उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने प्रदेश के ऐतिहासिक नगरों के नामों से जुड़े एक और अहम फैसले पर मुहर लगा दी है। शाहजहांपुर जिले के जलालाबाद नगर का नाम अब परशुरामपुरी होगा। योगी कैबिनेट की मंजूरी के बाद इस फैसले को औपचारिक रूप से लागू करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। सरकार का कहना है कि यह निर्णय क्षेत्र की ऐतिहासिक, धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को सम्मान देने के उद्देश्य से लिया गया है।
वर्षों से उठ रही थी नाम बदलने की मांग
जलालाबाद का नाम बदलकर परशुरामपुरी करने की मांग काफी समय से स्थानीय लोगों, सामाजिक संगठनों और विभिन्न धार्मिक संस्थाओं द्वारा उठाई जा रही थी। उनका कहना था कि इस क्षेत्र का संबंध भगवान परशुराम की आस्था और प्राचीन मान्यताओं से जुड़ा हुआ है। इसी आधार पर नगर पालिका ने भी प्रस्ताव पारित कर राज्य सरकार को भेजा था। सरकार ने सभी आवश्यक औपचारिकताओं को पूरा करने के बाद इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी।
सरकार ने बताया सांस्कृतिक विरासत को सम्मान
राज्य सरकार का कहना है कि प्रदेश की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहरों को उनकी वास्तविक पहचान दिलाना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। सरकार का मानना है कि जिन स्थानों का संबंध भारतीय संस्कृति और धार्मिक परंपराओं से रहा है, उन्हें उसी पहचान के साथ स्थापित किया जाना चाहिए। इसी सोच के तहत जलालाबाद का नाम बदलकर परशुरामपुरी किया गया है।
पर्यटन को भी मिलेगा बढ़ावा
सरकार को उम्मीद है कि नाम परिवर्तन के बाद क्षेत्र में धार्मिक पर्यटन को नई पहचान मिलेगी। भगवान परशुराम से जुड़े मंदिरों और धार्मिक स्थलों पर आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ सकती है। इससे स्थानीय व्यापार, होटल व्यवसाय, परिवहन और छोटे कारोबारियों को भी आर्थिक लाभ मिलने की संभावना जताई जा रही है।
विपक्ष ने उठाए सवाल
इस फैसले को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रिया भी सामने आई है। विपक्षी दलों ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि नाम बदलने की बजाय सरकार को रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी सुविधाओं जैसे मुद्दों पर अधिक ध्यान देना चाहिए। हालांकि सरकार ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि विकास कार्य और सांस्कृतिक संरक्षण दोनों समान रूप से जारी रहेंगे।
सरकारी रिकॉर्ड में होगा बदलाव
नाम परिवर्तन के बाद सभी सरकारी दस्तावेजों, राजस्व अभिलेखों, सड़क संकेतकों, नगर पालिका के रिकॉर्ड और अन्य प्रशासनिक दस्तावेजों में धीरे-धीरे परशुरामपुरी नाम दर्ज किया जाएगा। संबंधित विभागों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए जा रहे हैं ताकि पूरी प्रक्रिया समयबद्ध तरीके से पूरी हो सके और लोगों को किसी प्रकार की परेशानी न हो।
पहले भी बदले जा चुके हैं कई स्थानों के नाम
योगी सरकार के कार्यकाल में उत्तर प्रदेश के कई शहरों, रेलवे स्टेशनों और अन्य सार्वजनिक स्थानों के नाम बदले जा चुके हैं। सरकार का कहना है कि इन बदलावों का उद्देश्य ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को नई पहचान देना है। जलालाबाद का नाम बदलकर परशुरामपुरी करना भी इसी श्रृंखला का एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
जलालाबाद का नाम बदलकर परशुरामपुरी किए जाने का फैसला प्रदेश की राजनीति और प्रशासन दोनों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। समर्थक इसे भारतीय संस्कृति और आस्था का सम्मान बता रहे हैं, जबकि विपक्ष इसे राजनीतिक निर्णय करार दे रहा है। आने वाले दिनों में यह बदलाव सरकारी रिकॉर्ड, स्थानीय पहचान और पर्यटन गतिविधियों पर किस प्रकार प्रभाव डालता है, इस पर सभी की नजर रहेगी।
Lucknow Desk: बिहार के मोकामा से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहाँ चुनाव प्रचार के दौरान हमला किया गया। इस घटना में जानी-मानी हस्ती दुलारचंद यादव की हत्या हो गई है और आरोप लगाया गया है कि इस घटना में पूर्व विधायक अनंत सिंह के समर्थकों की भूमिका है। यह घटना आगामी विधानसभा चुनाव के बीच हुई है, जिससे राज्य में कानून-व्यवस्था और चुनावी हिंसा पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। अनंत सिंह समेत 5 नामजद मोकामा में दुलारचंद यादव की हत्या मामले में JDU प्रत्याशी बाहुबली अनंत सिंह समेत पांच लोगों पर केस दर्ज कर ली गई है। मृत दुलारचंद यादव के पोते के दिए गए बयान पर अनंत सिंह, दो भतीजों रणवीर सिंह, कर्मवीर सिंह, करीबी छोटन सिंह और कंजय सिंह पर नामजद और कई अज्ञात के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया गया है। यानी दुलारचंद यादव के परिजनों और जन सुराज पार्टी के समर्थकों ने सीधे तौर पर JDU उम्मीदवार और बाहुबली नेता अनंत सिंह के समर्थकों पर हत्या का आरोप लगाया है। अनंत सिंह ने आरोपों को किया खारिज वहीं इस बयान पर JDU उम्मीदवार अनंत सिंह ने इन आरोपों को खारिज करते हुए इसे RJD उम्मीदवार वीणा देवी के पति बाहुबली सूरजभान सिंह की साजिश बताया है। अनंत सिंह ने कहा कि उनके काफिले पर विरोधियों ने हमला किया और यह सारा खेल सूरजभान सिंह करवा रहे हैं। कौन थे दुलारचंद यादव ? मोकामा के रहने वाले दुलारचंद यादव को ‘टाल का बादशाह’ कहा जाता था। दुलारचंद पहलवानी के साथ-साथ गाना गाने के भी शौकीन थे। उन्होंने जन सुराज के उम्मीदवार पीयूष प्रियदर्शी के लिए एक गाना भी रिकॉर्ड करवाया था। माना जा रहा है कि मोकामा की चुनावी जंग अब व्यक्तिगत रंजिश और हिंसक टकराव की तरफ मुड़ गई है।
बॉलीवुड के शहंशाह अमिताभ बच्चन एक बार फिर दादा होने का गर्व महसूस कर रहे हैं। दरअसल, उनके नाती अगस्त्य नंदा की अपकमिंग फिल्म ‘इक्कीस’ का ट्रेलर हाल ही में रिलीज़ हुआ है। ट्रेलर देखकर बिग बी इतने इमोशनल हो गए कि उन्होंने सोशल मीडिया पर एक दिल छू लेने वाला पोस्ट शेयर किया। अमिताभ ने अपने पोस्ट में लिखा, “ये तो बस शुरुआत है... गर्व है तुम्हारे इस सफर पर, मेरे बच्चे।” उनकी इस पोस्ट पर फैन्स और फिल्म इंडस्ट्री के सितारों ने जमकर प्यार लुटाया। ‘इक्कीस’ मेगास्टार मेघना गुलज़ार के निर्देशन में बनी है और इसमें अगस्त्य नंदा एक अहम किरदार निभा रहे हैं। फिल्म 1971 के युद्ध के हीरो अरुण खेत्रपाल की कहानी पर आधारित है, जो देश के सबसे युवा परमवीर चक्र विजेता थे। फिल्म के ट्रेलर में अगस्त्य का जोश और समर्पण देखकर फैन्स कह रहे हैं—“दादा की तरह नाती भी लाजवाब!” तो देखना दिलचस्प होगा कि क्या अगस्त्य अपनी पहली ही फिल्म से दादा अमिताभ की विरासत को आगे बढ़ा पाएंगे।
Lucknow Desk: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने आज बुधवार को भारतीय वायुसेना के लड़ाकू विमान राफेल में उड़ान भरकर इतिहास रच दिया है। इससे पहले राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू सुखोई-3 MKI लड़ाकू विमान में भी उड़ान भर चुकी हैं। राष्ट्रपति की इस उड़ान ने आज भारतीय वायुसेना के साथ-साथ पूरे देश को गौरव से भर दिया है। बता दें, भारत का राष्ट्रपति तीनों सेनाओं की कमांडर होता है और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर मौजूद हैं। अंबाला एयरफोर्स स्टेशन पहुंचीं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू आज सुबह अंबाला एयरबेस पहुंचीं, जहां वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल ए. पी. सिंह और वरिष्ठ अधिकारियों ने उनका स्वागत किया। बता दें, राष्ट्रपति का यह उड़ान न केवल साहसिक नेतृत्व शैली का प्रतीक है, बल्कि भारत की बढ़ती रक्षा क्षमता और 'आत्मनिर्भर भारत' के संकल्प को वैश्विक पटल पर मजबूती से प्रदर्शित करना भी है। फाइटर जेट में उड़ान भरने वाली दूसरी महिला राष्ट्रपति मुर्मू राष्ट्रपति मुर्मू ने फाइटर जेट की सवारी ये पहली बार नहीं की हैं। उन्होंने इससे पहले 8 अप्रैल 2023 को असम के तेजपुर एयरफोर्स स्टेशन से सुखोई-30 MKI फाइटर विमान में भी उड़ान भर चुकी हैं। वह फाइटर जेट उड़ाने वाली तीसरी राष्ट्रपति और दूसरी महिला राष्ट्राध्यक्ष बनी थीं। राष्ट्रपति मुर्मू ने से पहले पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम और प्रतिभा पाटिल ने भी सुखोई-30 MKI में उड़ान भरी थी। राफेल लड़ाकू विमान का क्या है इतिहास? बता दें, राफेल लड़ाकू विमान फ्रांसीसी कंपनी दसॉ एविएशन द्वारा निर्मित किया गया है। सितंबर 2020 में अंबाला एयरफोर्स स्टेशन पर भारतीय वायुसेना में औपचारिक रूप से शामिल किया गया था। अंबाला एयरबेस राफेल स्क्वाड्रन ‘गोल्डन एरोज' का मुख्य केंद्र है। इन विमानों का इस्तेमाल हाल ही में ‘ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान किया गया था, इसके माध्यम से आतंकवादी ठिकानों पर हमले कर अपनी ताकत को सैनियों ने दिखाया था।
Lucknow Desk: कैसरगंज के बीजेपी नेता और पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह के हेलीकॉप्टर को धान के खेत में अचानक उतारना पड़ा। जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। बताया जा रहा है कि तकनीकी खराबी आने के बाद पायलट ने सूझबूझ दिखाते हुए हेलीकॉप्टर को सुरक्षित उतारा, जहां हेलीकॉप्टर देखने के लिए ग्रामीण भी जुट गए। मिली जानकारी के मुताबिक, बृजभूषण शरण सिंह एक कार्यक्रम में शामिल होने जा रहे थे। उड़ान के कुछ ही मिनट बाद हेलीकॉप्टर में तकनीकी दिक्कत आने लगी। स्थिति को समझते हुए पायलट ने तुरंत इमरजेंसी लैंडिंग का फैसला लिया और नज़दीकी धान के खेत में हेलीकॉप्टर को सुरक्षित उतार दिया। घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी भी मौके पर पहुंच गए। हेलीकॉप्टर की जांच के लिए टेक्निकल टीम बुलाई गई है। फिलहाल राहत की बात यह है कि बृजभूषण शरण सिंह और हेलीकॉप्टर में मौजूद सभी लोग पूरी तरह सुरक्षित हैं। जांच के बाद ही तकनीकी खराबी की असली वजह पता चल पाएगी। इसी बीच पूर्व सांसद बृजभूषण सिंह ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी कर संदेश दिया। उन्होंने कहा, आज मेरा बिहार प्रदेश के अंदर संदेश व दिनारा विधानसभा क्षेत्र में चुनावी सभा का कार्यक्रम था। संदेश विधानसभा का कार्यक्रम करके मैं दिनारा विधानसभा के लिए हेलीकाप्टर से निकला था। अचानक मौसम खराब होने के कारण हेलीकाप्टर की सुरक्षित लैंडिंग एक खेत में करानी पड़ी। पायलट ने बड़ी सूझबूझ से लैंडिंग कराई। मैं, इस समय गाड़ी से पटना जा रहा हूं। किसी अफवाह में आने की जरूरत नहीं है। किसी प्रकार की कोई हानि नहीं हुई है। हम सभी पूर्णतया सुरक्षित हैं। हेलीकाप्टर की सुरक्षा का प्रबंध कर दिया गया है। प्रशासन व जनता का बहुत सहयोग रहा...धन्यवाद
Lucknow Desk: आज 02 नवंबर 2025 को बॉलीवुड के बादशाह Shahrukh Khan ने अपने 60वें जन्मदिन का जश्न मनाया। इस मौके पर उन्होंने अपने परिवार, करीबियों और फिल्म इंडस्ट्री के दोस्तों के साथ खुशियाँ बाँटी। उन्होंने अपने आलीशान घर के बजाय इस बार सार्वजनिक रूप से Mannat से बाहर नहीं दिखने का फैसला किया क्योंकि वहाँ फिलहाल निर्माण का काम चल रहा है। वहीँ, जश्न के लिए उन्होंने Alibaug में स्थित निजी स्थान चुना। एक विशेष फैन-मीट कार्यक्रम Balgandharva Rangmandir, बांद्रा में आयोजित किया गया था, जहाँ सीमित प्रवेश पास के माध्यम से प्रशंसक सीधे शामिल हुए। सोशल मीडिया पर सितारों ने बधाइयाँ दीं। जिसमें Farah Khan ने लिखा, “Happy birthday KING … rule for another 100 years”। बता दें कि Shahrukh Khan के जन्मदिन के मौके पर सिर्फ भारत भर से ही नहीं बल्कि विदेशों से भी फैंस जुटे। शाहरुख खान के फैन क्लबों ने जन्मदिन सप्ताह के रूप में मनाया, चैरिटी ड्राइव, विशेष बैनर आदि के माध्यम से ख़ास अंदाज़ से जश्न मनाया।
उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने प्रदेश के ऐतिहासिक नगरों के नामों से जुड़े एक और अहम फैसले पर मुहर लगा दी है। शाहजहांपुर जिले के जलालाबाद नगर का नाम अब परशुरामपुरी होगा। योगी कैबिनेट की मंजूरी के बाद इस फैसले को औपचारिक रूप से लागू करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। सरकार का कहना है कि यह निर्णय क्षेत्र की ऐतिहासिक, धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को सम्मान देने के उद्देश्य से लिया गया है। वर्षों से उठ रही थी नाम बदलने की मांग जलालाबाद का नाम बदलकर परशुरामपुरी करने की मांग काफी समय से स्थानीय लोगों, सामाजिक संगठनों और विभिन्न धार्मिक संस्थाओं द्वारा उठाई जा रही थी। उनका कहना था कि इस क्षेत्र का संबंध भगवान परशुराम की आस्था और प्राचीन मान्यताओं से जुड़ा हुआ है। इसी आधार पर नगर पालिका ने भी प्रस्ताव पारित कर राज्य सरकार को भेजा था। सरकार ने सभी आवश्यक औपचारिकताओं को पूरा करने के बाद इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। सरकार ने बताया सांस्कृतिक विरासत को सम्मान राज्य सरकार का कहना है कि प्रदेश की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहरों को उनकी वास्तविक पहचान दिलाना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। सरकार का मानना है कि जिन स्थानों का संबंध भारतीय संस्कृति और धार्मिक परंपराओं से रहा है, उन्हें उसी पहचान के साथ स्थापित किया जाना चाहिए। इसी सोच के तहत जलालाबाद का नाम बदलकर परशुरामपुरी किया गया है। पर्यटन को भी मिलेगा बढ़ावा सरकार को उम्मीद है कि नाम परिवर्तन के बाद क्षेत्र में धार्मिक पर्यटन को नई पहचान मिलेगी। भगवान परशुराम से जुड़े मंदिरों और धार्मिक स्थलों पर आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ सकती है। इससे स्थानीय व्यापार, होटल व्यवसाय, परिवहन और छोटे कारोबारियों को भी आर्थिक लाभ मिलने की संभावना जताई जा रही है। विपक्ष ने उठाए सवाल इस फैसले को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रिया भी सामने आई है। विपक्षी दलों ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि नाम बदलने की बजाय सरकार को रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी सुविधाओं जैसे मुद्दों पर अधिक ध्यान देना चाहिए। हालांकि सरकार ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि विकास कार्य और सांस्कृतिक संरक्षण दोनों समान रूप से जारी रहेंगे। सरकारी रिकॉर्ड में होगा बदलाव नाम परिवर्तन के बाद सभी सरकारी दस्तावेजों, राजस्व अभिलेखों, सड़क संकेतकों, नगर पालिका के रिकॉर्ड और अन्य प्रशासनिक दस्तावेजों में धीरे-धीरे परशुरामपुरी नाम दर्ज किया जाएगा। संबंधित विभागों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए जा रहे हैं ताकि पूरी प्रक्रिया समयबद्ध तरीके से पूरी हो सके और लोगों को किसी प्रकार की परेशानी न हो। पहले भी बदले जा चुके हैं कई स्थानों के नाम योगी सरकार के कार्यकाल में उत्तर प्रदेश के कई शहरों, रेलवे स्टेशनों और अन्य सार्वजनिक स्थानों के नाम बदले जा चुके हैं। सरकार का कहना है कि इन बदलावों का उद्देश्य ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को नई पहचान देना है। जलालाबाद का नाम बदलकर परशुरामपुरी करना भी इसी श्रृंखला का एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। जलालाबाद का नाम बदलकर परशुरामपुरी किए जाने का फैसला प्रदेश की राजनीति और प्रशासन दोनों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। समर्थक इसे भारतीय संस्कृति और आस्था का सम्मान बता रहे हैं, जबकि विपक्ष इसे राजनीतिक निर्णय करार दे रहा है। आने वाले दिनों में यह बदलाव सरकारी रिकॉर्ड, स्थानीय पहचान और पर्यटन गतिविधियों पर किस प्रकार प्रभाव डालता है, इस पर सभी की नजर रहेगी।
कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में गुरुवार को एक दर्दनाक हादसा सामने आया। शहर के बाहरी इलाके में स्थित एक पत्थर की खदान में अचानक विशाल चट्टान खिसक गई, जिसकी चपेट में आकर बिहार के आठ मजदूरों की मौत हो गई। हादसा उस समय हुआ जब सभी मजदूर रोज की तरह खदान में पत्थर निकालने का काम कर रहे थे। अचानक भारी चट्टान टूटकर नीचे आ गिरी और मजदूरों को संभलने का मौका तक नहीं मिला। घटना के बाद पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई। राहत एवं बचाव कार्य कई घंटों तक चला हादसे की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस, दमकल विभाग और आपदा राहत टीम मौके पर पहुंच गई। जेसीबी मशीनों और अन्य भारी उपकरणों की मदद से मलबा हटाने का काम शुरू किया गया। कई घंटों की कड़ी मशक्कत के बाद सभी मजदूरों के शव बाहर निकाले गए। राहत दल ने यह भी सुनिश्चित किया कि मलबे के नीचे कोई अन्य व्यक्ति तो नहीं फंसा है। घटना के बाद सुरक्षा के मद्देनजर खदान में काम तत्काल रोक दिया गया। मृतक सभी बिहार के प्रवासी मजदूर प्रारंभिक जानकारी के अनुसार हादसे में जान गंवाने वाले सभी मजदूर बिहार के अलग-अलग जिलों के रहने वाले थे। बेहतर रोजगार और परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए वे बेंगलुरु में मजदूरी कर रहे थे। उनके परिवारों को हादसे की सूचना दे दी गई है। इस दुखद घटना के बाद मृतकों के गांवों में शोक की लहर दौड़ गई है। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। हादसे की जांच शुरू प्रशासन ने पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि यह पता लगाया जाएगा कि हादसा प्राकृतिक कारणों से हुआ या सुरक्षा मानकों की अनदेखी के कारण। जांच टीम यह भी देख रही है कि खदान संचालकों ने सुरक्षा नियमों का पालन किया था या नहीं। यदि किसी प्रकार की लापरवाही सामने आती है सुरक्षा व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल इस घटना ने एक बार फिर खदानों में काम करने वाले मजदूरों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि कई खदानों में सुरक्षा मानकों का पूरी तरह पालन नहीं किया जाता, जिससे इस तरह के हादसों की आशंका बनी रहती है। मजदूरों को पर्याप्त सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराना और नियमित निरीक्षण कराना बेहद आवश्यक है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके। सरकार ने जताया दुख कर्नाटक सरकार ने इस हादसे पर गहरा दुख व्यक्त किया है। प्रशासन ने मृतकों के परिजनों को हरसंभव सहायता देने का आश्वासन दिया है। साथ ही पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की बात कही गई है। बिहार सरकार भी अपने अधिकारियों के माध्यम से मृतकों के परिवारों से संपर्क कर रही है और आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। प्रवासी मजदूरों की सुरक्षा बनी बड़ी चुनौती देश के विभिन्न राज्यों से लाखों मजदूर रोजगार की तलाश में दूसरे राज्यों में काम करने जाते हैं। ऐसे में उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार और उद्योगों दोनों की जिम्मेदारी है। बेंगलुरु की इस दर्दनाक घटना ने एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि जोखिम भरे कार्यस्थलों पर सुरक्षा व्यवस्था कितनी महत्वपूर्ण है। बेहतर भविष्य की उम्मीद में अपने घरों से दूर काम करने गए बिहार के आठ मजदूर अब कभी अपने परिवारों के पास नहीं लौट पाएंगे। अब सभी की नजर जांच रिपोर्ट और प्रशासन की कार्रवाई पर है, ताकि दोषियों को सजा मिले और भविष्य में ऐसी त्रासदियों की पुनरावृत्ति न हो।
Lucknow Desk: राजधानी लखनऊ के चिनहट इलाके में रविवार सुबह उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब एक कोल्ड स्टोरेज में अचानक भीषण आग लग गई। आग इतनी भयावह थी कि उसकी ऊंची-ऊंची लपटें करीब एक किलोमीटर दूर तक दिखाई दे रही थीं। आग लगने के बाद पूरे इलाके में धुएं का गुबार फैल गया, जिससे लोगों में दहशत का माहौल बन गया। स्थानीय लोग अपने घरों से बाहर निकल आए और मौके पर भारी भीड़ जमा हो गई। बहुत सुबह लगी आग जानकारी के मुताबिक, आग सुबह करीब 6 बजे लगी। शुरुआती दौर में लोगों ने कोल्ड स्टोरेज से धुआं उठता देखा, जिसके बाद तुरंत पुलिस और फायर ब्रिगेड को सूचना दी गई। कुछ ही मिनटों में आग ने विकराल रूप धारण कर लिया। बताया जा रहा है कि कोल्ड स्टोरेज में बड़ी मात्रा में ज्वलनशील सामान रखा था, जिसकी वजह से आग तेजी से फैलती चली गई। 1 किमी दूर तक दिखीं लपटें आग की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उसकी लपटें करीब एक किलोमीटर दूर से साफ दिखाई दे रही थीं। आसपास के इलाकों में रहने वाले लोगों ने बताया कि धुएं और आग की रोशनी से पूरे क्षेत्र में हड़कंप मच गया। कई लोग आग का वीडियो बनाते नजर आए, जबकि कुछ लोग परिवार के साथ सुरक्षित स्थानों की ओर निकल गए। दमकल की कई गाड़ियां मौके पर पहुंचीं घटना की सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड की कई गाड़ियां मौके पर पहुंचीं। दमकल कर्मियों ने आग बुझाने का अभियान शुरू किया, लेकिन आग लगातार फैलती जा रही थी। आग पर काबू पाने के लिए हाइड्रोलिक मशीनों का भी इस्तेमाल किया गया। दमकल विभाग के अधिकारियों के अनुसार, आग बुझाने में काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा क्योंकि अंदर से लगातार धुआं और तेज गर्मी निकल रही थी। आसपास के घर कराए गए खाली आग की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने एहतियातन आसपास के कई घर खाली करा दिए। पुलिस और प्रशासन की टीम ने लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया। कई परिवार जल्दबाजी में जरूरी सामान लेकर घरों से बाहर निकलते नजर आए। प्रशासन को डर था कि अगर आग और फैलती तो बड़ा हादसा हो सकता था। धुएं से लोगों को हुई परेशानी कोल्ड स्टोरेज में रखे सामान के जलने से निकल रहे धुएं के कारण लोगों को सांस लेने में दिक्कत और आंखों में जलन की शिकायत होने लगी। मौके पर मौजूद दमकल कर्मियों को भी काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। आसपास के इलाके में धुएं की मोटी परत छा गई थी, जिसके चलते लोगों को घरों के दरवाजे और खिड़कियां बंद करनी पड़ीं। घंटों की मशक्कत के बाद आग पर काबू करीब सात से आठ घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद दमकल विभाग ने आग पर काबू पाया। हालांकि बीच-बीच में आग दोबारा भड़कने की स्थिति भी बनी रही। राहत की बात यह रही कि इस घटना में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं मिली है। लेकिन कोल्ड स्टोरेज में रखा लाखों रुपये का सामान जलकर राख हो गया। जांच में जुटा प्रशासन फिलहाल आग लगने के कारणों का पता नहीं चल पाया है। शुरुआती जांच में शॉर्ट सर्किट की आशंका जताई जा रही है। पुलिस और फायर विभाग की टीम मामले की जांच में जुट गई है। अधिकारियों का कहना है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद ही आग लगने की असली वजह साफ हो सकेगी।