Lucknow Desk: रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध एक बार फिर खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। हाल ही में यूक्रेन ने रूस की दो बड़ी ऑयल रिफाइनरियों पर हमला कर दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। इस हमले के बाद दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ गया है। रूस ने इसे गंभीर उकसावे वाली कार्रवाई बताया है, जबकि यूक्रेन का कहना है कि वह रूस की सैन्य और ऊर्जा क्षमता को कमजोर करने की रणनीति पर काम कर रहा है।
देर रात हुआ बड़ा हमला
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, हमला देर रात ड्रोन और मिसाइलों के जरिए किया गया। बताया जा रहा है कि रूस के औद्योगिक क्षेत्र में स्थित दो प्रमुख तेल रिफाइनरियों को निशाना बनाया गया। हमले के तुरंत बाद कई जगहों पर आग लग गई और आसमान में धुएं के बड़े गुबार दिखाई दिए। स्थानीय प्रशासन ने तुरंत राहत और बचाव कार्य शुरू कर दिया।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, धमाकों की आवाज कई किलोोमीटर दूर तक सुनाई दी। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में आग की ऊंची लपटें और अफरा-तफरी का माहौल साफ दिखाई दे रहा है।
ऊर्जा क्षेत्र को निशाना बनाने की रणनीति
विशेषज्ञों का मानना है कि यूक्रेन अब रूस के ऊर्जा ढांचे को निशाना बनाकर दबाव बढ़ाना चाहता है। ऑयल रिफाइनरियां रूस की अर्थव्यवस्था और सैन्य सप्लाई के लिए बेहद अहम मानी जाती हैं। ऐसे में इन ठिकानों पर हमला रूस के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।
जानकारों के अनुसार, अगर इस तरह के हमले लगातार होते रहे तो रूस के ईंधन उत्पादन और सप्लाई पर असर पड़ सकता है। इससे वैश्विक तेल बाजार में भी उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।
रूस ने दी कड़ी चेतावनी
हमले के बाद रूस ने यूक्रेन को कड़ी चेतावनी दी है। रूसी अधिकारियों ने कहा कि इस कार्रवाई का जवाब दिया जाएगा। रूस के रक्षा मंत्रालय का दावा है कि उसकी एयर डिफेंस प्रणाली ने कई ड्रोन मार गिराए, लेकिन कुछ ड्रोन अपने लक्ष्य तक पहुंचने में सफल रहे।
रूस ने यह भी आरोप लगाया कि पश्चिमी देशों से मिले आधुनिक हथियारों का इस्तेमाल इस हमले में किया गया। हालांकि यूक्रेन की तरफ से इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी गई है।
वैश्विक बाजार पर असर की आशंका
इस हमले के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों को लेकर चिंता बढ़ गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि रूस की ऊर्जा सुविधाओं पर लगातार हमले होते रहे तो दुनिया भर में तेल सप्लाई प्रभावित हो सकती है।
कई देशों ने दोनों पक्षों से संयम बरतने की अपील की है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय को डर है कि युद्ध अगर इसी तरह बढ़ता रहा तो इसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है।
युद्ध के नए चरण की ओर बढ़ता संघर्ष
विशेषज्ञों का मानना है कि यह हमला दिखाता है कि युद्ध अब नए चरण में प्रवेश कर चुका है। पहले जहां लड़ाई सीमावर्ती इलाकों तक सीमित थी यूक्रेन लगातार रूस के अंदर रणनीतिक ठिकानों पर हमले बढ़ा रहा है, जबकि रूस भी जवाबी कार्रवाई तेज कर रहा है। ऐसे में आने वाले दिनों में हालात और गंभीर हो सकते हैं।
दुनिया की नजरें अगले कदम पर
फिलहाल पूरी दुनिया की नजर रूस और यूक्रेन के अगले कदम पर टिकी हुई है। दोनों देशों के बीच बढ़ता तनाव किसी बड़े संघर्ष का संकेत दे रहा है। अगर जल्द शांति की दिशा में कदम नहीं उठाए गए तो यह युद्ध और ज्यादा विनाशकारी रूप ले सकता है।
Lucknow Desk: बिहार के मोकामा से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहाँ चुनाव प्रचार के दौरान हमला किया गया। इस घटना में जानी-मानी हस्ती दुलारचंद यादव की हत्या हो गई है और आरोप लगाया गया है कि इस घटना में पूर्व विधायक अनंत सिंह के समर्थकों की भूमिका है। यह घटना आगामी विधानसभा चुनाव के बीच हुई है, जिससे राज्य में कानून-व्यवस्था और चुनावी हिंसा पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। अनंत सिंह समेत 5 नामजद मोकामा में दुलारचंद यादव की हत्या मामले में JDU प्रत्याशी बाहुबली अनंत सिंह समेत पांच लोगों पर केस दर्ज कर ली गई है। मृत दुलारचंद यादव के पोते के दिए गए बयान पर अनंत सिंह, दो भतीजों रणवीर सिंह, कर्मवीर सिंह, करीबी छोटन सिंह और कंजय सिंह पर नामजद और कई अज्ञात के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया गया है। यानी दुलारचंद यादव के परिजनों और जन सुराज पार्टी के समर्थकों ने सीधे तौर पर JDU उम्मीदवार और बाहुबली नेता अनंत सिंह के समर्थकों पर हत्या का आरोप लगाया है। अनंत सिंह ने आरोपों को किया खारिज वहीं इस बयान पर JDU उम्मीदवार अनंत सिंह ने इन आरोपों को खारिज करते हुए इसे RJD उम्मीदवार वीणा देवी के पति बाहुबली सूरजभान सिंह की साजिश बताया है। अनंत सिंह ने कहा कि उनके काफिले पर विरोधियों ने हमला किया और यह सारा खेल सूरजभान सिंह करवा रहे हैं। कौन थे दुलारचंद यादव ? मोकामा के रहने वाले दुलारचंद यादव को ‘टाल का बादशाह’ कहा जाता था। दुलारचंद पहलवानी के साथ-साथ गाना गाने के भी शौकीन थे। उन्होंने जन सुराज के उम्मीदवार पीयूष प्रियदर्शी के लिए एक गाना भी रिकॉर्ड करवाया था। माना जा रहा है कि मोकामा की चुनावी जंग अब व्यक्तिगत रंजिश और हिंसक टकराव की तरफ मुड़ गई है।
बॉलीवुड के शहंशाह अमिताभ बच्चन एक बार फिर दादा होने का गर्व महसूस कर रहे हैं। दरअसल, उनके नाती अगस्त्य नंदा की अपकमिंग फिल्म ‘इक्कीस’ का ट्रेलर हाल ही में रिलीज़ हुआ है। ट्रेलर देखकर बिग बी इतने इमोशनल हो गए कि उन्होंने सोशल मीडिया पर एक दिल छू लेने वाला पोस्ट शेयर किया। अमिताभ ने अपने पोस्ट में लिखा, “ये तो बस शुरुआत है... गर्व है तुम्हारे इस सफर पर, मेरे बच्चे।” उनकी इस पोस्ट पर फैन्स और फिल्म इंडस्ट्री के सितारों ने जमकर प्यार लुटाया। ‘इक्कीस’ मेगास्टार मेघना गुलज़ार के निर्देशन में बनी है और इसमें अगस्त्य नंदा एक अहम किरदार निभा रहे हैं। फिल्म 1971 के युद्ध के हीरो अरुण खेत्रपाल की कहानी पर आधारित है, जो देश के सबसे युवा परमवीर चक्र विजेता थे। फिल्म के ट्रेलर में अगस्त्य का जोश और समर्पण देखकर फैन्स कह रहे हैं—“दादा की तरह नाती भी लाजवाब!” तो देखना दिलचस्प होगा कि क्या अगस्त्य अपनी पहली ही फिल्म से दादा अमिताभ की विरासत को आगे बढ़ा पाएंगे।
Lucknow Desk: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने आज बुधवार को भारतीय वायुसेना के लड़ाकू विमान राफेल में उड़ान भरकर इतिहास रच दिया है। इससे पहले राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू सुखोई-3 MKI लड़ाकू विमान में भी उड़ान भर चुकी हैं। राष्ट्रपति की इस उड़ान ने आज भारतीय वायुसेना के साथ-साथ पूरे देश को गौरव से भर दिया है। बता दें, भारत का राष्ट्रपति तीनों सेनाओं की कमांडर होता है और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर मौजूद हैं। अंबाला एयरफोर्स स्टेशन पहुंचीं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू आज सुबह अंबाला एयरबेस पहुंचीं, जहां वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल ए. पी. सिंह और वरिष्ठ अधिकारियों ने उनका स्वागत किया। बता दें, राष्ट्रपति का यह उड़ान न केवल साहसिक नेतृत्व शैली का प्रतीक है, बल्कि भारत की बढ़ती रक्षा क्षमता और 'आत्मनिर्भर भारत' के संकल्प को वैश्विक पटल पर मजबूती से प्रदर्शित करना भी है। फाइटर जेट में उड़ान भरने वाली दूसरी महिला राष्ट्रपति मुर्मू राष्ट्रपति मुर्मू ने फाइटर जेट की सवारी ये पहली बार नहीं की हैं। उन्होंने इससे पहले 8 अप्रैल 2023 को असम के तेजपुर एयरफोर्स स्टेशन से सुखोई-30 MKI फाइटर विमान में भी उड़ान भर चुकी हैं। वह फाइटर जेट उड़ाने वाली तीसरी राष्ट्रपति और दूसरी महिला राष्ट्राध्यक्ष बनी थीं। राष्ट्रपति मुर्मू ने से पहले पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम और प्रतिभा पाटिल ने भी सुखोई-30 MKI में उड़ान भरी थी। राफेल लड़ाकू विमान का क्या है इतिहास? बता दें, राफेल लड़ाकू विमान फ्रांसीसी कंपनी दसॉ एविएशन द्वारा निर्मित किया गया है। सितंबर 2020 में अंबाला एयरफोर्स स्टेशन पर भारतीय वायुसेना में औपचारिक रूप से शामिल किया गया था। अंबाला एयरबेस राफेल स्क्वाड्रन ‘गोल्डन एरोज' का मुख्य केंद्र है। इन विमानों का इस्तेमाल हाल ही में ‘ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान किया गया था, इसके माध्यम से आतंकवादी ठिकानों पर हमले कर अपनी ताकत को सैनियों ने दिखाया था।
Lucknow Desk: कैसरगंज के बीजेपी नेता और पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह के हेलीकॉप्टर को धान के खेत में अचानक उतारना पड़ा। जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। बताया जा रहा है कि तकनीकी खराबी आने के बाद पायलट ने सूझबूझ दिखाते हुए हेलीकॉप्टर को सुरक्षित उतारा, जहां हेलीकॉप्टर देखने के लिए ग्रामीण भी जुट गए। मिली जानकारी के मुताबिक, बृजभूषण शरण सिंह एक कार्यक्रम में शामिल होने जा रहे थे। उड़ान के कुछ ही मिनट बाद हेलीकॉप्टर में तकनीकी दिक्कत आने लगी। स्थिति को समझते हुए पायलट ने तुरंत इमरजेंसी लैंडिंग का फैसला लिया और नज़दीकी धान के खेत में हेलीकॉप्टर को सुरक्षित उतार दिया। घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी भी मौके पर पहुंच गए। हेलीकॉप्टर की जांच के लिए टेक्निकल टीम बुलाई गई है। फिलहाल राहत की बात यह है कि बृजभूषण शरण सिंह और हेलीकॉप्टर में मौजूद सभी लोग पूरी तरह सुरक्षित हैं। जांच के बाद ही तकनीकी खराबी की असली वजह पता चल पाएगी। इसी बीच पूर्व सांसद बृजभूषण सिंह ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी कर संदेश दिया। उन्होंने कहा, आज मेरा बिहार प्रदेश के अंदर संदेश व दिनारा विधानसभा क्षेत्र में चुनावी सभा का कार्यक्रम था। संदेश विधानसभा का कार्यक्रम करके मैं दिनारा विधानसभा के लिए हेलीकाप्टर से निकला था। अचानक मौसम खराब होने के कारण हेलीकाप्टर की सुरक्षित लैंडिंग एक खेत में करानी पड़ी। पायलट ने बड़ी सूझबूझ से लैंडिंग कराई। मैं, इस समय गाड़ी से पटना जा रहा हूं। किसी अफवाह में आने की जरूरत नहीं है। किसी प्रकार की कोई हानि नहीं हुई है। हम सभी पूर्णतया सुरक्षित हैं। हेलीकाप्टर की सुरक्षा का प्रबंध कर दिया गया है। प्रशासन व जनता का बहुत सहयोग रहा...धन्यवाद
Lucknow Desk: आज 02 नवंबर 2025 को बॉलीवुड के बादशाह Shahrukh Khan ने अपने 60वें जन्मदिन का जश्न मनाया। इस मौके पर उन्होंने अपने परिवार, करीबियों और फिल्म इंडस्ट्री के दोस्तों के साथ खुशियाँ बाँटी। उन्होंने अपने आलीशान घर के बजाय इस बार सार्वजनिक रूप से Mannat से बाहर नहीं दिखने का फैसला किया क्योंकि वहाँ फिलहाल निर्माण का काम चल रहा है। वहीँ, जश्न के लिए उन्होंने Alibaug में स्थित निजी स्थान चुना। एक विशेष फैन-मीट कार्यक्रम Balgandharva Rangmandir, बांद्रा में आयोजित किया गया था, जहाँ सीमित प्रवेश पास के माध्यम से प्रशंसक सीधे शामिल हुए। सोशल मीडिया पर सितारों ने बधाइयाँ दीं। जिसमें Farah Khan ने लिखा, “Happy birthday KING … rule for another 100 years”। बता दें कि Shahrukh Khan के जन्मदिन के मौके पर सिर्फ भारत भर से ही नहीं बल्कि विदेशों से भी फैंस जुटे। शाहरुख खान के फैन क्लबों ने जन्मदिन सप्ताह के रूप में मनाया, चैरिटी ड्राइव, विशेष बैनर आदि के माध्यम से ख़ास अंदाज़ से जश्न मनाया।
Lucknow Desk: हाल के दिनों में दुनिया की नजरें United States और Iran के बढ़ते तनाव पर टिकी हुई थीं। दोनों देशों के बीच सैन्य कार्रवाई की आशंका लगातार बढ़ रही थी, लेकिन अब खबरें सामने आ रही हैं कि बातचीत और कूटनीतिक प्रयासों के बाद स्थिति कुछ हद तक सामान्य होती दिखाई दे रही है। इससे पूरी दुनिया ने राहत की सांस ली है। कैसे बढ़ा था तनाव? अमेरिका और ईरान के रिश्ते पिछले कई वर्षों से खराब रहे हैं। परमाणु कार्यक्रम, मध्य पूर्व की राजनीति और प्रतिबंधों को लेकर दोनों देशों में लगातार टकराव चलता रहा है। हाल में कुछ घटनाओं के बाद यह डर बढ़ गया था कि दोनों देशों के बीच सीधा सैन्य हमला हो सकता है। मध्य पूर्व में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर खतरे की खबरें आने लगी थीं। वहीं ईरान ने भी अपनी सेना को सतर्क रहने के निर्देश दिए थे। सोशल मीडिया और अंतरराष्ट्रीय मीडिया में लगातार युद्ध की आशंकाएं जताई जा रही थीं। बातचीत से निकला समाधान तनाव बढ़ने के बाद कई देशों ने दोनों पक्षों से शांति बनाए रखने की अपील की। कूटनीतिक स्तर पर बातचीत शुरू हुई और धीरे-धीरे माहौल शांत होने लगा। सूत्रों के अनुसार, दोनों देशों ने फिलहाल सीधे सैन्य हमले से बचने का फैसला किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर युद्ध होता तो उसका असर सिर्फ अमेरिका और ईरान तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था प्रभावित हो सकती थी। तेल की कीमतें बढ़तीं, व्यापार पर असर पड़ता और कई देशों में आर्थिक संकट गहरा सकता था। दुनिया को क्यों थी चिंता? Israel, Saudi Arabia और अन्य मध्य पूर्वी देशों की सुरक्षा भी इस तनाव से जुड़ी हुई थी। अगर युद्ध शुरू होता तो पूरा क्षेत्र अस्थिर हो सकता था। संयुक्त राष्ट्र समेत कई अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने भी दोनों देशों से संयम बरतने की अपील की थी। दुनिया के बड़े देशों ने माना कि युद्ध किसी समस्या का समाधान नहीं है और बातचीत ही सबसे बेहतर रास्ता है। तेल बाजार पर पड़ा असर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ने का असर अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार पर भी दिखाई दिया। निवेशकों में डर का माहौल बन गया था। कई विशेषज्ञों ने चेतावनी दी थी कि अगर युद्ध छिड़ता है तो पेट्रोल और डीजल की कीमतों में भारी बढ़ोतरी हो सकती है। हालांकि अब स्थिति सामान्य होने की खबरों के बाद बाजार में कुछ राहत देखने को मिली है। तेल की कीमतों में स्थिरता लौटने लगी है और निवेशकों का भरोसा भी बढ़ा है। आम लोगों पर क्या पड़ता असर? अगर दोनों देशों के बीच युद्ध होता तो उसका असर पूरी दुनिया के आम लोगों पर भी पड़ता। महंगाई बढ़ सकती थी, व्यापार प्रभावित होता और कई देशों में आर्थिक संकट गहरा जाता। भारत जैसे देशों के लिए भी यह स्थिति चुनौतीपूर्ण हो सकती थी क्योंकि भारत तेल आयात पर काफी निर्भर है।इसके अलावा लाखों लोगों की सुरक्षा पर भी खतरा बढ़ सकता था। इसलिए दुनिया भर में लोग यही चाहते थे कि मामला बातचीत से सुलझे। आगे क्या होगा? विशेषज्ञों का कहना है कि फिलहाल स्थिति शांत जरूर हुई है, लेकिन दोनों देशों के बीच अविश्वास अभी भी बना हुआ है। आने वाले समय में बातचीत और कूटनीतिक प्रयास बेहद महत्वपूर्ण रहेंगे। अगर दोनों देश समझदारी से कदम उठाते हैं तो मध्य पूर्व में स्थिरता बनी रह सकती है। लेकिन किसी भी छोटी घटना से तनाव फिर बढ़ सकता है। इसलिए पूरी दुनिया की नजर अब अमेरिका और ईरान की अगली रणनीति पर बनी हुई है।
Lucknow Desk: अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट के बाद केंद्र सरकार ने एलपीजी उपभोक्ताओं को बड़ी राहत दी है। सरकार ने गैस कनेक्शन और सिलेंडर बुकिंग से जुड़ी कई पाबंदियों को हटाने का फैसला लिया है। नए नियम आज से लागू कर दिए गए हैं, जिससे करोड़ों लोगों को फायदा मिलने की उम्मीद है। तेल की कीमतों में गिरावट का असर पिछले कुछ समय से अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल की कीमतों में लगातार नरमी देखने को मिल रही है। इसका सीधा असर घरेलू गैस की लागत पर पड़ा है। सरकार और तेल कंपनियों ने इसी स्थिति को देखते हुए एलपीजी नियमों में बदलाव करने का निर्णय लिया है। गैस कनेक्शन ट्रांसफर हुआ आसान सरकार ने गैस कनेक्शन ट्रांसफर प्रक्रिया को पहले से काफी सरल बना दिया है। अब उपभोक्ताओं को लंबी कागजी कार्रवाई से नहीं गुजरना पड़ेगा। पहले एड्रेस प्रूफ, रेंट एग्रीमेंट और कई अन्य दस्तावेज जरूरी होते थे, लेकिन अब कम दस्तावेजों में प्रक्रिया पूरी हो सकेगी। इस बदलाव से नौकरी, पढ़ाई या अन्य कारणों से दूसरे शहर में रहने वाले लोगों को बड़ी राहत मिलेगी। सिलेंडर बुकिंग की पाबंदियां हटाई गईं पहले कई क्षेत्रों में एक महीने में सीमित संख्या में एलपीजी सिलेंडर बुक करने का नियम लागू था। अब सरकार ने इस सीमा में राहत दी है। जरूरत पड़ने पर उपभोक्ता अतिरिक्त सिलेंडर भी बुक कर सकेंगे। त्योहारों, शादी-विवाह और बड़े पारिवारिक आयोजनों के दौरान यह सुविधा लोगों के लिए काफी उपयोगी साबित होगी। ई-केवाईसी प्रक्रिया हुई आसान सरकार ने डिजिटल प्रक्रिया को बढ़ावा देते हुए ई-केवाईसी सिस्टम को भी आसान बना दिया है। अब उपभोक्ता मोबाइल नंबर और आधार आधारित ओटीपी के जरिए घर बैठे वेरिफिकेशन पूरा कर सकेंगे। इससे गैस एजेंसी के बार-बार चक्कर लगाने की जरूरत कम होगी और सेवाएं तेजी से मिलेंगी। उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों को राहत सरकार का यह फैसला उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों के लिए भी फायदेमंद माना जा रहा है। आने वाले समय में सब्सिडी व्यवस्था को और पारदर्शी बनाया जा सकता है ताकि गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों तक सस्ती रसोई गैस आसानी से पहुंच सके। सुरक्षा नियमों में नहीं होगी कोई ढील हालांकि सरकार ने कई प्रक्रियाओं को आसान बनाया है, लेकिन सुरक्षा नियम पहले की तरह सख्ती से लागू रहेंगे। गैस सिलेंडर की जांच, पाइप और रेगुलेटर की गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। तेल कंपनियों ने साफ किया है कि उपभोक्ताओं की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता रहेगी। घरेलू बजट को मिलेगी राहत विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार का यह कदम महंगाई को नियंत्रित करने में मदद कर सकता है। एलपीजी की आसान उपलब्धता से घरेलू बजट पर दबाव कम होगा। छोटे होटल, ढाबे और घरेलू व्यवसाय चलाने वाले लोगों को भी इसका फायदा मिलेगा। रिकॉर्ड अपडेट रखना जरूरी सरकार ने उपभोक्ताओं से अपील की है कि वे अपना मोबाइल नंबर और आधार गैस एजेंसी रिकॉर्ड में अपडेट रखें। इससे नई सुविधाओं और सेवाओं का लाभ जल्दी मिल सकेगा।
Lucknow Desk: दुनिया की सबसे प्रभावशाली आर्थिक और राजनीतिक संस्थाओं में से एक G7 (ग्रुप ऑफ सेवन) इन दिनों फिर चर्चा में है। पीएम मोदी 16-17 जून को G7 शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे. G7 के सदस्य देश भारत को अहम पार्टनर के तौर पर आमंत्रित करते आए हैं. वैश्विक अर्थव्यवस्था, जलवायु परिवर्तन, ऊर्जा सुरक्षा, भू-राजनीतिक तनाव और विकासशील देशों के मुद्दों पर चर्चा के लिए आयोजित होने वाले G7 शिखर सम्मेलन में भारत की भूमिका लगातार मजबूत होती जा रही है। इसी बीच यह सवाल भी उठ रहा है कि फ्रांस के बाद G7 की अध्यक्षता कौन करेगा और इस मंच पर भारत तथा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की क्या भूमिका होगी। क्या है G7? G7 दुनिया की सात विकसित और औद्योगिक अर्थव्यवस्थाओं का समूह है। इसमें शामिल देश हैं: अमेरिका ब्रिटेन कनाडा फ्रांस जर्मनी इटली जापान इसके अलावा, यूरोपीय संघ (EU) भी इस समूह की बैठकों में भाग लेता है। G7 का गठन वर्ष 1975 में वैश्विक आर्थिक चुनौतियों पर चर्चा और सहयोग बढ़ाने के उद्देश्य से किया गया था। समय के साथ इसका दायरा केवल आर्थिक मुद्दों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सुरक्षा, जलवायु, तकनीक और अंतरराष्ट्रीय राजनीति जैसे विषय भी इसमें शामिल हो गए। फ्रांस के बाद कौन करेगा अध्यक्षता? G7 की अध्यक्षता हर वर्ष सदस्य देशों के बीच रोटेशन के आधार पर बदलती रहती है। प्रत्येक देश अपनी अध्यक्षता के दौरान शिखर सम्मेलन की मेजबानी करता है और बैठक के प्रमुख एजेंडे तय करता है। आने वाले वर्षों में सदस्य देश बारी-बारी से इसकी अध्यक्षता संभालेंगे और वैश्विक चुनौतियों पर चर्चा का नेतृत्व करेंगे। हालांकि भारत G7 का स्थायी सदस्य नहीं है, लेकिन पिछले कई वर्षों से भारत को विशेष आमंत्रित देश के रूप में लगातार बुलाया जा रहा है। इससे स्पष्ट होता है कि वैश्विक मंचों पर भारत का महत्व तेजी से बढ़ रहा है। ग्लोबल साउथ की आवाज बन रहा भारत "ग्लोबल साउथ" उन विकासशील और उभरती अर्थव्यवस्थाओं वाले देशों को कहा जाता है जो एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका में स्थित हैं। इन देशों की प्रमुख चिंताएं गरीबी, विकास, खाद्य सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन और वित्तीय सहयोग से जुड़ी हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले कुछ वर्षों में ग्लोबल साउथ के मुद्दों को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर प्रमुखता से उठाया है। भारत ने कई बार यह कहा है कि वैश्विक निर्णय लेने वाली संस्थाओं में विकासशील देशों को अधिक प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए। भारत की अध्यक्षता में आयोजित G20 शिखर सम्मेलन के दौरान भी ग्लोबल साउथ की आवाज को मजबूती से रखा गया था। इसके परिणामस्वरूप अफ्रीकी संघ को G20 की स्थायी सदस्यता मिली, जिसे भारत की बड़ी कूटनीतिक सफलता माना गया। G7 में क्यों महत्वपूर्ण है भारत? आज भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में से एक है। इसके साथ ही भारत वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला, डिजिटल तकनीक, हरित ऊर्जा और अंतरराष्ट्रीय व्यापार में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। G7 देशों के लिए भारत एक महत्वपूर्ण साझेदार बन चुका है। रूस-यूक्रेन युद्ध, मध्य पूर्व संकट और जलवायु परिवर्तन जैसे मुद्दों पर भारत का संतुलित दृष्टिकोण उसे विशेष महत्व दिलाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि भले ही भारत G7 का सदस्य न हो, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी इस मंच पर ग्लोबल साउथ के करोड़ों लोगों की आवाज को प्रतिनिधित्व देती है। यही कारण है कि भारत को लगातार G7 बैठकों में आमंत्रित किया जाता है।