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क्यों निकल आता है ? भारतीय पुरुषों का पेट

आखिर क्यों निकल आता है ? भारतीय पुरुषों का पेट

TV 24 Network June 17, 2026 0
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भारतीय पुरुषों का पेट निकलने का असली कारण

Lucknow Desk: भारतीय पुरुषों में पेट निकलना आज एक बहुत सामान्य समस्या बन चुकी है। पहले यह समस्या अधिक उम्र के लोगों में दिखाई देती थी, लेकिन अब 25–30 साल के युवाओं में भी बढ़ता हुआ पेट आम बात हो गई है। कई लोग इसे सिर्फ ज्यादा खाने का परिणाम मानते हैं, जबकि वास्तविकता इससे कहीं अधिक जटिल है। पेट निकलने के पीछे खान-पान, जीवनशैली, मानसिक तनाव, हार्मोन, नींद और शारीरिक गतिविधि की कमी जैसे कई कारण जिम्मेदार होते हैं।

 

सबसे बड़ा कारण आधुनिक जीवनशैली है। आज अधिकांश लोग घंटों कुर्सी पर बैठकर काम करते हैं। ऑफिस जॉब, मोबाइल और कंप्यूटर के बढ़ते उपयोग ने शारीरिक गतिविधियों को बहुत कम कर दिया है। शरीर जब पर्याप्त मात्रा में कैलोरी खर्च नहीं करता, तब अतिरिक्त ऊर्जा चर्बी के रूप में जमा होने लगती है। यह चर्बी सबसे पहले पेट के आसपास दिखाई देती है। भारतीय पुरुषों में यह समस्या अधिक देखने को मिलती है क्योंकि शरीर की संरचना ऐसी होती है कि फैट आसानी से पेट के हिस्से में जमा होता है।

 

खान-पान की आदतें भी एक प्रमुख कारण हैं। भारतीय भोजन में कार्बोहाइड्रेट की मात्रा अक्सर अधिक होती है, जैसे चावल, रोटी, आलू और मीठे पदार्थ। इसके अलावा तला-भुना खाना, फास्ट फूड, नमकीन, मिठाइयाँ और मीठे पेय पदार्थ वजन बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। कई लोग देर रात भोजन करते हैं और खाने के तुरंत बाद सो जाते हैं, जिससे भोजन ठीक से पच नहीं पाता और शरीर में फैट जमा होने लगता है। बाहर का प्रोसेस्ड फूड भी पेट की चर्बी बढ़ाने में योगदान देता है।

 

तनाव और मानसिक दबाव भी पेट निकलने का एक बड़ा कारण है। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में काम का दबाव, आर्थिक चिंता और पारिवारिक जिम्मेदारियाँ मानसिक तनाव बढ़ाती हैं। तनाव के दौरान शरीर में cortisol नामक हार्मोन का स्तर बढ़ जाता है, जो पेट के आसपास फैट जमा करने में मदद करता है। कई लोग तनाव में ज्यादा खाना खाने लगते हैं, जिसे emotional eating कहा जाता है। यह आदत धीरे-धीरे वजन बढ़ाने लगती है।

 

नींद की कमी भी एक महत्वपूर्ण कारण है। पर्याप्त नींद न लेने से शरीर का metabolism प्रभावित होता है। कम नींद लेने पर भूख बढ़ाने वाले हार्मोन सक्रिय हो जाते हैं, जिससे व्यक्ति अधिक भोजन करने लगता है। इसके अलावा थकान के कारण व्यायाम करने की इच्छा भी कम हो जाती है। लगातार कम नींद लेने से वजन बढ़ने और पेट निकलने की संभावना काफी बढ़ जाती है।

 

उम्र बढ़ने के साथ भी पेट निकलने की समस्या बढ़ती है। 30 वर्ष की उम्र के बाद शरीर की चयापचय प्रक्रिया धीरे-धीरे धीमी होने लगती है। मांसपेशियाँ कम होने लगती हैं और फैट जमा होने लगता है। यदि इस समय व्यक्ति नियमित व्यायाम और संतुलित भोजन पर ध्यान नहीं देता, तो पेट तेजी से बढ़ सकता है।

 

शराब और मीठे पेय पदार्थों का सेवन भी पेट बढ़ाने का एक बड़ा कारण है। बीयर, शराब, कोल्ड ड्रिंक और अत्यधिक चीनी वाली चाय या कॉफी शरीर में अतिरिक्त कैलोरी बढ़ाती हैं। इन पेय पदार्थों से मिलने वाली कैलोरी जल्दी फैट में बदल जाती है, विशेषकर पेट के आसपास।

 

पेट निकलना केवल सुंदरता का मुद्दा नहीं है, बल्कि यह स्वास्थ्य के लिए भी खतरनाक हो सकता है। पेट की अधिक चर्बी से उच्च रक्तचाप, फैटी लिवर और हृदय रोग जैसी समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए समय रहते जीवनशैली में सुधार करना बहुत जरूरी है।

 

नियमित व्यायाम, संतुलित भोजन, पर्याप्त नींद और तनाव नियंत्रण पेट कम करने के सबसे प्रभावी उपाय हैं। यदि व्यक्ति रोजाना थोड़ा चलना-फिरना शुरू करे, जंक फूड कम करे और नियमित रूप से व्यायाम करे, तो पेट की चर्बी को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।

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Brijbhushan Sharan Singh के हेलीकॉप्टर की खेत में इमरजेंसी लैंडिंग! इस वजह से बिगड़ा संतुलन

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Shahrukh Khan ने मनाया 60वां जन्मदिन, विदेशों से भी जुटे फैंस

Lucknow Desk: आज 02 नवंबर 2025 को बॉलीवुड के बादशाह Shahrukh Khan ने अपने 60वें जन्मदिन का जश्न मनाया। इस मौके पर उन्होंने अपने परिवार, करीबियों और फिल्म इंडस्ट्री के दोस्तों के साथ खुशियाँ बाँटी। उन्होंने अपने आलीशान घर के बजाय इस बार सार्वजनिक रूप से Mannat से बाहर नहीं दिखने का फैसला किया क्योंकि वहाँ फिलहाल निर्माण का काम चल रहा है। वहीँ, जश्न के लिए उन्होंने Alibaug में स्थित निजी स्थान चुना। एक विशेष फैन-मीट कार्यक्रम Balgandharva Rangmandir, बांद्रा में आयोजित किया गया था, जहाँ सीमित प्रवेश पास के माध्यम से प्रशंसक सीधे शामिल हुए। सोशल मीडिया पर सितारों ने बधाइयाँ दीं। जिसमें Farah Khan ने लिखा, “Happy birthday KING … rule for another 100 years”। बता दें कि Shahrukh Khan के जन्मदिन के मौके पर सिर्फ भारत भर से ही नहीं बल्कि विदेशों से भी फैंस जुटे। शाहरुख खान के फैन क्लबों ने जन्मदिन सप्ताह के रूप में मनाया, चैरिटी ड्राइव, विशेष बैनर आदि के माध्यम से ख़ास अंदाज़ से जश्न मनाया।

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16 दवाओं पर सरकार का बड़ा फैसला, अब नहीं होगी बिक्री

Lucknow Desk: सरकार ने 16 दवाओं पर लगाया प्रतिबंध केंद्र सरकार ने देशभर में इस्तेमाल होने वाली 16 फिक्स्ड डोज कॉम्बिनेशन (FDC) दवाओं पर प्रतिबंध लगा दिया है। स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार इन दवाओं का इस्तेमाल लोगों की सेहत के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है। सरकार ने कहा कि इन दवाओं का कोई स्पष्ट चिकित्सीय लाभ नहीं मिला, इसलिए इनके निर्माण, बिक्री और वितरण पर रोक लगाई गई है।   क्या होती हैं FDC दवाएं फिक्स्ड डोज कॉम्बिनेशन यानी FDC दवाएं वे होती हैं जिनमें दो या उससे अधिक दवाओं को मिलाकर एक दवा तैयार की जाती है। कई मामलों में ये कॉम्बिनेशन मरीजों के लिए फायदेमंद होते हैं, लेकिन कुछ दवाओं के मिश्रण से शरीर पर गलत प्रभाव पड़ सकता है। विशेषज्ञों की जांच में पाया गया कि प्रतिबंधित दवाओं के कॉम्बिनेशन वैज्ञानिक मानकों पर सही नहीं उतरे।   स्वास्थ्य मंत्रालय ने क्यों लिया फैसला सरकार ने यह फैसला विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट के आधार पर लिया है। जांच में सामने आया कि इन दवाओं के सेवन से एलर्जी, लीवर डैमेज, पेट संबंधी समस्याएं और अन्य गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। स्वास्थ्य मंत्रालय का कहना है कि जनता की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए यह कदम उठाया गया है।   कौन-कौन सी दवाएं हुईं बैन प्रतिबंधित दवाओं में कई दर्द निवारक, एंटीबायोटिक और स्किन प्रोडक्ट कॉम्बिनेशन शामिल हैं। इनमें “Amoxicillin + Serratiopeptidase”, “Paracetamol + Lignocaine” और “Dicyclomine + Paracetamol + Clidinium Bromide” जैसे कॉम्बिनेशन शामिल बताए गए हैं। सरकार ने मेडिकल स्टोरों को इन दवाओं की बिक्री तुरंत रोकने का निर्देश दिया है।   डॉक्टरों ने फैसले का किया स्वागत स्वास्थ्य विशेषज्ञों और डॉक्टरों ने सरकार के इस फैसले का समर्थन किया है। उनका कहना है कि कई बार मरीज बिना सही सलाह के ऐसी दवाओं का सेवन कर लेते हैं, जिससे शरीर पर बुरा असर पड़ता है। डॉक्टरों के मुताबिक किसी भी दवा का उपयोग वैज्ञानिक जांच और मेडिकल रिसर्च के आधार पर ही होना चाहिए।   बिना डॉक्टर सलाह दवा लेना खतरनाक विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में बड़ी संख्या में लोग छोटी-मोटी बीमारी में सीधे मेडिकल स्टोर से दवा खरीद लेते हैं। यह आदत कई बार गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं को जन्म देती है। सरकार ने लोगों से अपील की है कि वे बिना डॉक्टर की सलाह के कोई भी दवा न लें।   फार्मा कंपनियों पर पड़ेगा असर सरकार के इस फैसले का असर दवा कंपनियों पर भी पड़ सकता है। जिन कंपनियों की बिक्री इन दवाओं पर निर्भर थी, उन्हें आर्थिक नुकसान होने की संभावना है। हालांकि सरकार का कहना है कि मरीजों की सुरक्षा सबसे ज्यादा जरूरी है और किसी भी जोखिम वाली दवा को बाजार में रहने की अनुमति नहीं दी जा सकती।   मेडिकल स्टोर संचालकों को निर्देश स्वास्थ्य मंत्रालय ने मेडिकल स्टोर संचालकों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि प्रतिबंधित दवाओं की बिक्री तुरंत बंद की जाए। यदि किसी दुकान में ये दवाएं पाई जाती हैं तो कार्रवाई की जा सकती है। साथ ही लोगों से कहा गया है कि यदि उनके पास ऐसी दवाएं मौजूद हैं तो उनका इस्तेमाल बंद कर डॉक्टर से सलाह लें।   पहले भी लग चुके हैं कई बैन यह पहली बार नहीं है जब सरकार ने किसी दवा पर प्रतिबंध लगाया हो। इससे पहले भी कई फिक्स्ड डोज कॉम्बिनेशन दवाओं पर रोक लगाई जा चुकी है। सरकार लगातार दवा बाजार पर निगरानी बढ़ा रही है ताकि लोगों को सुरक्षित और प्रभावी दवाएं मिल सकें।   स्वास्थ्य सुरक्षा की दिशा में बड़ा कदम विशेषज्ञों के अनुसार सरकार का यह फैसला लोगों की सुरक्षा के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। इससे दवा कंपनियों की जवाबदेही बढ़ेगी और मरीजों में भी जागरूकता आएगी। स्वास्थ्य मंत्रालय का मानना है कि सुरक्षित दवाओं का इस्तेमाल ही बेहतर स्वास्थ्य व्यवस्था की सबसे बड़ी जरूरत है।

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FSSAI ने दी चेतावनी, क्या आप भी अखबार में खाते हैं समोसे-कचौड़ी?

Lucknow Desk: अगर आप बाजार में समोसे, कचौड़ी या जलेबी खरीदते समय उन्हें अखबार में पैक करवाते हैं, या घर में पराठे और स्नैक्स अखबार में लपेटकर रखते हैं, तो अब सावधान हो जाइए। यह आदत आपकी सेहत के लिए खतरनाक साबित हो सकती है। इसी वजह से भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण यानी FSSAI ने अखबार में खाना परोसने और पैक करने के खिलाफ चेतावनी जारी की है।   दरअसल, अखबार की छपाई में इस्तेमाल होने वाली स्याही में कई तरह के हानिकारक रसायन मौजूद होते हैं। जब गर्म या तेलयुक्त खाना सीधे अखबार के संपर्क में आता है, तो ये केमिकल खाने में मिल सकते हैं। इसके बाद यही जहरीले तत्व हमारे शरीर के अंदर पहुंच जाते हैं और धीरे-धीरे स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाने लगते हैं।   FSSAI का कहना है कि अखबार या किसी भी तरह के प्रिंटेड पेपर का इस्तेमाल खाने की पैकेजिंग के लिए नहीं किया जाना चाहिए। यह नियम नया नहीं है। इससे पहले भी साल 2016 और 2019 में खाद्य सुरक्षा एजेंसी ने लोगों को इस खतरे के प्रति आगाह किया था। खाद्य सुरक्षा एवं मानक (पैकेजिंग) विनियम, 2018 के तहत भी खाने को अखबार में रखना या लपेटना पूरी तरह प्रतिबंधित है।   विशेषज्ञों के मुताबिक, अखबार की स्याही में कुछ ऐसे रसायन पाए जाते हैं जो लंबे समय तक शरीर में जाने पर कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ा सकते हैं। इनमें कुछ ऐसे केमिकल भी शामिल हैं जो रंगाई, पेंट, प्लास्टिक और रबर उद्योगों में इस्तेमाल किए जाते हैं। यही वजह है कि लगातार ऐसे दूषित भोजन का सेवन स्वास्थ्य के लिए जोखिम भरा माना जाता है।   सिर्फ कैंसर ही नहीं, अखबार में पैक खाना आपके पाचन तंत्र को भी नुकसान पहुंचा सकता है। पुराने अखबारों पर धूल, गंदगी और कई तरह के सूक्ष्मजीव मौजूद हो सकते हैं। जब ये खाने के संपर्क में आते हैं तो फूड पॉइजनिंग, पेट दर्द, उल्टी, दस्त और अन्य संक्रमण की समस्या पैदा हो सकती है।   इसके अलावा इन रसायनों का असर शरीर के दूसरे अंगों पर भी पड़ता है। विशेषज्ञ बताते हैं कि जहरीले तत्वों के लगातार संपर्क से दिमाग और किडनी भी प्रभावित हो सकती हैं। शरीर में विषैले पदार्थों के जमा होने से किडनी पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है और लंबे समय में यह गंभीर समस्या का रूप ले सकता है।   बच्चों, बुजुर्गों, किशोरों और कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली वाले लोगों के लिए यह खतरा और भी ज्यादा है। ऐसे लोगों में इन रसायनों का असर तेजी से दिखाई दे सकता है और गंभीर बीमारियों का जोखिम बढ़ सकता है।   इसलिए अगली बार जब आप कोई खाद्य पदार्थ खरीदें या पैक करें, तो अखबार की जगह फूड-ग्रेड पेपर, बटर पेपर, एल्युमिनियम फॉयल या सुरक्षित पैकेजिंग सामग्री का इस्तेमाल करें। छोटी सी सावधानी आपको और आपके परिवार को बड़े स्वास्थ्य जोखिमों से बचा सकती है।

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