दिल्ली में संसद की ओर मार्च कर रहे प्रदर्शनकारियों को पुलिस ने आगे बढ़ने से रोक दिया। प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में लोग संसद की ओर जाने की कोशिश कर रहे थे, जिसके बाद पुलिस ने कई जगह बैरिकेडिंग लगाकर रास्ता बंद कर दिया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच तनावपूर्ण स्थिति पैदा हो गई।
रिपोर्टों के अनुसार, हालात को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने 70 लोगों को हिरासत में लिया। झड़प और धक्का-मुक्की के दौरान पुलिसकर्मियों और प्रदर्शनकारियों के घायल होने की भी खबर सामने आई है। घटना के बाद इलाके में सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी गई।
प्रदर्शन के कारण बढ़ा तनाव
प्रदर्शनकारी अपनी मांगों को लेकर संसद की ओर मार्च करना चाहते थे। बड़ी संख्या में लोगों के एक साथ आगे बढ़ने के कारण पुलिस ने उन्हें निर्धारित क्षेत्र से आगे जाने की अनुमति नहीं दी। जब कुछ प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेडिंग पार करने की कोशिश की, तब पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच धक्का-मुक्की की स्थिति बन गई।
कुछ समय के लिए माहौल काफी तनावपूर्ण रहा। पुलिस ने भीड़ को पीछे हटाने और स्थिति को नियंत्रित करने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किया। इसके बाद कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया।
70 लोगों को हिरासत में लिया गया
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, पुलिस ने प्रदर्शन के दौरान 70 लोगों को हिरासत में लिया। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने और संसद क्षेत्र की सुरक्षा को देखते हुए यह कार्रवाई की गई।
संसद और उसके आसपास का इलाका सुरक्षा की दृष्टि से बेहद संवेदनशील माना जाता है। इसी कारण बिना अनुमति बड़ी संख्या में लोगों को संसद की ओर बढ़ने से रोक दिया गया। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों से शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने की अपील भी की।
पुलिसकर्मी और प्रदर्शनकारी हुए घायल
प्रदर्शन के दौरान हुई झड़प में कई पुलिसकर्मियों और प्रदर्शनकारियों के घायल होने की सूचना है। हालांकि घायलों की संख्या को लेकर अलग-अलग रिपोर्टों में अलग दावे सामने आए हैं।
घायल लोगों को इलाज के लिए अस्पताल और नजदीकी चिकित्सा केंद्रों में भेजा गया। घटना के बाद पुलिस ने प्रदर्शन स्थल और आसपास के क्षेत्रों में निगरानी बढ़ा दी। किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति से बचने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा बलों को भी तैनात किया गया।
दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था की गई मजबूत
संसद मार्च को देखते हुए दिल्ली पुलिस पहले से ही सतर्क थी। प्रमुख सड़कों, सरकारी इमारतों और संसद की ओर जाने वाले रास्तों पर सुरक्षा बढ़ा दी गई थी। कई जगह बैरिकेडिंग और पुलिस की अतिरिक्त तैनाती की गई।
प्रदर्शन के कारण कुछ मार्गों पर यातायात भी प्रभावित हुआ। पुलिस ने लोगों से वैकल्पिक रास्तों का उपयोग करने और भीड़ वाले क्षेत्रों से बचने की सलाह दी।
घटना के बाद जांच और निगरानी जारी
प्रदर्शन के दौरान हुई झड़प और कथित हिंसा से जुड़े वीडियो और अन्य सबूतों की जांच की जा रही है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि तनाव किस वजह से बढ़ा और किन लोगों की भूमिका रही।
दिल्ली में संसद मार्च की इस घटना ने एक बार फिर विरोध प्रदर्शन, कानून-व्यवस्था और शांतिपूर्ण आंदोलन के अधिकार को लेकर बहस तेज कर दी है। प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह सुनिश्चित करना है कि लोग अपनी बात शांतिपूर्ण तरीके से रख सकें और साथ ही राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था भी बनी रहे।
Lucknow Desk: बिहार के मोकामा से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहाँ चुनाव प्रचार के दौरान हमला किया गया। इस घटना में जानी-मानी हस्ती दुलारचंद यादव की हत्या हो गई है और आरोप लगाया गया है कि इस घटना में पूर्व विधायक अनंत सिंह के समर्थकों की भूमिका है। यह घटना आगामी विधानसभा चुनाव के बीच हुई है, जिससे राज्य में कानून-व्यवस्था और चुनावी हिंसा पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। अनंत सिंह समेत 5 नामजद मोकामा में दुलारचंद यादव की हत्या मामले में JDU प्रत्याशी बाहुबली अनंत सिंह समेत पांच लोगों पर केस दर्ज कर ली गई है। मृत दुलारचंद यादव के पोते के दिए गए बयान पर अनंत सिंह, दो भतीजों रणवीर सिंह, कर्मवीर सिंह, करीबी छोटन सिंह और कंजय सिंह पर नामजद और कई अज्ञात के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया गया है। यानी दुलारचंद यादव के परिजनों और जन सुराज पार्टी के समर्थकों ने सीधे तौर पर JDU उम्मीदवार और बाहुबली नेता अनंत सिंह के समर्थकों पर हत्या का आरोप लगाया है। अनंत सिंह ने आरोपों को किया खारिज वहीं इस बयान पर JDU उम्मीदवार अनंत सिंह ने इन आरोपों को खारिज करते हुए इसे RJD उम्मीदवार वीणा देवी के पति बाहुबली सूरजभान सिंह की साजिश बताया है। अनंत सिंह ने कहा कि उनके काफिले पर विरोधियों ने हमला किया और यह सारा खेल सूरजभान सिंह करवा रहे हैं। कौन थे दुलारचंद यादव ? मोकामा के रहने वाले दुलारचंद यादव को ‘टाल का बादशाह’ कहा जाता था। दुलारचंद पहलवानी के साथ-साथ गाना गाने के भी शौकीन थे। उन्होंने जन सुराज के उम्मीदवार पीयूष प्रियदर्शी के लिए एक गाना भी रिकॉर्ड करवाया था। माना जा रहा है कि मोकामा की चुनावी जंग अब व्यक्तिगत रंजिश और हिंसक टकराव की तरफ मुड़ गई है।
बॉलीवुड के शहंशाह अमिताभ बच्चन एक बार फिर दादा होने का गर्व महसूस कर रहे हैं। दरअसल, उनके नाती अगस्त्य नंदा की अपकमिंग फिल्म ‘इक्कीस’ का ट्रेलर हाल ही में रिलीज़ हुआ है। ट्रेलर देखकर बिग बी इतने इमोशनल हो गए कि उन्होंने सोशल मीडिया पर एक दिल छू लेने वाला पोस्ट शेयर किया। अमिताभ ने अपने पोस्ट में लिखा, “ये तो बस शुरुआत है... गर्व है तुम्हारे इस सफर पर, मेरे बच्चे।” उनकी इस पोस्ट पर फैन्स और फिल्म इंडस्ट्री के सितारों ने जमकर प्यार लुटाया। ‘इक्कीस’ मेगास्टार मेघना गुलज़ार के निर्देशन में बनी है और इसमें अगस्त्य नंदा एक अहम किरदार निभा रहे हैं। फिल्म 1971 के युद्ध के हीरो अरुण खेत्रपाल की कहानी पर आधारित है, जो देश के सबसे युवा परमवीर चक्र विजेता थे। फिल्म के ट्रेलर में अगस्त्य का जोश और समर्पण देखकर फैन्स कह रहे हैं—“दादा की तरह नाती भी लाजवाब!” तो देखना दिलचस्प होगा कि क्या अगस्त्य अपनी पहली ही फिल्म से दादा अमिताभ की विरासत को आगे बढ़ा पाएंगे।
Lucknow Desk: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने आज बुधवार को भारतीय वायुसेना के लड़ाकू विमान राफेल में उड़ान भरकर इतिहास रच दिया है। इससे पहले राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू सुखोई-3 MKI लड़ाकू विमान में भी उड़ान भर चुकी हैं। राष्ट्रपति की इस उड़ान ने आज भारतीय वायुसेना के साथ-साथ पूरे देश को गौरव से भर दिया है। बता दें, भारत का राष्ट्रपति तीनों सेनाओं की कमांडर होता है और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर मौजूद हैं। अंबाला एयरफोर्स स्टेशन पहुंचीं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू आज सुबह अंबाला एयरबेस पहुंचीं, जहां वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल ए. पी. सिंह और वरिष्ठ अधिकारियों ने उनका स्वागत किया। बता दें, राष्ट्रपति का यह उड़ान न केवल साहसिक नेतृत्व शैली का प्रतीक है, बल्कि भारत की बढ़ती रक्षा क्षमता और 'आत्मनिर्भर भारत' के संकल्प को वैश्विक पटल पर मजबूती से प्रदर्शित करना भी है। फाइटर जेट में उड़ान भरने वाली दूसरी महिला राष्ट्रपति मुर्मू राष्ट्रपति मुर्मू ने फाइटर जेट की सवारी ये पहली बार नहीं की हैं। उन्होंने इससे पहले 8 अप्रैल 2023 को असम के तेजपुर एयरफोर्स स्टेशन से सुखोई-30 MKI फाइटर विमान में भी उड़ान भर चुकी हैं। वह फाइटर जेट उड़ाने वाली तीसरी राष्ट्रपति और दूसरी महिला राष्ट्राध्यक्ष बनी थीं। राष्ट्रपति मुर्मू ने से पहले पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम और प्रतिभा पाटिल ने भी सुखोई-30 MKI में उड़ान भरी थी। राफेल लड़ाकू विमान का क्या है इतिहास? बता दें, राफेल लड़ाकू विमान फ्रांसीसी कंपनी दसॉ एविएशन द्वारा निर्मित किया गया है। सितंबर 2020 में अंबाला एयरफोर्स स्टेशन पर भारतीय वायुसेना में औपचारिक रूप से शामिल किया गया था। अंबाला एयरबेस राफेल स्क्वाड्रन ‘गोल्डन एरोज' का मुख्य केंद्र है। इन विमानों का इस्तेमाल हाल ही में ‘ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान किया गया था, इसके माध्यम से आतंकवादी ठिकानों पर हमले कर अपनी ताकत को सैनियों ने दिखाया था।
Lucknow Desk: कैसरगंज के बीजेपी नेता और पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह के हेलीकॉप्टर को धान के खेत में अचानक उतारना पड़ा। जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। बताया जा रहा है कि तकनीकी खराबी आने के बाद पायलट ने सूझबूझ दिखाते हुए हेलीकॉप्टर को सुरक्षित उतारा, जहां हेलीकॉप्टर देखने के लिए ग्रामीण भी जुट गए। मिली जानकारी के मुताबिक, बृजभूषण शरण सिंह एक कार्यक्रम में शामिल होने जा रहे थे। उड़ान के कुछ ही मिनट बाद हेलीकॉप्टर में तकनीकी दिक्कत आने लगी। स्थिति को समझते हुए पायलट ने तुरंत इमरजेंसी लैंडिंग का फैसला लिया और नज़दीकी धान के खेत में हेलीकॉप्टर को सुरक्षित उतार दिया। घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी भी मौके पर पहुंच गए। हेलीकॉप्टर की जांच के लिए टेक्निकल टीम बुलाई गई है। फिलहाल राहत की बात यह है कि बृजभूषण शरण सिंह और हेलीकॉप्टर में मौजूद सभी लोग पूरी तरह सुरक्षित हैं। जांच के बाद ही तकनीकी खराबी की असली वजह पता चल पाएगी। इसी बीच पूर्व सांसद बृजभूषण सिंह ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी कर संदेश दिया। उन्होंने कहा, आज मेरा बिहार प्रदेश के अंदर संदेश व दिनारा विधानसभा क्षेत्र में चुनावी सभा का कार्यक्रम था। संदेश विधानसभा का कार्यक्रम करके मैं दिनारा विधानसभा के लिए हेलीकाप्टर से निकला था। अचानक मौसम खराब होने के कारण हेलीकाप्टर की सुरक्षित लैंडिंग एक खेत में करानी पड़ी। पायलट ने बड़ी सूझबूझ से लैंडिंग कराई। मैं, इस समय गाड़ी से पटना जा रहा हूं। किसी अफवाह में आने की जरूरत नहीं है। किसी प्रकार की कोई हानि नहीं हुई है। हम सभी पूर्णतया सुरक्षित हैं। हेलीकाप्टर की सुरक्षा का प्रबंध कर दिया गया है। प्रशासन व जनता का बहुत सहयोग रहा...धन्यवाद
Lucknow Desk: आज 02 नवंबर 2025 को बॉलीवुड के बादशाह Shahrukh Khan ने अपने 60वें जन्मदिन का जश्न मनाया। इस मौके पर उन्होंने अपने परिवार, करीबियों और फिल्म इंडस्ट्री के दोस्तों के साथ खुशियाँ बाँटी। उन्होंने अपने आलीशान घर के बजाय इस बार सार्वजनिक रूप से Mannat से बाहर नहीं दिखने का फैसला किया क्योंकि वहाँ फिलहाल निर्माण का काम चल रहा है। वहीँ, जश्न के लिए उन्होंने Alibaug में स्थित निजी स्थान चुना। एक विशेष फैन-मीट कार्यक्रम Balgandharva Rangmandir, बांद्रा में आयोजित किया गया था, जहाँ सीमित प्रवेश पास के माध्यम से प्रशंसक सीधे शामिल हुए। सोशल मीडिया पर सितारों ने बधाइयाँ दीं। जिसमें Farah Khan ने लिखा, “Happy birthday KING … rule for another 100 years”। बता दें कि Shahrukh Khan के जन्मदिन के मौके पर सिर्फ भारत भर से ही नहीं बल्कि विदेशों से भी फैंस जुटे। शाहरुख खान के फैन क्लबों ने जन्मदिन सप्ताह के रूप में मनाया, चैरिटी ड्राइव, विशेष बैनर आदि के माध्यम से ख़ास अंदाज़ से जश्न मनाया।
उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में शनिवार यानी 5 सितंबर 2026 को कलेक्ट्रेट परिसर में स्थित एक मस्जिद के खिलाफ प्रशासन ने ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की। प्रशासन के अनुसार, यह ढांचा सरकारी जमीन पर बना था और इसे अवैध कब्जे के रूप में माना गया था। कार्रवाई के दौरान कलेक्ट्रेट परिसर में भारी पुलिस बल और रैपिड एक्शन फोर्स की तैनाती की गई। परिसर के प्रवेश द्वारों को भी बंद रखा गया, ताकि किसी तरह की अप्रिय स्थिति उत्पन्न न हो। अदालत के फैसले के बाद हुई कार्रवाई मस्जिद को हटाने की कार्रवाई अचानक नहीं हुई। इससे पहले सिटी मजिस्ट्रेट की अदालत ने 16 जुलाई 2026 को मस्जिद को सरकारी भूमि पर अवैध निर्माण मानते हुए बेदखली का आदेश दिया था। इस आदेश को मस्जिद पक्ष ने जिला अदालत में चुनौती दी थी। जिला जज की अदालत ने भी मस्जिद पक्ष की अपील खारिज करते हुए सिटी मजिस्ट्रेट के आदेश को बरकरार रखा। जिला अदालत का फैसला 2 सितंबर 2026 को आया था। सरकारी जमीन को लेकर था विवाद इस पूरे मामले की मुख्य वजह जमीन के स्वामित्व को लेकर विवाद था। सरकारी पक्ष ने पुराने राजस्व रिकॉर्ड का हवाला देते हुए संबंधित जमीन को सरकारी बताया। दूसरी ओर, मस्जिद पक्ष की ओर से जमीन और मस्जिद के संबंध में अलग-अलग दावे तथा दस्तावेज अदालत के सामने रखे गए। सुनवाई के दौरान वक्फ संपत्ति और पूजा स्थल से जुड़े कानूनी प्रावधानों को लेकर भी दोनों पक्षों ने अपनी दलीलें पेश कीं। जिला अदालत ने अपील की खारिज जिला अदालत में मामले की सुनवाई कई तारीखों तक चली। मस्जिद पक्ष ने सिटी मजिस्ट्रेट के आदेश को चुनौती देते हुए अपील दाखिल की थी। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें और उपलब्ध दस्तावेज देखने के बाद सिटी मजिस्ट्रेट के आदेश को बरकरार रखा। इसके बाद प्रशासन के लिए मस्जिद को हटाने की कार्रवाई का रास्ता साफ हो गया। कलेक्ट्रेट परिसर में कड़ी सुरक्षा ध्वस्तीकरण की कार्रवाई के दौरान प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए। कलेक्ट्रेट परिसर के कई गेट बंद कर दिए गए और बाहरी लोगों के प्रवेश पर रोक रही। मौके पर बड़ी संख्या में पुलिस और अन्य सुरक्षा बल मौजूद रहे। प्रशासन का कहना था कि सुरक्षा व्यवस्था का उद्देश्य कानून-व्यवस्था बनाए रखना और किसी भी अप्रिय घटना को रोकना था। इकरा हसन को लेकर भी सामने आया विवाद कार्रवाई के बीच कैराना से समाजवादी पार्टी की सांसद इकरा हसन को लेकर भी मामला चर्चा में रहा। रिपोर्टों के अनुसार, उन्हें सहारनपुर जाने से पहले उनके आवास पर रोका गया। सांसद की ओर से इसे लेकर सवाल उठाए गए, जबकि प्रशासन की ओर से कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए एहतियाती कदम उठाए जाने की बात सामने आई। इस घटनाक्रम के बाद मामले को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी तेज हो गईं। कार्रवाई के बाद बढ़ी राजनीतिक हलचल सहारनपुर कलेक्ट्रेट की मस्जिद पर हुई कार्रवाई के बाद राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर बहस शुरू हो गई है। प्रशासन का पक्ष है कि कार्रवाई अदालत के आदेशों और सरकारी भूमि से जुड़े मामले में कानूनी प्रक्रिया के तहत की गई। वहीं, विपक्षी नेताओं और मस्जिद पक्ष की ओर से इस कार्रवाई को लेकर सवाल उठाए गए हैं। फिलहाल प्रशासन ने क्षेत्र में शांति और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत रखा है। सहारनपुर कलेक्ट्रेट मस्जिद विवाद में पहले सिटी मजिस्ट्रेट ने 16 जुलाई को आदेश दिया, इसके बाद मस्जिद पक्ष ने जिला अदालत का रुख किया। जिला अदालत ने भी अपील खारिज कर पहले के आदेश को बरकरार रखा। इसके बाद 5 सितंबर 2026 को प्रशासन ने कलेक्ट्रेट परिसर में ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की। इस पूरे घटनाक्रम ने सहारनपुर में एक पुराने भूमि विवाद को फिर से चर्चा में ला दिया है।
उत्तर प्रदेश के कौशांबी जिले में पटाखा फैक्टरी में हुए भीषण विस्फोट ने पूरे इलाके को दहला दिया। यह हादसा सोमवार, 31 अगस्त 2026 को पिपरी थाना क्षेत्र के मनौरी गांव में हुआ था। तेज धमाके में 11 लोगों की मौत हो गई, जिनमें आठ बच्चे शामिल हैं। हादसे में पांच लोग गंभीर रूप से घायल बताए गए हैं और उनका इलाज प्रयागराज के एसआरएन अस्पताल में चल रहा है। कई घरों को पहुंचा भारी नुकसान विस्फोट इतना शक्तिशाली था कि पटाखा फैक्टरी की इमारत के साथ आसपास के कई मकानों को भी नुकसान पहुंचा। अधिकारियों के अनुसार, फैक्टरी के आसपास स्थित पांच से छह मकान भी धमाके की चपेट में आकर क्षतिग्रस्त या ढह गए। घटना के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई और बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर पहुंच गए। मलबे में दबे लोगों की तलाश हादसे के बाद पुलिस, दमकल विभाग, एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमों ने बड़े स्तर पर राहत और बचाव अभियान चलाया। मलबा हटाने के लिए अर्थमूवर मशीनों का इस्तेमाल किया गया। अधिकारियों को आशंका थी कि कुछ लोग मलबे में फंसे हो सकते हैं, इसलिए देर तक बचाव अभियान जारी रहा। लाइसेंस रद्द होने के बाद भी चल रही थी फैक्टरी जांच में सामने आया कि फैक्टरी को वर्ष 2019 में विस्फोटक बनाने का लाइसेंस मिला था, लेकिन यह लाइसेंस 2024 में रद्द कर दिया गया था। इसके बावजूद फैक्टरी में काम जारी रहने की बात सामने आई है। प्रशासन अब यह पता लगाने में जुटा है कि लाइसेंस रद्द होने के बाद भी फैक्टरी कैसे चलती रही और इसके लिए जिम्मेदार कौन-कौन लोग हैं। मुख्य आरोपी मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार हादसे के बाद पुलिस ने फैक्टरी संचालक नौशाद की तलाश शुरू की। 1 सितंबर की सुबह पुलिस ने उसे चारवा क्षेत्र में मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार कर लिया। पुलिस के अनुसार, आरोपी ने भागने की कोशिश के दौरान टीम पर गोली चलाई, जिसके जवाब में पुलिस ने कार्रवाई की। उसके पैर में गोली लगी और उसे इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया। सरकार ने मुआवजे का ऐलान किया हादसे पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दुख जताया। प्रधानमंत्री ने मृतकों के परिजनों को प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष से 2 लाख रुपये और घायलों को 50 हजार रुपये की सहायता देने की घोषणा की। प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की बात कही है। कौशांबी की यह घटना अवैध और असुरक्षित तरीके से पटाखा निर्माण किए जाने के गंभीर खतरे को सामने लाती है। अब प्रशासन की जांच का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना है कि प्रतिबंध के बावजूद फैक्टरी कैसे संचालित हो रही थी और इस मामले में किन-किन स्तरों पर लापरवाही हुई।
भारत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में स्वदेशी क्षमता को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल सामने आई है। 28 अगस्त 2026 को नई दिल्ली में उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने ‘Gnani Artha’ नाम के एक Sovereign AI Stack को लॉन्च किया। इस पहल का उद्देश्य भारत में विकसित और भारत के नियंत्रण में रहने वाली AI तकनीक को बढ़ावा देना है। क्या है ‘Gnani Artha’? ‘Gnani Artha’ एक Sovereign AI Stack है, जिसे भारतीय AI कंपनी GNANI AI ने विकसित किया है। इस स्टैक में Evon 3.3 नाम का Large Language Model (LLM) और Plexus नाम का AI प्लेटफॉर्म शामिल है। इसका लक्ष्य संगठनों को AI आधारित सेवाओं और एप्लिकेशन के लिए एक स्वदेशी तकनीकी आधार उपलब्ध कराना है। क्यों भारत के लिए महत्वपूर्ण है यह पहल? आज AI तकनीक का इस्तेमाल बिजनेस, शिक्षा, स्वास्थ्य, बैंकिंग, सरकारी सेवाओं और ग्राहक सहायता जैसे कई क्षेत्रों में तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे समय में किसी देश के लिए अपनी AI क्षमताओं को विकसित करना रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है। Sovereign AI का मतलब ऐसी AI क्षमता से है, जिसके महत्वपूर्ण मॉडल, डेटा, कंप्यूटिंग और तकनीकी नियंत्रण देश के अपने सिस्टम और संस्थानों के भीतर रह सकें। भारतीय कंपनियों को मिल सकता है फायदा नई AI पहल से भारतीय कंपनियों और संस्थानों को अपनी जरूरत के अनुसार AI समाधान विकसित करने में मदद मिल सकती है। खासतौर पर ऐसे संगठन जिन्हें डेटा सुरक्षा, स्थानीय भाषाओं और भारत-केंद्रित AI मॉडल की आवश्यकता है, उनके लिए स्वदेशी AI ecosystem उपयोगी साबित हो सकता है। इस तरह के प्लेटफॉर्म से कंपनियों को विदेशी AI तकनीक पर पूरी तरह निर्भर रहने के बजाय स्थानीय विकल्प तलाशने का अवसर मिलेगा। इससे भारत में AI से जुड़े स्टार्टअप, डेवलपर्स और तकनीकी विशेषज्ञों के लिए भी नए अवसर पैदा हो सकते हैं। भारतीय भाषाओं पर भी जोर भारत की सबसे बड़ी तकनीकी चुनौतियों में से एक है अलग-अलग भारतीय भाषाओं और स्थानीय संदर्भों के लिए AI को उपयोगी बनाना। देश में सैकड़ों भाषाएं और बोलियां इस्तेमाल की जाती हैं। इसलिए भारतीय परिस्थितियों को समझने वाले AI मॉडल विकसित करना महत्वपूर्ण है। Sovereign AI ecosystem के विस्तार से भविष्य में भारतीय भाषाओं में बेहतर AI आधारित सेवाओं को विकसित करने में मदद मिल सकती है। इससे डिजिटल सेवाओं की पहुंच उन लोगों तक भी बढ़ सकती है जो अंग्रेजी के बजाय अपनी स्थानीय भाषा में तकनीक का इस्तेमाल करना पसंद करते हैं। उपराष्ट्रपति ने क्या कहा? लॉन्च कार्यक्रम के दौरान उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने भारत को केवल AI का consumer नहीं बल्कि AI का creator बनने की दिशा में आगे बढ़ने की आवश्यकता पर जोर दिया। उनके संदेश का मुख्य उद्देश्य देश में AI innovation, research और indigenous technology को बढ़ावा देना रहा। AI सेक्टर में बढ़ रही भारत की भूमिका भारत पिछले कुछ वर्षों में AI, cloud computing, semiconductor और digital infrastructure जैसे क्षेत्रों में अपनी क्षमताओं को मजबूत करने पर लगातार जोर दे रहा है। सरकारी पहलों के साथ-साथ भारतीय startups और technology companies भी AI products और platforms विकसित कर रही हैं। ‘Gnani Artha’ का लॉन्च इसी व्यापक प्रयास का हिस्सा माना जा रहा है। इसका प्रभाव आने वाले वर्षों में भारतीय AI ecosystem, businesses और public institutions पर देखने को मिल सकता है। Sovereign AI को सफल बनाने के लिए केवल AI model तैयार करना पर्याप्त नहीं होगा। इसके लिए बड़े स्तर पर computing infrastructure, high-quality भारतीय language data, skilled professionals, research और मजबूत cybersecurity की जरूरत होगी। ‘Gnani Artha’ का लॉन्च भारत की AI यात्रा में एक महत्वपूर्ण कदम है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि भारतीय कंपनियां और संस्थान इस तरह की स्वदेशी AI तकनीक को किस स्तर तक अपनाते हैं और इससे देश के डिजिटल ecosystem को कितना फायदा मिलता है। भारत में Sovereign AI को बढ़ावा, उपराष्ट्रपति ने लॉन्च किया ‘Gnani Artha’ AI Stack