक बाजार में चिंता बढ़ गई है। इन हमलों के कारण व्यापारियों को डर है कि तेल ले जाने वाले जहाजों की आवाजाही प्रभावित हो सकती है। लाल सागर और बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य वैश्विक व्यापार के लिए बेहद महत्वपूर्ण समुद्री रास्ते हैं। यदि इन मार्गों पर खतरा बढ़ता है, तो तेल टैंकरों को अफ्रीका के चारों ओर से लंबा रास्ता अपनाना पड़ सकता है। इससे यात्रा का समय, बीमा खर्च और माल ढुलाई की लागत काफी बढ़ जाएगी। इसका सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ सकता है। होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर भी चिंता तेल बाजार पहले से ही होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यवधान की आशंका का सामना कर रहा है। यह मार्ग पश्चिम एशिया से दुनिया के विभिन्न हिस्सों में कच्चा तेल पहुंचाने के सबसे महत्वपूर्ण रास्तों में शामिल है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण इस रास्ते से गुजरने वाले जहाजों की सुरक्षा को लेकर चिंता बनी हुई है। अब लाल सागर के रास्ते पर भी खतरा बढ़ने से बाजार को दो महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों पर सप्लाई बाधित होने का डर सता रहा है। इसी आशंका ने ब्रेंट क्रूड को दो महीने में पहली बार 100 डॉलर के स्तर के ऊपर पहुंचा दिया। भारत पर क्या होगा असर? भारत अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है। इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमत बढ़ने से भारत का आयात खर्च बढ़ सकता है। तेल खरीदने के लिए ज्यादा डॉलर खर्च होने पर देश के व्यापार घाटे और रुपये पर भी दबाव पड़ सकता है। यदि कच्चे तेल की ऊंची कीमत लंबे समय तक बनी रहती है, तो पेट्रोलियम कंपनियों की लागत बढ़ सकती है। इसका प्रभाव पेट्रोल, डीजल, रसोई गैस और विमान ईंधन की कीमतों पर दिखाई दे सकता है। हालांकि, पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतें बढ़ेंगी या नहीं, इसका फैसला सरकार, तेल कंपनियों, टैक्स और अंतरराष्ट्रीय बाजार की स्थिति पर निर्भर करेगा। महंगाई बढ़ने का खतरा डीजल की कीमत बढ़ने पर ट्रक और अन्य मालवाहक वाहनों का खर्च बढ़ जाता है। इससे सब्जियों, फलों, दूध, अनाज और रोजमर्रा के सामान को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाना महंगा हो सकता है। कंपनियां बढ़ा हुआ परिवहन खर्च ग्राहकों से वसूल सकती हैं, जिससे बाजार में वस्तुओं की कीमत बढ़ने का खतरा रहता है। महंगा कच्चा तेल एयरलाइंस, प्लास्टिक, पेंट, केमिकल, सीमेंट और लॉजिस्टिक्स जैसे उद्योगों की लागत भी बढ़ा सकता है। वैश्विक स्तर पर तेल के 100 डॉलर तक पहुंचने से महंगाई दोबारा बढ़ने और आर्थिक विकास की गति धीमी होने की चिंता पैदा हो गई है। क्या कीमत 120 डॉलर तक जा सकती है? कुछ बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समुद्री रास्तों पर हमले जारी रहते हैं और तेल की सप्लाई में वास्तविक कमी आती है, तो ब्रेंट क्रूड की कीमत 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती है। हालांकि, यह केवल एक संभावना है। तनाव कम होने, समुद्री रास्ते सुरक्षित होने या अन्य देशों द्वारा उत्पादन बढ़ाने पर कीमतों में गिरावट भी आ सकती है। फिलहाल पूरी दुनिया की नजर पश्चिम एशिया की स्थिति और तेल टैंकरों की सुरक्षित आवाजाही पर बनी हुई है। आने वाले दिनों में कच्चे तेल की कीमतों की दिशा इन्हीं घटनाओं पर निर्भर करेगी।
अमेरिका ने वैश्विक सुरक्षा सहयोग को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए भारत सहित 60 से अधिक देशों को अगले सप्ताह आयोजित होने वाले विशेष सुरक्षा सम्मेलन में शामिल होने का निमंत्रण दिया है। इस सम्मेलन की मेजबानी अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो करेंगे। सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ते राजनीतिक और आतंकवादी खतरों पर चर्चा करना तथा सदस्य देशों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना है। आतंकवाद के बदलते स्वरूप पर होगी चर्चा अमेरिकी विदेश विभाग के अनुसार, सम्मेलन में उन चुनौतियों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा जिन्हें अमेरिका अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक हिंसा और सीमापार आतंकवाद के रूप में देख रहा है। बैठक में विभिन्न देशों के वरिष्ठ मंत्री और सुरक्षा अधिकारी शामिल होंगे तथा आतंकवादी गतिविधियों से निपटने के लिए साझा रणनीति तैयार करने पर विचार करेंगे। भारत की भागीदारी क्यों है अहम? भारत लंबे समय से सीमा पार आतंकवाद और चरमपंथ का सामना करता रहा है। ऐसे में इस सम्मेलन में भारत की भागीदारी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। भारत पहले भी आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक सहयोग, खुफिया जानकारी साझा करने और आतंकियों के वित्तीय नेटवर्क पर कार्रवाई की आवश्यकता पर जोर देता रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत अपने अनुभवों के आधार पर सम्मेलन में कई महत्वपूर्ण सुझाव रख सकता है, जिनसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आतंकवाद विरोधी प्रयासों को मजबूती मिल सकती है। कई देशों के बीच बढ़ेगा सुरक्षा सहयोग सम्मेलन में एशिया, यूरोप, अमेरिका और अन्य क्षेत्रों के 60 से अधिक देशों के प्रतिनिधियों के शामिल होने की संभावना है। बैठक के दौरान निम्नलिखित विषयों पर चर्चा हो सकती है— आतंकवादी संगठनों की नई रणनीतियां। देशों के बीच खुफिया जानकारी का आदान-प्रदान। ऑनलाइन कट्टरपंथ और डिजिटल प्लेटफॉर्म के दुरुपयोग को रोकना। आतंकवाद के लिए होने वाली फंडिंग पर रोक। वैश्विक सुरक्षा एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय। ट्रंप प्रशासन की नई सुरक्षा प्राथमिकता यह सम्मेलन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन की नई आतंकवाद-रोधी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि बदलते वैश्विक हालात में राजनीतिक हिंसा और आतंकवाद के नए स्वरूपों से निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग पहले से अधिक आवश्यक हो गया है। इसी उद्देश्य से यह उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की जा रही है। कुछ सहयोगी देशों ने जताई अलग राय हालांकि, इस पहल को लेकर सभी देशों की राय एक जैसी नहीं है। कुछ यूरोपीय अधिकारियों और स्वतंत्र सुरक्षा विशेषज्ञों ने सम्मेलन के मुख्य फोकस और खतरे के आकलन पर अलग दृष्टिकोण व्यक्त किया है। उनका मानना है कि विभिन्न क्षेत्रों में सुरक्षा चुनौतियों की प्रकृति अलग-अलग है और उन्हें व्यापक संदर्भ में देखने की आवश्यकता है। वैश्विक सुरक्षा के लिए अहम बैठक विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा समय में आतंकवाद और राजनीतिक हिंसा जैसी चुनौतियां किसी एक देश तक सीमित नहीं हैं। ऐसे में बहुपक्षीय सहयोग, सूचना साझा करना और संयुक्त रणनीति बनाना समय की आवश्यकता है। भारत की भागीदारी इस सम्मेलन को और अधिक महत्वपूर्ण बनाती है, क्योंकि वह लंबे समय से वैश्विक स्तर पर आतंकवाद के खिलाफ सख्त और समन्वित कार्रवाई की वकालत करता रहा है। आने वाले दिनों में इस सम्मेलन से जुड़े फैसलों पर दुनिया की नजर रहेगी।
ईरान ने फ्रांस और ब्रिटेन को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि दोनों देश होरमुज़ जलडमरूमध्य में अपनी सैन्य गतिविधियां बढ़ाते हैं, तो इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं। ईरान का कहना है कि खाड़ी क्षेत्र की सुरक्षा की जिम्मेदारी क्षेत्रीय देशों की है और बाहरी शक्तियों की सैन्य मौजूदगी से हालात और बिगड़ सकते हैं। होरमुज़ जलडमरूमध्य क्यों है अहम होरमुज़ जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्तों में शामिल है। इसी मार्ग से बड़ी मात्रा में तेल और गैस की आपूर्ति होती है। ऐसे में इस क्षेत्र में किसी भी तरह का तनाव वैश्विक ऊर्जा बाजार को प्रभावित कर सकता है। तेल की कीमतों में बढ़ोतरी और व्यापारिक जहाजों की आवाजाही पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। ईरान का सख्त बयान ईरानी अधिकारियों ने साफ कहा है कि विदेशी देशों की सैन्य तैनाती को उकसावे वाली कार्रवाई माना जाएगा। ईरान का आरोप है कि पश्चिमी देश क्षेत्र में दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं। तेहरान ने चेतावनी दी है कि अगर उसकी सुरक्षा को खतरा हुआ, तो वह चुप नहीं बैठेगा और जवाबी कदम उठाएगा। फ्रांस और ब्रिटेन की भूमिका फ्रांस और ब्रिटेन समुद्री सुरक्षा के नाम पर खाड़ी क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने की बात कर रहे हैं। दोनों देशों का कहना है कि उनका उद्देश्य व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। हालांकि ईरान इसे अपने खिलाफ सैन्य दबाव की रणनीति मान रहा है। बढ़ सकती है अंतरराष्ट्रीय चिंता विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बयानबाजी सैन्य टकराव में बदलती है, तो मध्य पूर्व में बड़ा संकट खड़ा हो सकता है। इसका असर केवल क्षेत्रीय राजनीति पर नहीं, बल्कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। बातचीत ही समाधान फिलहाल अंतरराष्ट्रीय समुदाय सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील कर रहा है। कूटनीतिक बातचीत के जरिए ही तनाव कम किया जा सकता है। ईरान, फ्रांस और ब्रिटेन के बीच बढ़ती तल्खी ने एक बार फिर खाड़ी क्षेत्र की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है।