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INDIAN DIPLOMACY: चीन की उलझ गई सबसे बड़ी चाल, भारत ने इंडो-पैसिफिक में बिछाया कूटनीति का मजबूत जाल

TV 24 Network July 11, 2026 0
भारत की इंडो-पैसिफिक कूटनीति को दर्शाता सांकेतिक चित्र, जिसमें भारत, जापान, ऑस्ट्रेलिया और इंडोनेशिया के झंडे दिखाई दे रहे हैं।
INDIAN DIPLOMACY: चीन की उलझ गई सबसे बड़ी चाल, भारत ने इंडो-पैसिफिक में बिछाया कूटनीति का मजबूत जाल

भारत ने बदलते वैश्विक समीकरणों के बीच अपनी विदेश नीति को नई दिशा देते हुए इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सक्रिय भूमिका निभानी शुरू कर दी है। जापान, ऑस्ट्रेलिया और इंडोनेशिया जैसे देशों के साथ बढ़ते रणनीतिक संबंधों को भारत की दीर्घकालिक कूटनीतिक रणनीति का अहम हिस्सा माना जा रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि इन साझेदारियों से क्षेत्रीय संतुलन मजबूत हो सकता है और चीन के बढ़ते प्रभाव के बीच भारत की भूमिका और महत्वपूर्ण बन सकती है।

 

इंडो-पैसिफिक पर भारत का बढ़ता फोकस

हिंद-प्रशांत क्षेत्र आज वैश्विक व्यापार, समुद्री सुरक्षा और रणनीतिक प्रतिस्पर्धा का प्रमुख केंद्र बन चुका है। भारत लगातार "मुक्त, खुला और समावेशी इंडो-पैसिफिक" की वकालत कर रहा है। इसका उद्देश्य समुद्री मार्गों की सुरक्षा, अंतरराष्ट्रीय कानूनों का सम्मान और सभी देशों के लिए समान अवसर सुनिश्चित करना है।

 

जापान, ऑस्ट्रेलिया और इंडोनेशिया से बढ़ा सहयोग

भारत ने हाल के समय में जापान, ऑस्ट्रेलिया और इंडोनेशिया के साथ रक्षा, समुद्री सुरक्षा, ऊर्जा, निवेश और महत्वपूर्ण खनिज (Critical Minerals) जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाया है। इन साझेदारियों का उद्देश्य केवल आर्थिक विकास नहीं, बल्कि सुरक्षित और मजबूत सप्लाई चेन तैयार करना भी है।

 

'G Minus Two' रणनीति पर चर्चा

हाल के दिनों में "G Minus Two" रणनीति की चर्चा तेज हुई है। इस अवधारणा के तहत भारत उन देशों के साथ सहयोग बढ़ाने पर जोर दे रहा है जो बहुध्रुवीय वैश्विक व्यवस्था और स्वतंत्र इंडो-पैसिफिक क्षेत्र का समर्थन करते हैं। इसे अमेरिका और चीन के बीच बढ़ती प्रतिस्पर्धा के दौर में भारत की संतुलित कूटनीतिक नीति के रूप में देखा जा रहा है।

 

महत्वपूर्ण खनिजों पर भी विशेष ध्यान

सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रिक वाहन, रक्षा तकनीक और स्वच्छ ऊर्जा के लिए जरूरी रेयर अर्थ और क्रिटिकल मिनरल्स की वैश्विक मांग लगातार बढ़ रही है। भारत इन संसाधनों की सुरक्षित आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए कई देशों के साथ समझौते और सहयोग बढ़ा रहा है ताकि किसी एक देश पर अत्यधिक निर्भरता कम की जा सके।

 

भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका

पिछले कुछ वर्षों में भारत ने G20, क्वाड और अन्य बहुपक्षीय मंचों पर सक्रिय भागीदारी निभाई है। विदेश नीति में संतुलित दृष्टिकोण अपनाते हुए भारत एक साथ कई देशों के साथ रणनीतिक संबंध मजबूत कर रहा है। इससे वैश्विक मंच पर भारत की विश्वसनीयता और प्रभाव दोनों में वृद्धि देखने को मिल रही है।

 

भारत की नई कूटनीतिक रणनीति का केंद्र सहयोग, क्षेत्रीय स्थिरता और राष्ट्रीय हितों की सुरक्षा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में मजबूत साझेदारियां भारत को आर्थिक, सामरिक और कूटनीतिक रूप से अधिक सक्षम बना सकती हैं। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय संबंध लगातार बदलते रहते हैं और भारत तथा चीन दोनों अपने-अपने राष्ट्रीय हितों के अनुसार नीतियां बनाते रहते हैं।

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नाती अगस्त्य की Ikkis का ट्रेलर देखकर इमोशनल हुए Amitabh Bachchan!

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अंबाला एयरफोर्स स्टेशन पहुंचीं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, फाइटर जेट में उड़ान भरने वाली दूसरी महिला राष्ट्रपति

Lucknow Desk: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने आज बुधवार को भारतीय वायुसेना के लड़ाकू विमान राफेल में उड़ान भरकर इतिहास रच दिया है। इससे पहले राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू सुखोई-3 MKI लड़ाकू विमान में भी उड़ान भर चुकी हैं। राष्ट्रपति की इस उड़ान ने आज भारतीय वायुसेना के साथ-साथ पूरे देश को गौरव से भर दिया है। बता दें, भारत का राष्ट्रपति तीनों सेनाओं की कमांडर होता है और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर मौजूद हैं। अंबाला एयरफोर्स स्टेशन पहुंचीं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू आज सुबह अंबाला एयरबेस पहुंचीं, जहां वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल ए. पी. सिंह और वरिष्ठ अधिकारियों ने उनका स्वागत किया। बता दें, राष्ट्रपति का यह उड़ान न केवल साहसिक नेतृत्व शैली का प्रतीक है, बल्कि भारत की बढ़ती रक्षा क्षमता और 'आत्मनिर्भर भारत' के संकल्प को वैश्विक पटल पर मजबूती से प्रदर्शित करना भी है। फाइटर जेट में उड़ान भरने वाली दूसरी महिला राष्ट्रपति मुर्मू राष्ट्रपति मुर्मू ने फाइटर जेट की सवारी ये पहली बार नहीं की हैं। उन्होंने इससे पहले 8 अप्रैल 2023 को असम के तेजपुर एयरफोर्स स्टेशन से सुखोई-30 MKI फाइटर विमान में भी उड़ान भर चुकी हैं। वह फाइटर जेट उड़ाने वाली तीसरी राष्ट्रपति और दूसरी महिला राष्ट्राध्यक्ष बनी थीं। राष्ट्रपति मुर्मू ने से पहले पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम और प्रतिभा पाटिल ने भी सुखोई-30 MKI में उड़ान भरी थी। राफेल लड़ाकू विमान का क्या है इतिहास? बता दें, राफेल लड़ाकू विमान फ्रांसीसी कंपनी दसॉ एविएशन द्वारा निर्मित किया गया है। सितंबर 2020 में अंबाला एयरफोर्स स्टेशन पर भारतीय वायुसेना में औपचारिक रूप से शामिल किया गया था। अंबाला एयरबेस राफेल स्क्वाड्रन ‘गोल्डन एरोज' का मुख्य केंद्र है। इन विमानों का इस्तेमाल हाल ही में ‘ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान किया गया था, इसके माध्यम से आतंकवादी ठिकानों पर हमले कर अपनी ताकत को सैनियों ने दिखाया था।

Brijbhushan Sharan Singh के हेलीकॉप्टर की खेत में इमरजेंसी लैंडिंग! इस वजह से बिगड़ा संतुलन

Lucknow Desk: कैसरगंज के बीजेपी नेता और पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह के हेलीकॉप्टर को धान के खेत में अचानक उतारना पड़ा। जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। बताया जा रहा है कि तकनीकी खराबी आने के बाद पायलट ने सूझबूझ दिखाते हुए हेलीकॉप्टर को सुरक्षित उतारा, जहां हेलीकॉप्टर देखने के लिए ग्रामीण भी जुट गए। मिली जानकारी के मुताबिक, बृजभूषण शरण सिंह एक कार्यक्रम में शामिल होने जा रहे थे। उड़ान के कुछ ही मिनट बाद हेलीकॉप्टर में तकनीकी दिक्कत आने लगी। स्थिति को समझते हुए पायलट ने तुरंत इमरजेंसी लैंडिंग का फैसला लिया और नज़दीकी धान के खेत में हेलीकॉप्टर को सुरक्षित उतार दिया। घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी भी मौके पर पहुंच गए। हेलीकॉप्टर की जांच के लिए टेक्निकल टीम बुलाई गई है। फिलहाल राहत की बात यह है कि बृजभूषण शरण सिंह और हेलीकॉप्टर में मौजूद सभी लोग पूरी तरह सुरक्षित हैं। जांच के बाद ही तकनीकी खराबी की असली वजह पता चल पाएगी। इसी बीच पूर्व सांसद बृजभूषण सिंह ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी कर संदेश दिया। उन्होंने कहा, आज मेरा बिहार प्रदेश के अंदर संदेश व दिनारा विधानसभा क्षेत्र में चुनावी सभा का कार्यक्रम था। संदेश विधानसभा का कार्यक्रम करके मैं दिनारा विधानसभा के लिए हेलीकाप्टर से निकला था। अचानक मौसम खराब होने के कारण हेलीकाप्टर की सुरक्षित लैंडिंग एक खेत में करानी पड़ी। पायलट ने बड़ी सूझबूझ से लैंडिंग कराई। मैं, इस समय गाड़ी से पटना जा रहा हूं। किसी अफवाह में आने की जरूरत नहीं है। किसी प्रकार की कोई हानि नहीं हुई है। हम सभी पूर्णतया सुरक्षित हैं। हेलीकाप्टर की सुरक्षा का प्रबंध कर दिया गया है। प्रशासन व जनता का बहुत सहयोग रहा...धन्यवाद

Shahrukh Khan ने मनाया 60वां जन्मदिन, विदेशों से भी जुटे फैंस

Lucknow Desk: आज 02 नवंबर 2025 को बॉलीवुड के बादशाह Shahrukh Khan ने अपने 60वें जन्मदिन का जश्न मनाया। इस मौके पर उन्होंने अपने परिवार, करीबियों और फिल्म इंडस्ट्री के दोस्तों के साथ खुशियाँ बाँटी। उन्होंने अपने आलीशान घर के बजाय इस बार सार्वजनिक रूप से Mannat से बाहर नहीं दिखने का फैसला किया क्योंकि वहाँ फिलहाल निर्माण का काम चल रहा है। वहीँ, जश्न के लिए उन्होंने Alibaug में स्थित निजी स्थान चुना। एक विशेष फैन-मीट कार्यक्रम Balgandharva Rangmandir, बांद्रा में आयोजित किया गया था, जहाँ सीमित प्रवेश पास के माध्यम से प्रशंसक सीधे शामिल हुए। सोशल मीडिया पर सितारों ने बधाइयाँ दीं। जिसमें Farah Khan ने लिखा, “Happy birthday KING … rule for another 100 years”। बता दें कि Shahrukh Khan के जन्मदिन के मौके पर सिर्फ भारत भर से ही नहीं बल्कि विदेशों से भी फैंस जुटे। शाहरुख खान के फैन क्लबों ने जन्मदिन सप्ताह के रूप में मनाया, चैरिटी ड्राइव, विशेष बैनर आदि के माध्यम से ख़ास अंदाज़ से जश्न मनाया।

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होर्मुज से भारत के लिए बड़ी राहत: यूरिया और डीएपी से लदे 15 जहाज पहुंचे, किसानों को मिलेगी समय पर खाद

भारत के कृषि क्षेत्र के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से यूरिया, डीएपी (डाय-अमोनियम फॉस्फेट) और सल्फर लेकर आ रहे 15 मालवाहक जहाज सुरक्षित रूप से भारत की ओर बढ़ चुके हैं। यह जानकारी केंद्र सरकार ने दी है। हाल के दिनों में पश्चिम एशिया में बढ़े तनाव और समुद्री मार्गों पर सुरक्षा संबंधी चिंताओं के कारण इन जहाजों की आवाजाही को लेकर आशंका बनी हुई थी। अब इन जहाजों के सुरक्षित आगे बढ़ने से देश में उर्वरकों की उपलब्धता को लेकर राहत मिली है।   किसानों के लिए राहत की खबर यूरिया और डीएपी खरीफ फसलों के लिए सबसे महत्वपूर्ण उर्वरकों में गिने जाते हैं। ऐसे समय में जब कई राज्यों में खेती का कार्य तेज़ी से चल रहा है, इन जहाजों के भारत पहुंचने से किसानों को समय पर खाद उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी। सरकार का कहना है कि इससे उर्वरकों की आपूर्ति श्रृंखला मजबूत होगी और बाजार में किसी प्रकार की कमी की आशंका भी कम होगी।   घरेलू उत्पादन भी लक्ष्य से अधिक सरकार ने यह भी बताया है कि अप्रैल से जून 2026 के दौरान देश में यूरिया का घरेलू उत्पादन निर्धारित लक्ष्य से अधिक रहा है। इस अवधि में लगभग 71.6 लाख टन यूरिया का उत्पादन हुआ, जबकि लक्ष्य 67.9 लाख टन था। लगातार तीन महीनों तक लक्ष्य से अधिक उत्पादन होने से देश की उर्वरक उपलब्धता और मजबूत हुई है।   वैश्विक तनाव के बीच मजबूत तैयारी पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों पर पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है। यह समुद्री मार्ग वैश्विक ऊर्जा और उर्वरक आपूर्ति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसे माहौल में भारत सरकार ने आयात के साथ-साथ घरेलू उत्पादन पर भी विशेष ध्यान दिया, जिससे संभावित संकट का असर किसानों तक न पहुंचे।   जल्द भारतीय बंदरगाहों पर पहुंचेगा माल सरकार के अनुसार, ये जहाज भारत के विभिन्न बंदरगाहों पर पहुंचने के बाद यूरिया, डीएपी और सल्फर की खेप उतारेंगे। इसके बाद संबंधित राज्यों में उर्वरकों की आपूर्ति तेज़ी से की जाएगी। इससे खरीफ सीजन में किसानों की जरूरतों को पूरा करने में सहायता मिलेगी और कृषि कार्य प्रभावित नहीं होंगे। होर्मुज जलडमरूमध्य से 15 उर्वरक जहाजों का सुरक्षित भारत की ओर बढ़ना देश के कृषि क्षेत्र के लिए बेहद सकारात्मक संकेत है। एक ओर घरेलू उत्पादन लक्ष्य से अधिक रहा है, वहीं दूसरी ओर आयातित उर्वरकों की नियमित आपूर्ति से देश में खाद की उपलब्धता मजबूत बनी रहेगी। सरकार का कहना है कि किसानों को समय पर आवश्यक उर्वरक उपलब्ध कराने के लिए सभी जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं, जिससे खेती और खाद्य सुरक्षा पर किसी प्रकार का नकारात्मक प्रभाव न पड़े।

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रूस की दो बड़ी ऑयल रिफाइनरियों पर यूक्रेन का हमला, मचा हड़कंप

Lucknow Desk: रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध एक बार फिर खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। हाल ही में यूक्रेन ने रूस की दो बड़ी ऑयल रिफाइनरियों पर हमला कर दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। इस हमले के बाद दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ गया है। रूस ने इसे गंभीर उकसावे वाली कार्रवाई बताया है, जबकि यूक्रेन का कहना है कि वह रूस की सैन्य और ऊर्जा क्षमता को कमजोर करने की रणनीति पर काम कर रहा है।   देर रात हुआ बड़ा हमला मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, हमला देर रात ड्रोन और मिसाइलों के जरिए किया गया। बताया जा रहा है कि रूस के औद्योगिक क्षेत्र में स्थित दो प्रमुख तेल रिफाइनरियों को निशाना बनाया गया। हमले के तुरंत बाद कई जगहों पर आग लग गई और आसमान में धुएं के बड़े गुबार दिखाई दिए। स्थानीय प्रशासन ने तुरंत राहत और बचाव कार्य शुरू कर दिया।   प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, धमाकों की आवाज कई किलोोमीटर दूर तक सुनाई दी। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में आग की ऊंची लपटें और अफरा-तफरी का माहौल साफ दिखाई दे रहा है।   ऊर्जा क्षेत्र को निशाना बनाने की रणनीति विशेषज्ञों का मानना है कि यूक्रेन अब रूस के ऊर्जा ढांचे को निशाना बनाकर दबाव बढ़ाना चाहता है। ऑयल रिफाइनरियां रूस की अर्थव्यवस्था और सैन्य सप्लाई के लिए बेहद अहम मानी जाती हैं। ऐसे में इन ठिकानों पर हमला रूस के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।   जानकारों के अनुसार, अगर इस तरह के हमले लगातार होते रहे तो रूस के ईंधन उत्पादन और सप्लाई पर असर पड़ सकता है। इससे वैश्विक तेल बाजार में भी उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। रूस ने दी कड़ी चेतावनी हमले के बाद रूस ने यूक्रेन को कड़ी चेतावनी दी है। रूसी अधिकारियों ने कहा कि इस कार्रवाई का जवाब दिया जाएगा। रूस के रक्षा मंत्रालय का दावा है कि उसकी एयर डिफेंस प्रणाली ने कई ड्रोन मार गिराए, लेकिन कुछ ड्रोन अपने लक्ष्य तक पहुंचने में सफल रहे।   रूस ने यह भी आरोप लगाया कि पश्चिमी देशों से मिले आधुनिक हथियारों का इस्तेमाल इस हमले में किया गया। हालांकि यूक्रेन की तरफ से इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी गई है।   वैश्विक बाजार पर असर की आशंका इस हमले के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों को लेकर चिंता बढ़ गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि रूस की ऊर्जा सुविधाओं पर लगातार हमले होते रहे तो दुनिया भर में तेल सप्लाई प्रभावित हो सकती है।   कई देशों ने दोनों पक्षों से संयम बरतने की अपील की है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय को डर है कि युद्ध अगर इसी तरह बढ़ता रहा तो इसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है।   युद्ध के नए चरण की ओर बढ़ता संघर्ष विशेषज्ञों का मानना है कि यह हमला दिखाता है कि युद्ध अब नए चरण में प्रवेश कर चुका है। पहले जहां लड़ाई सीमावर्ती इलाकों तक सीमित थी यूक्रेन लगातार रूस के अंदर रणनीतिक ठिकानों पर हमले बढ़ा रहा है, जबकि रूस भी जवाबी कार्रवाई तेज कर रहा है। ऐसे में आने वाले दिनों में हालात और गंभीर हो सकते हैं।   दुनिया की नजरें अगले कदम पर फिलहाल पूरी दुनिया की नजर रूस और यूक्रेन के अगले कदम पर टिकी हुई है। दोनों देशों के बीच बढ़ता तनाव किसी बड़े संघर्ष का संकेत दे रहा है। अगर जल्द शांति की दिशा में कदम नहीं उठाए गए तो यह युद्ध और ज्यादा विनाशकारी रूप ले सकता है।

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