31 जुलाई 2026 को स्पेन और मोरक्को की सीमा पर प्रवासी संकट गंभीर बना हुआ है। उत्तरी अफ्रीका में स्थित स्पेन के स्वायत्त क्षेत्र सेउटा में हजारों प्रवासियों के प्रवेश के बाद स्थानीय प्रशासन, सुरक्षा एजेंसियों और राहत सेवाओं पर भारी दबाव पड़ गया है। इस दौरान समुद्र में डूबने और सीमा के पास मची भगदड़ में कम से कम 18 लोगों की मौत होने की खबर है।
गुरुवार से शुरू हुआ बड़े पैमाने पर प्रवेश
प्रवासियों का बड़े पैमाने पर सेउटा में प्रवेश गुरुवार, 30 जुलाई 2026 को शुरू हुआ और रातभर जारी रहा। बड़ी संख्या में लोगों ने मोरक्को की ओर से सीमा अवरोधों को पार करने की कोशिश की। कई प्रवासी समुद्र में तैरकर ताराजाल समुद्र तट के रास्ते सेउटा पहुंचे। इनमें युवाओं के साथ महिलाएं, बच्चे और अकेले यात्रा कर रहे नाबालिग भी शामिल हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, आज 31 जुलाई को भी सीमा और आसपास के इलाकों में तनाव बना हुआ है। स्पेन और मोरक्को के सुरक्षाबल लोगों की आवाजाही को नियंत्रित करने तथा आगे होने वाले सामूहिक प्रवेश को रोकने का प्रयास कर रहे हैं।
समुद्र और भगदड़ में गई जान
अधिकारियों के अनुसार, अधिकतर मौतें हिंसक झड़पों में नहीं, बल्कि समुद्र में डूबने और ताराजाल समुद्र तट के पास मची भगदड़ के कारण हुई हैं। इसलिए इस घटना को केवल सुरक्षाबलों और प्रवासियों के बीच हुई हिंसा से जोड़ना सही नहीं होगा।
समुद्री रास्ते से सीमा पार करने वाले कई लोग तेज लहरों, थकान और तैरने के पर्याप्त साधन नहीं होने के कारण संकट में फंस गए। राहतकर्मियों ने समुद्र और समुद्र तट के आसपास बचाव अभियान चलाया।
सेउटा की व्यवस्थाओं पर बढ़ा दबाव
अचानक हजारों लोगों के पहुंचने से सेउटा के अस्थायी प्रवासी केंद्रों में जगह कम पड़ गई है। कई प्रवासियों को पार्कों और खुले स्थानों में रात बितानी पड़ी। स्थानीय प्रशासन के सामने लोगों को भोजन, पीने का पानी, चिकित्सा सहायता और सुरक्षित आवास उपलब्ध कराने की बड़ी चुनौती पैदा हो गई है।
सेउटा के क्षेत्रीय अध्यक्ष ने स्थिति को गंभीर मानवीय और सुरक्षा संकट बताते हुए स्पेन की केंद्र सरकार से अधिक सहायता मांगी है। उन्होंने राष्ट्रीय आपातस्थिति घोषित करने की मांग भी की है।
सेना और अतिरिक्त पुलिसकर्मी तैनात
स्थिति को नियंत्रित करने के लिए स्पेन ने अतिरिक्त पुलिसकर्मियों और सैनिकों को सेउटा भेजा है। सेना को सीमा सुरक्षा बलों और स्थानीय प्रशासन की सहायता के लिए तैनात किया गया है। स्पेन के प्रधानमंत्री पेद्रो सांचेज और गृह मंत्री फर्नांडो ग्रांदे-मारलास्का के भी प्रभावित क्षेत्र का दौरा करने की जानकारी सामने आई है।
स्पेन और मोरक्को के अधिकारी सीमा पर सुरक्षा बढ़ाने के साथ प्रवासियों की वापसी और कानूनी स्थिति की जांच करने की तैयारी कर रहे हैं। हालांकि शरण मांगने वाले लोगों और नाबालिगों के मामलों में अलग कानूनी प्रक्रियाएं अपनानी पड़ सकती हैं।
यूरोप पहुंचने का महत्वपूर्ण रास्ता है सेउटा
सेउटा उत्तरी अफ्रीका में स्थित स्पेन का स्वायत्त शहर है, जिसकी सीमा मोरक्को से लगती है। मेलिला और सेउटा यूरोपीय संघ की अफ्रीका के साथ लगने वाली दो जमीनी सीमाएं हैं। इसी कारण रोजगार, सुरक्षा और बेहतर जीवन की तलाश करने वाले प्रवासी इन क्षेत्रों के रास्ते यूरोप में प्रवेश करने की कोशिश करते हैं।
आज की यह घटना यूरोप की प्रवासन नीति, सीमा सुरक्षा और मानवीय सहायता व्यवस्था पर नए सवाल खड़े कर रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि केवल सीमा पर सुरक्षा बढ़ाना पर्याप्त नहीं होगा। प्रवासियों के लिए सुरक्षित कानूनी रास्ते, बेहतर समुद्री बचाव व्यवस्था और स्पेन-मोरक्को के बीच मजबूत सहयोग भी जरूरी होगा।
Lucknow Desk: बिहार के मोकामा से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहाँ चुनाव प्रचार के दौरान हमला किया गया। इस घटना में जानी-मानी हस्ती दुलारचंद यादव की हत्या हो गई है और आरोप लगाया गया है कि इस घटना में पूर्व विधायक अनंत सिंह के समर्थकों की भूमिका है। यह घटना आगामी विधानसभा चुनाव के बीच हुई है, जिससे राज्य में कानून-व्यवस्था और चुनावी हिंसा पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। अनंत सिंह समेत 5 नामजद मोकामा में दुलारचंद यादव की हत्या मामले में JDU प्रत्याशी बाहुबली अनंत सिंह समेत पांच लोगों पर केस दर्ज कर ली गई है। मृत दुलारचंद यादव के पोते के दिए गए बयान पर अनंत सिंह, दो भतीजों रणवीर सिंह, कर्मवीर सिंह, करीबी छोटन सिंह और कंजय सिंह पर नामजद और कई अज्ञात के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया गया है। यानी दुलारचंद यादव के परिजनों और जन सुराज पार्टी के समर्थकों ने सीधे तौर पर JDU उम्मीदवार और बाहुबली नेता अनंत सिंह के समर्थकों पर हत्या का आरोप लगाया है। अनंत सिंह ने आरोपों को किया खारिज वहीं इस बयान पर JDU उम्मीदवार अनंत सिंह ने इन आरोपों को खारिज करते हुए इसे RJD उम्मीदवार वीणा देवी के पति बाहुबली सूरजभान सिंह की साजिश बताया है। अनंत सिंह ने कहा कि उनके काफिले पर विरोधियों ने हमला किया और यह सारा खेल सूरजभान सिंह करवा रहे हैं। कौन थे दुलारचंद यादव ? मोकामा के रहने वाले दुलारचंद यादव को ‘टाल का बादशाह’ कहा जाता था। दुलारचंद पहलवानी के साथ-साथ गाना गाने के भी शौकीन थे। उन्होंने जन सुराज के उम्मीदवार पीयूष प्रियदर्शी के लिए एक गाना भी रिकॉर्ड करवाया था। माना जा रहा है कि मोकामा की चुनावी जंग अब व्यक्तिगत रंजिश और हिंसक टकराव की तरफ मुड़ गई है।
बॉलीवुड के शहंशाह अमिताभ बच्चन एक बार फिर दादा होने का गर्व महसूस कर रहे हैं। दरअसल, उनके नाती अगस्त्य नंदा की अपकमिंग फिल्म ‘इक्कीस’ का ट्रेलर हाल ही में रिलीज़ हुआ है। ट्रेलर देखकर बिग बी इतने इमोशनल हो गए कि उन्होंने सोशल मीडिया पर एक दिल छू लेने वाला पोस्ट शेयर किया। अमिताभ ने अपने पोस्ट में लिखा, “ये तो बस शुरुआत है... गर्व है तुम्हारे इस सफर पर, मेरे बच्चे।” उनकी इस पोस्ट पर फैन्स और फिल्म इंडस्ट्री के सितारों ने जमकर प्यार लुटाया। ‘इक्कीस’ मेगास्टार मेघना गुलज़ार के निर्देशन में बनी है और इसमें अगस्त्य नंदा एक अहम किरदार निभा रहे हैं। फिल्म 1971 के युद्ध के हीरो अरुण खेत्रपाल की कहानी पर आधारित है, जो देश के सबसे युवा परमवीर चक्र विजेता थे। फिल्म के ट्रेलर में अगस्त्य का जोश और समर्पण देखकर फैन्स कह रहे हैं—“दादा की तरह नाती भी लाजवाब!” तो देखना दिलचस्प होगा कि क्या अगस्त्य अपनी पहली ही फिल्म से दादा अमिताभ की विरासत को आगे बढ़ा पाएंगे।
Lucknow Desk: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने आज बुधवार को भारतीय वायुसेना के लड़ाकू विमान राफेल में उड़ान भरकर इतिहास रच दिया है। इससे पहले राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू सुखोई-3 MKI लड़ाकू विमान में भी उड़ान भर चुकी हैं। राष्ट्रपति की इस उड़ान ने आज भारतीय वायुसेना के साथ-साथ पूरे देश को गौरव से भर दिया है। बता दें, भारत का राष्ट्रपति तीनों सेनाओं की कमांडर होता है और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर मौजूद हैं। अंबाला एयरफोर्स स्टेशन पहुंचीं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू आज सुबह अंबाला एयरबेस पहुंचीं, जहां वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल ए. पी. सिंह और वरिष्ठ अधिकारियों ने उनका स्वागत किया। बता दें, राष्ट्रपति का यह उड़ान न केवल साहसिक नेतृत्व शैली का प्रतीक है, बल्कि भारत की बढ़ती रक्षा क्षमता और 'आत्मनिर्भर भारत' के संकल्प को वैश्विक पटल पर मजबूती से प्रदर्शित करना भी है। फाइटर जेट में उड़ान भरने वाली दूसरी महिला राष्ट्रपति मुर्मू राष्ट्रपति मुर्मू ने फाइटर जेट की सवारी ये पहली बार नहीं की हैं। उन्होंने इससे पहले 8 अप्रैल 2023 को असम के तेजपुर एयरफोर्स स्टेशन से सुखोई-30 MKI फाइटर विमान में भी उड़ान भर चुकी हैं। वह फाइटर जेट उड़ाने वाली तीसरी राष्ट्रपति और दूसरी महिला राष्ट्राध्यक्ष बनी थीं। राष्ट्रपति मुर्मू ने से पहले पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम और प्रतिभा पाटिल ने भी सुखोई-30 MKI में उड़ान भरी थी। राफेल लड़ाकू विमान का क्या है इतिहास? बता दें, राफेल लड़ाकू विमान फ्रांसीसी कंपनी दसॉ एविएशन द्वारा निर्मित किया गया है। सितंबर 2020 में अंबाला एयरफोर्स स्टेशन पर भारतीय वायुसेना में औपचारिक रूप से शामिल किया गया था। अंबाला एयरबेस राफेल स्क्वाड्रन ‘गोल्डन एरोज' का मुख्य केंद्र है। इन विमानों का इस्तेमाल हाल ही में ‘ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान किया गया था, इसके माध्यम से आतंकवादी ठिकानों पर हमले कर अपनी ताकत को सैनियों ने दिखाया था।
Lucknow Desk: कैसरगंज के बीजेपी नेता और पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह के हेलीकॉप्टर को धान के खेत में अचानक उतारना पड़ा। जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। बताया जा रहा है कि तकनीकी खराबी आने के बाद पायलट ने सूझबूझ दिखाते हुए हेलीकॉप्टर को सुरक्षित उतारा, जहां हेलीकॉप्टर देखने के लिए ग्रामीण भी जुट गए। मिली जानकारी के मुताबिक, बृजभूषण शरण सिंह एक कार्यक्रम में शामिल होने जा रहे थे। उड़ान के कुछ ही मिनट बाद हेलीकॉप्टर में तकनीकी दिक्कत आने लगी। स्थिति को समझते हुए पायलट ने तुरंत इमरजेंसी लैंडिंग का फैसला लिया और नज़दीकी धान के खेत में हेलीकॉप्टर को सुरक्षित उतार दिया। घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी भी मौके पर पहुंच गए। हेलीकॉप्टर की जांच के लिए टेक्निकल टीम बुलाई गई है। फिलहाल राहत की बात यह है कि बृजभूषण शरण सिंह और हेलीकॉप्टर में मौजूद सभी लोग पूरी तरह सुरक्षित हैं। जांच के बाद ही तकनीकी खराबी की असली वजह पता चल पाएगी। इसी बीच पूर्व सांसद बृजभूषण सिंह ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी कर संदेश दिया। उन्होंने कहा, आज मेरा बिहार प्रदेश के अंदर संदेश व दिनारा विधानसभा क्षेत्र में चुनावी सभा का कार्यक्रम था। संदेश विधानसभा का कार्यक्रम करके मैं दिनारा विधानसभा के लिए हेलीकाप्टर से निकला था। अचानक मौसम खराब होने के कारण हेलीकाप्टर की सुरक्षित लैंडिंग एक खेत में करानी पड़ी। पायलट ने बड़ी सूझबूझ से लैंडिंग कराई। मैं, इस समय गाड़ी से पटना जा रहा हूं। किसी अफवाह में आने की जरूरत नहीं है। किसी प्रकार की कोई हानि नहीं हुई है। हम सभी पूर्णतया सुरक्षित हैं। हेलीकाप्टर की सुरक्षा का प्रबंध कर दिया गया है। प्रशासन व जनता का बहुत सहयोग रहा...धन्यवाद
Lucknow Desk: आज 02 नवंबर 2025 को बॉलीवुड के बादशाह Shahrukh Khan ने अपने 60वें जन्मदिन का जश्न मनाया। इस मौके पर उन्होंने अपने परिवार, करीबियों और फिल्म इंडस्ट्री के दोस्तों के साथ खुशियाँ बाँटी। उन्होंने अपने आलीशान घर के बजाय इस बार सार्वजनिक रूप से Mannat से बाहर नहीं दिखने का फैसला किया क्योंकि वहाँ फिलहाल निर्माण का काम चल रहा है। वहीँ, जश्न के लिए उन्होंने Alibaug में स्थित निजी स्थान चुना। एक विशेष फैन-मीट कार्यक्रम Balgandharva Rangmandir, बांद्रा में आयोजित किया गया था, जहाँ सीमित प्रवेश पास के माध्यम से प्रशंसक सीधे शामिल हुए। सोशल मीडिया पर सितारों ने बधाइयाँ दीं। जिसमें Farah Khan ने लिखा, “Happy birthday KING … rule for another 100 years”। बता दें कि Shahrukh Khan के जन्मदिन के मौके पर सिर्फ भारत भर से ही नहीं बल्कि विदेशों से भी फैंस जुटे। शाहरुख खान के फैन क्लबों ने जन्मदिन सप्ताह के रूप में मनाया, चैरिटी ड्राइव, विशेष बैनर आदि के माध्यम से ख़ास अंदाज़ से जश्न मनाया।
ओमान के तट के पास एक तेल टैंकर पर अज्ञात प्रोजेक्टाइल से हमला किए जाने की खबर सामने आई है। इस घटना के बाद जहाज के इंजन रूम को नुकसान पहुंचा और टैंकर कुछ समय के लिए अपने नियंत्रण में नहीं रहा। हालांकि राहत की बात यह है कि इस घटना में किसी के घायल होने और समुद्र में तेल रिसाव की कोई सूचना नहीं मिली है। यूनाइटेड किंगडम मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस यानी UKMTO ने 1 अगस्त 2026 को इस घटना की जानकारी दी। संगठन के अनुसार हमला ओमान के लीमा क्षेत्र से लगभग 11 समुद्री मील उत्तर-पूर्व में हुआ। जहाज के चालक दल ने बताया कि एक अज्ञात वस्तु टैंकर से टकराई, जिससे इंजन रूम को नुकसान पहुंचा। जहाज हुआ ‘नॉट अंडर कमांड’ इंजन रूम क्षतिग्रस्त होने के बाद टैंकर को “नॉट अंडर कमांड” बताया गया। समुद्री भाषा में इसका अर्थ है कि तकनीकी खराबी या किसी अन्य कारण से जहाज सामान्य तरीके से अपनी दिशा और गति नियंत्रित नहीं कर पा रहा है। ऐसी स्थिति में आसपास से गुजरने वाले अन्य जहाजों को अतिरिक्त सावधानी बरतनी पड़ती है। UKMTO ने क्षेत्र में मौजूद जहाजों को सतर्क रहने और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत देने की सलाह दी है। चालक दल सुरक्षित, तेल रिसाव नहीं शुरुआती जानकारी के अनुसार जहाज पर मौजूद सभी कर्मचारी सुरक्षित हैं। किसी की मौत या घायल होने की सूचना नहीं है। इसके साथ ही समुद्र में तेल या अन्य हानिकारक पदार्थ के रिसाव की भी खबर नहीं मिली है। यह जानकारी महत्वपूर्ण है क्योंकि तेल टैंकर को नुकसान पहुंचने पर समुद्री प्रदूषण का बड़ा खतरा पैदा हो सकता है। फिलहाल अधिकारी जहाज की स्थिति और हुए नुकसान का आकलन कर रहे हैं। दूसरा समुद्री घटनाक्रम भी सामने आया इस घटना के कुछ समय बाद UKMTO को ओमान के खासाब क्षेत्र से लगभग 21 समुद्री मील उत्तर-पूर्व में दूसरी समुद्री घटना की सूचना मिली। दूसरे टैंकर के कप्तान ने जहाज के पास समुद्र में एक बड़ा पानी का उछाल और विस्फोट देखने की जानकारी दी। हालांकि दूसरी घटना में जहाज को किसी तरह का नुकसान नहीं पहुंचा। दोनों घटनाओं के बीच संबंध है या नहीं, इसकी पुष्टि नहीं हुई है। अधिकारी घटनाओं की जांच कर रहे हैं। सामरिक रूप से महत्वपूर्ण है यह समुद्री इलाका लीमा और खासाब ओमान के मुसंदम प्रायद्वीप में स्थित हैं। यह क्षेत्र होर्मुज जलडमरूमध्य के प्रवेश द्वार के पास पड़ता है। होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है। दुनिया में इस्तेमाल होने वाले कुल तेल का लगभग पांचवां हिस्सा इसी मार्ग से होकर गुजरता है। इसलिए यहां किसी जहाज पर हमला या समुद्री यातायात में बाधा वैश्विक तेल आपूर्ति और कीमतों को प्रभावित कर सकती है। हाल के सप्ताहों में बढ़े समुद्री सुरक्षा खतरे होर्मुज जलडमरूमध्य और ओमान के आसपास के समुद्री क्षेत्र में हाल के सप्ताहों के दौरान कई सुरक्षा घटनाएं सामने आई हैं। अलग-अलग जहाजों ने अज्ञात प्रोजेक्टाइल, विस्फोट और संदिग्ध गतिविधियों की शिकायत की है। क्षेत्रीय तनाव बढ़ने के कारण कई जहाज मालिकों और शिपिंग कंपनियों ने अतिरिक्त सुरक्षा उपाय अपनाए हैं। कुछ कंपनियां अपने जहाजों का मार्ग बदल रही हैं, जबकि चालक दल को सतर्क रहने और सुरक्षा एजेंसियों के संपर्क में रहने के निर्देश दिए जा रहे हैं। हमले के पीछे कौन, अभी स्पष्ट नहीं अभी तक यह स्पष्ट नहीं हुआ है कि टैंकर पर हमला किसने और किस प्रकार के हथियार से किया। UKMTO ने केवल इसे अज्ञात प्रोजेक्टाइल बताया है। किसी देश या संगठन ने इस घटना की जिम्मेदारी नहीं ली है। अधिकारियों द्वारा जहाज से जानकारी एकत्र की जा रही है। टैंकर के इंजन रूम को हुए नुकसान, प्रोजेक्टाइल की प्रकृति और घटना के संभावित कारणों की जांच के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी। कुल मिलाकर ओमान के पास हुई इस घटना ने होर्मुज जलडमरूमध्य की समुद्री सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। फिलहाल चालक दल सुरक्षित है और किसी पर्यावरणीय नुकसान की सूचना नहीं है, लेकिन जहाजों को इस क्षेत्र से गुजरते समय विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।
अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव लगातार गंभीर होता जा रहा है। अमेरिकी सेना ने ईरान के खिलाफ अपने सबसे शक्तिशाली रणनीतिक बमवर्षक विमानों का इस्तेमाल किया है। रिपोर्टों के मुताबिक, B-1, B-2 और B-52 जैसे खतरनाक बॉम्बर्स को अलग-अलग सैन्य अभियानों में इस्तेमाल किया गया है। हालिया हमलों में B-1 बॉम्बर के जरिए ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) से जुड़े ठिकानों को निशाना बनाए जाने की खबर सामने आई है। ईरान के खिलाफ उतारा गया B-1 बॉम्बर अमेरिकी सेना ने हालिया संघर्ष में पहली बार B-1 लॉन्ग-रेंज बॉम्बर का इस्तेमाल करते हुए ईरान में IRGC से जुड़े ठिकानों पर हमला किया। रिपोर्ट के अनुसार, यह मिशन ब्रिटेन के एक एयरबेस से शुरू हुआ था। B-1 अपनी तेज रफ्तार और बड़ी मात्रा में हथियार ले जाने की क्षमता के लिए जाना जाता है। B-2 ने भी किए ईरान पर हमले इससे पहले अमेरिका के B-2 Spirit स्टेल्थ बॉम्बर्स का भी ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई में इस्तेमाल किया गया था। अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने मार्च 2026 में हुए हमलों में B-2 विमानों की भागीदारी की पुष्टि की थी। ये विमान लंबी दूरी तक उड़ान भरने और अत्यधिक सुरक्षित ठिकानों को निशाना बनाने के लिए डिजाइन किए गए हैं। क्यों खास हैं अमेरिका के ये बॉम्बर्स? B-1, B-2 और B-52 अमेरिकी वायुसेना की रणनीतिक बमवर्षक क्षमता का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। B-1 तेज गति और भारी हथियार क्षमता के लिए जाना जाता है, जबकि B-2 की स्टेल्थ तकनीक उसे रडार से बचने में मदद करती है। वहीं B-52 लंबी दूरी तक बड़ी मात्रा में हथियार लेकर उड़ान भर सकता है। ऐसे अलग-अलग क्षमताओं वाले विमानों के इस्तेमाल से अमेरिका को विभिन्न प्रकार के सैन्य ठिकानों पर हमला करने के कई विकल्प मिल जाते हैं। ईरान के एयर डिफेंस पर बढ़ा दबाव लगातार हवाई हमलों से ईरान की वायु रक्षा प्रणाली पर दबाव बढ़ा है। हालांकि यह कहना कि ईरान का पूरा एयर डिफेंस पूरी तरह बेबस हो गया है, उपलब्ध रिपोर्टों के आधार पर सही नहीं होगा। ईरान अभी भी अमेरिकी सैन्य ठिकानों के खिलाफ हमले कर रहा है और रणनीतिक होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर अपने रुख पर कायम है। फिर बढ़ा अमेरिका-ईरान संघर्ष हाल के दिनों में अमेरिका और ईरान के बीच एक बार फिर हमलों का सिलसिला तेज हुआ है। जुलाई में ईरान से जुड़े हमलों के बाद अमेरिका ने भी ईरानी ठिकानों के खिलाफ नए सैन्य हमले किए। इससे पूरे पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ गया है। होर्मुज जलडमरूमध्य बना बड़ा मुद्दा इस पूरे संघर्ष में होर्मुज जलडमरूमध्य सबसे महत्वपूर्ण मुद्दों में से एक बना हुआ है। यह समुद्री रास्ता वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद अहम माना जाता है। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ने के साथ इस इलाके में सैन्य गतिविधियां भी बढ़ी हैं। बातचीत के जरिए तनाव कम करने की कोशिशें भी जारी हैं। अमेरिका की ओर से शक्तिशाली बॉम्बर्स के इस्तेमाल से साफ है कि संघर्ष में सैन्य दबाव बढ़ाया जा रहा है। दूसरी तरफ ईरान भी पीछे हटता नजर नहीं आ रहा है। ऐसे में आने वाले दिनों में सैन्य कार्रवाई और कूटनीतिक बातचीत, दोनों पर दुनिया की नजर रहेगी। फिलहाल स्थिति बेहद संवेदनशील बनी हुई है और किसी भी नए हमले से पश्चिम एशिया में तनाव और अधिक बढ़ सकता है।
मध्य पूर्व में एक बार फिर तनाव चरम पर पहुंच गया है। अमेरिका द्वारा ईरान समर्थित ठिकानों पर किए गए हमलों के बाद दुनिया की नजरें अब होर्मुज जलडमरूमध्य पर टिक गई हैं। यह समुद्री मार्ग वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति की जीवनरेखा माना जाता है और यदि यहां किसी भी प्रकार का सैन्य टकराव या अवरोध पैदा होता है, तो इसका असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। इसी वजह से अंतरराष्ट्रीय समुदाय ईरान की अगली रणनीति को लेकर चिंतित है। क्यों महत्वपूर्ण है होर्मुज जलडमरूमध्य? होर्मुज जलडमरूमध्य फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है। दुनिया के कुल समुद्री तेल व्यापार का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा इसी रास्ते से होकर गुजरता है। इसके अलावा तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) की बड़ी मात्रा भी इसी मार्ग से वैश्विक बाजारों तक पहुंचती है। ऐसे में यदि यह रास्ता बाधित होता है, तो तेल और गैस की कीमतों में भारी उछाल आ सकता है, जिसका असर भारत सहित कई देशों पर पड़ेगा। अमेरिकी हमले के बाद ईरान के सामने विकल्प विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका की सैन्य कार्रवाई के बाद ईरान के सामने कई रणनीतिक विकल्प मौजूद हैं। ईरान सीधे युद्ध में उतरने के बजाय अपने नौसैनिक बलों की गतिविधियां बढ़ा सकता है, क्षेत्र में सैन्य अभ्यास कर सकता है या फिर अपने सहयोगी समूहों के माध्यम से दबाव बनाने की कोशिश कर सकता है। हालांकि ईरान लंबे समय से यह कहता रहा है कि यदि उसके राष्ट्रीय हितों को नुकसान पहुंचाया गया तो वह होर्मुज जलडमरूमध्य में आवाजाही को प्रभावित करने जैसे कदम उठा सकता है। फिर भी ऐसा कोई भी कदम उसके लिए भी आर्थिक और कूटनीतिक जोखिम लेकर आएगा, क्योंकि उसके अपने निर्यात पर भी इसका असर पड़ सकता है। वैश्विक बाजारों की बढ़ी चिंता तनाव बढ़ने के साथ ही अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखा गया है। निवेशकों को आशंका है कि यदि स्थिति और बिगड़ती है तो ऊर्जा आपूर्ति बाधित हो सकती है। कई देशों ने अपने रणनीतिक तेल भंडार और वैकल्पिक आपूर्ति मार्गों की समीक्षा शुरू कर दी है। समुद्री सुरक्षा से जुड़ी एजेंसियां भी इस क्षेत्र में जहाजों की आवाजाही पर कड़ी नजर बनाए हुए हैं। कई शिपिंग कंपनियां अपने जहाजों के लिए अतिरिक्त सुरक्षा उपाय अपनाने पर विचार कर रही हैं। भारत पर क्या हो सकता है असर? भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से आयात करता है। यदि होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव बढ़ता है तो कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आ सकती है, जिससे पेट्रोल-डीजल, परिवहन लागत और महंगाई पर असर पड़ सकता है। साथ ही भारतीय व्यापारिक जहाजों और इस क्षेत्र में काम कर रहे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा भी महत्वपूर्ण मुद्दा बन सकती है। क्या टल सकता है बड़ा संकट? अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों का मानना है कि फिलहाल सभी पक्ष पूर्ण युद्ध से बचना चाहते हैं। अमेरिका और उसके सहयोगी क्षेत्र में सुरक्षा बनाए रखने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि कई देश कूटनीतिक समाधान पर जोर दे रहे हैं। यदि बातचीत के रास्ते खुले रहते हैं तो बड़े सैन्य संघर्ष की संभावना कम हो सकती है। होर्मुज जलडमरूमध्य केवल एक समुद्री मार्ग नहीं, बल्कि वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा का सबसे महत्वपूर्ण केंद्र है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने इसे फिर से अंतरराष्ट्रीय राजनीति का केंद्र बना दिया है। आने वाले दिनों में ईरान की रणनीति, अमेरिकी प्रतिक्रिया और कूटनीतिक प्रयास तय करेंगे कि यह क्षेत्र केवल तनाव का केंद्र बना रहेगा या वास्तव में नया रणक्षेत्र बन जाएगा। फिलहाल पूरी दुनिया की नजरें इसी संवेदनशील जलमार्ग पर टिकी हुई हैं।